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Exclusive Interview: तापसी ने बॉलीवुड में कॉम्पिटिशन सहित फिल्म ''सूरमा'' स्टार कास्ट को लेकर कही ये बड़ी बात

फिल्म ''चश्मेबद्दूर'' से बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने वाली तापसी पन्नू अब फिल्म ''सूरमा'' में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में उनके साथ दिलजीत दोसांझ लीड रोल में होंगे।

Exclusive Interview: तापसी ने बॉलीवुड में कॉम्पिटिशन सहित फिल्म

तापसी पन्नू ने जब फिल्म ‘चश्मेबद्दूर’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था तो कोई बड़ी सफलता नहीं मिली थी। लेकिन फिल्म ‘बेबी’ में शबाना खान का रोल निभाकर उन्होंने क्रिटिक्स से लेकर दर्शकों तक के जेहन में गहरी छाप छोड़ी। इसके बाद तापसी ने ‘बेबी’ के सीक्वल ‘नाम शबाना’ में लीड रोल किया।

फिल्म ‘पिंक’ में अपने दमदार एक्टिंग से साबित कर दिया कि वह वूमेन ओरिएंटेड फिल्मों के लिए बेस्ट एक्ट्रेस हैं। सीरियस किस्म की इन फिल्मों के साथ तापसी ने ‘जुड़वा-2’ जैसी कमर्शियल मसाला फिल्म भी की।

इस तरह अलग-अलग जॉनर में बखूबी बैलेंस उन्होंने बनाया। अब वह हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की बायोपिक ‘सूरमा’ में नजर आएंगी। इस फिल्म में काम करके वह बहुत खुश हैं। हाल ही में तापसी से फिल्म ‘सूरमा’ और करियर से जुड़ी बातचीत हुई। पेश है, बातचीत के चुनिंदा अंश-

फिल्म ‘सूरमा’ करने की क्या वजह रही?

मुझे स्पोर्ट्स बहुत पसंद है। यही वजह है कि मैंने फिल्म ‘सूरमा’ की है। इस फिल्म की कहानी हॉकी बैकग्राउंड पर है। यह फिल्म हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की बायोपिक है। उनकी पीठ पर गोली लगी थी।

जिंदगी व्हील चेयर पर आ गई थी, लेकिन संदीप सिंह ने हार नहीं मानी, अपने जज्बे से किस्मत का लिखा बदल दिया। उन्होंने न सिर्फ दोबारा हॉकी खेली बल्कि कैप्टन बनकर वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया।

क्या आप फिल्म ‘सूरमा’ करने से पहले संदीप सिंह के बारे में कुछ जानती थी?

नहीं, इस फिल्म को करने से पहले मुझे संदीप सिंह के बारे में जानकारी नहीं थी। इस बात का बहुत अफसोस हुआ कि एक भारतीय होते हुए भी मुझे संदीप के बारे में पता नहीं था। अब फिल्म ‘सूरमा’ के जरिए हम दर्शकों को हॉकी प्लेयर संदीप की इंस्पिरेशनल स्टोरी बता रहे हैं।

इस फिल्म में आपका किरदार क्या है?

फिल्म में मेरे किरदार का नाम हरप्रीत है।

संदीप सिंह (दिलजीत दोसांझ) से उसका क्या रिश्ता है?

इस बारे में अभी कुछ नहीं बताऊंगी। आपको इन सब बातों की जानकारी फिल्म देखने के बाद ही मिलेगी। लेकिन इतना जरूर कहूंगी कि संदीप ने अपनी जिंदगी में जो मुकाम हासिल किया है, उसमें मेरे किरदार हरप्रीत का बहुत बड़ा हाथ रहा है।

हरप्रीत एक ऐसी लड़की है, जो हॉकी के मैदान में आते ही बहुत ज्यादा एग्रेसिव हो जाती है, लेकिन असल जिंदगी में बहुत ही सीधी-साधी, शर्मीली और धीरे-धीरे बोलने वाली लड़की है। मैं असल जिंदगी में ऐसी बिल्कुल भी नहीं हूं, इस वजह से मेरे लिए हरप्रीत बनना थोड़ा मुश्किल रहा।

एक हॉकी प्लेयर के रोल को निभाने के लिए आपने क्या तैयारियां कीं?

