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आसान नहीं थी इन बॉलीवुड सितारों की जिंदगी, मुकाम हासिल करने के लिए करना पड़ा था ये काम

इन फिल्मी सितारों को बॉलीवुड में अपना मुकाम बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा था।

आसान नहीं थी इन बॉलीवुड सितारों की जिंदगी, मुकाम हासिल करने के लिए करना पड़ा था ये काम

हर इंसान की जिंदगी में स्ट्रगल यानी संघर्ष का दौर जरूर आता है। सफलता मिलने के बाद भी संघर्ष के वो दिन ताउम्र याद रहते हैं। हमारे बॉलीवुड स्टार्स भी अपने स्ट्रगल के दिनों को नहीं भूले हैं।

आज भी उस समय की बातें उनके जेहन में बसी हुई हैं। बॉलीवुड के ऐसे ही कुछ बड़े स्टार शेयर कर रहें हैं अपनी जिदंगी से जुड़ी कुछ अहम बाते-

अक्षय कुमार

समय गुजर जाता है, बस उसकी बातें-यादें हमारे मन में रह जाती हैं। स्ट्रगल के दौर की यादें अब भी मेरे जेहन में बसी हुई हैं। एक समय ऐसा भी था, जब मेरे पास नॉर्मल फोटोशूट कराने के लिए पैसे नहीं थे। तब मेरे एक फोटोग्राफर दोस्त ने मदद की।

हम अच्छी लोकेशन की तलाश कर रहे थे। अचानक एक सुंदर से बंगले पर नजर गई। वह जगह हमें फोटोशूट के लिए सही लगी। लेकिन हमें बंगले की दीवार से सटकर फोटो लेने की परमिशन नहीं मिली। तब मैंने मजाक-मजाक में अपने दोस्त से कहा था, ‘एक दिन मैं यह बंगला खरीदूंगा।’ मेरी बात सच भी हुई।

स्ट्रगल का दौर खत्म हुआ, तो मुझे फिल्में मिलने लगीं और हिट भी हुर्इं। जब मेरे पास पर्याप्त पैसा आ गया तो मैंने वही बंगला खरीदा, जिसकी दीवार से सटकर कभी एक फोटो शूट करने की परमिशन भी नहीं मिली थी। इस बात से मैंने सीखा कि खुद पर भरोसा रखकर मेहनत करते रहें तो मंजिल जरूर मिलेगी।

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अरशद वारसी-

टीनएज में मैं एक साधारण सा दिखने वाला लड़का था, लेकिन मेरी ख्वाहिश एक्टर बनने की थी। जबकि मेरी फाइनेंशियल कंडीशन ऐसी नहीं थी कि मैं फोटो शूट करवाता या लंबा स्ट्रगल करता।

पैसे कमाने के लिए मैं घर-घर जाकर कॉस्मेटिक का सामान बेचा करता था। तब कई लोग बगैर मेरी बात सुने ही दरवाजा बंद कर देते थे। तब मुझे अहसास होता था कि पैसा कमाना कितना मुश्किल काम है।

इसके बाद मैंने एक फोटो लैब में भी काम किया। वहां सुंदर तस्वीरें देखकर बार-बार एक्टर बनने का ख्याल आता। आखिर में मैंने एक्टर बनने के लिए कोशिशें शुरू कर दीं।

शुरुआत में गोविंदा और दूसरे कई स्टार्स के सॉन्ग में एक्सट्रा का काम किया। धीरे-धीरे काम मिलता गया। एक दिन मुझे ‘तेरे मेरे सपने’ में बतौर हीरो एक्ट करने का मौका मिला। उसके बाद भी मैंने स्ट्रगल किया। कुछ समय बाद मेरी एक्टिंग की गाड़ी चल पड़ी।

आज अपने करियर से खुश हूं। हां, जब भी स्ट्रगल टाइम को याद करता हूं, तो सोचता हूं कि जो कोई कुछ करने की ठान लेता है, वही सिंकदर बनता है।

सोनम कपूर-

हम सफलता के कितने भी ऊंचे मुकाम पर पहुंच जाएं, लेकिन स्ट्रगल के दिन कभी नहीं भूल पाते हैं। मैंने कभी एक्ट्रेस बनने के बारे में नहीं सोचा था, क्योंकि मेरा वेट बहुत ज्यादा था। सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती थी।

हायर स्टडीज के लिए मम्मी-पापा ने मुझे सिंगापुर भेजा। वहां स्टडी के अलावा भी काफी खर्च होता था। बार-बार मम्मी-पापा से पैसे मांगना अच्छा नहीं लगता था। तब मैंने सिंगापुर में एक रेस्टोरेंट में नौकरी कर ली। मुझे उस वक्त खुद पर प्राउड फील होता था कि अपनी मेहनत से पैसे कमा रही हूं।

इसके बाद इंडिया आकर मैंने संजयलीला भंसाली सर के साथ बतौर असिस्टेंट काम शुरू किया। इस दौरान उन्होंने मुझे फिल्म ‘सांवरिया’ में काम करने का ऑफर दिया। मैंने अपना वजन कम किया और फिल्मों में आ गई।

आज जब अपनी जर्नी को देखती हूं, तो सोचकर अच्छा लगता है कि स्ट्रगल तो किया लेकिन अपना मुकाम खुद बनाया।

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सोनाक्षी सिन्हा-

मैं फिल्मों में आने से पहले बड़े-बड़े डिजाइनर्स के साथ बतौर असिस्टेंट काम किया करती थी। उस वक्त मॉडल्स को ड्रेसअप में मदद करना, कॉस्ट्यूम डिजाइन के दौरान डिजाइनर को हेल्प करना, जैसे काम किया करती थी।

मुझे यह सब करना बहुत अच्छा लगता था। रैंपवॉक करती मॉडल्स को देखकर बहुत अच्छा लगता था। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि कभी मैं भी रैंपवॉक करूंगी।

जब ‘दबंग’ से बॉलीवुड में आई और हिट हुर्इं, तो कई फैशन डिजाइनर्स ने रैंपवॉक के लिए मुझे बुलाया, यहां तक कि शो स्टॉपर भी बनाया। जब पहली बार रैंपवॉक किया, तो बहुत खुशी हुई थी। अब तो जब-तब कई डिजाइनर्स के लिए रैंपवॉक करती रहती हूं।

लेकिन जब अपने रैंप के पीछे काम करने वाले पुराने दिनों को याद करती हूं, तो खुशी होती है। आखिर मैंने रैंप वॉक स्टेज के पीछे से आगे तक का शानदार सफर खुद ही तय किया है।

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