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पुण्य तिथि: मोहम्मद रफी की पहली कमाई थी 50 रुपए, जानिए कैसा रहा इनका सफर

रफी साहब की जादुई आवाज को पहचानने और तराशने का श्रेय नौशाद साहब को जाता है।

पुण्य तिथि: मोहम्मद रफी की पहली कमाई थी 50 रुपए, जानिए कैसा रहा इनका सफर

मोहम्मद रफी की आवाज ने हजारों-लाखों दिलों पर राज किया। संगीत उनका जुनून था। लेकिन यह आवाज अचानक चुप हो गई।

31 जुलाई 1980 को अपने एक गाने की रिकॉर्डिंग पूरी करने के बाद संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से रफी साहब ने कहा था-‘ओके, नाऊ आई विल लीव।’

तब किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि आवाज का यह जादूगर सचमुच हमेशा के लिए छोड़कर चला जाएगा। उनके कहे गए यह शब्द सच में जीवन के आखिरी शब्द साबित हुए।

उसी दिन शाम 7 बजकर 30 मिनट पर मोहम्मद रफी को दिल का दौरा पड़ा। वह दुनिया को छोड़कर चले गए। बस पीछे रह गई, उनकी आवाज, जिसे हम कभी भुला नहीं पाए।

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