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पुण्य तिथि: मोहम्मद रफी की पहली कमाई थी 50 रुपए, जानिए कैसा रहा इनका सफर

- एक बार अमृतसर में तत्कालीन सुर सम्राट कुंदन लाल सहगल एक जलसे में गाने के लिए आए हुए थे। रफी साहब भी उस जलसे में सहगल जी को सुनने आए थे।

अचानक बिजली चले जाने के कारण माइक के बिना सहगल साहब ने गाने से मना कर दिया। उनके मना करने पर भीड़ बेकाबू होने लगी तो मंच संचालकों को पता चला कि बालक रफी भी अच्छा गाता है तो उन्होंने बेकाबू भीड़ के आगे उस बालक रफी को गाने के लिए स्टेज पर भेज दिया।

बालक रफी ने गाना शुरू किया और देखते ही देखते वो बेकाबू भीड़ बच्चे रफी की आवाज को सुनकर शांत बैठ गई। इस चमत्कार को स्वयं सहगल साहब ने देखा और स्टेज पर आकर बालक रफी से कहा कि तुम्हारी आवाज हिंदुस्तान के दिलों में राज करेगी और उसकी वो भविष्यवाणी आगे चलकर सच भी हुई।

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