स्पोर्ट्स से मुझे बचपन से लगाव रहा है, बास्केट बॉल, वॉलीबॉल खूब खेला है। मैं हमेशा से खेल से जुड़े लोगों को ही रियल हीरो मानती आई हूं। लेकिन मैंने कभी हॉकी का खेल नहीं खेला था। ऐसे में हॉकी खेलना सीखा। हां, मैं खुद पंजाबी हूं तो फिल्म में लैंग्वेज की कोई प्रॉब्लम नहीं हुई।

दिलजीत दोसांझ ने फिल्म में संदीप सिंह का रोल किया है। उनके साथ वर्किंग एक्सपीरियंस कैसे रहे?

वह बहुत कम बोलते हैं, जबकि मैं बहुत बोलती हूं। सेट पर उनसे इतनी बात करती थी कि उन्होंने मेरा नाम ‘गल्ला दी रानी’ (बातों की रानी) रख दिया था। लेकिन ऐसा नहीं है कि दिलजीत के शर्मीले स्वभाव या कम बोलने से मुझे कोई दिक्कत हुई।

उनकी तरह कई एक्टर्स हैं, जो कम बोलते हैं। लेकिन मेरा ध्यान उनके नेचर की बजाय काम पर होता है। जब मेरा को-एक्टर अच्छा काम करता है तो उसे देखकर मुझे भी अच्छा शॉट देने का जोश आ जाता है।

आपकी पिछली कुछ फिल्में एक्शन बेस्ड रही, क्या इस तरह की फिल्में ही आपकी प्रॉयोरिटी में हैं?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। (हंसते हुए) मैं क्या करूं, मुझे कोई नॉर्मल लड़की का किरदार देता ही नहीं है। हर कोई मुझसे फाइटिंग ही करवाना चाहता है। मैं तो नॉर्मल लड़की का रोल करने के लिए बेताब हूं।

फिल्म ‘जुड़वा-2’ करके मैंने लोगों को मैसेज भी दिया कि मैं हीरोइन वाला काम भी कर सकती हूं, लेकिन फिर भी कोई मेरी बातों को नहीं समझ रहा है। वैसे मुझे लगता है कि बाकी एक्ट्रेसेस की एक्शन जोन पर खास पकड़ नहीं थी या कहूं कि यह जगह अभी भरी नहीं थी।

एक्शन जॉनर में डायरेक्टर्स-प्रोड्यूसर के लिए मैं एक अच्छा ऑप्शन बन गई हूं। जब भी बात फिल्मों में तोड़-फोड़ की आती है, लोगों को तापसी याद आ जाती है। खैर, मेरे लिए यह खुशी की बात है।

इंडस्ट्री में कॉम्पिटिशन दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। क्या आप भी कॉम्पिटिटिव फीलिंग रखती हैं?

हां, मुझे लगता है कॉम्पिटिटिव फीलिंग होनी ही चाहिए। लेकिन यह आप पर डिपेंड करता है कि आप इसे किस तरह से लेते हैं। अगर मैं अपने बारे में कहूं तो जब भी किसी एक्ट्रेस को अच्छा काम करते देखती हूं तो उससे भी अच्छा किरदार करके दिखाऊंगी, यह ठान लेती हूं।

उस दिन से मैं एक अच्छी स्क्रिप्ट और अच्छे किरदार की खोज में लग जाती हूं। मेरे मुताबिक यह एक हेल्दी कॉम्पिटिशन है, जिससे हमारी ही ग्रोथ होती है। हां, अगर इस कॉम्पिटिशन को खुद पर हावी होने देंगे, तो सिवाय दिमाग खराब होने के कुछ हासिल नहीं होगा।

अपने अब तक के करियर को कैसे देखती हैं?

इंडस्ट्री में कोई रेड कारपेट बिछाकर यह नहीं कहता-‘आइए तापसी जी आपका स्वागत है।’ धक्का-मुक्की करके आगे आना पड़ता है। मुझे खुशी है कि आज मैंने जो भी मुकाम पाया है अपने दम पर पाया है। यह सब मेहनत और किस्मत दोनों का नतीजा है।

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