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पद्मावात विवादः सुप्रीम कोर्ट में ASG ने की गांधी और शराब की बात, कहा- गांधी को व्हिस्की पीते हुए नहीं दिखा सकते

सजय लीला भंसाली की मेगा बजट फिल्म पद्मावत पर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पद्मावत को कई राज्यो में बैन किए जाने पर आज सुप्रीम कोर्ट में जोरदार बहस हुई।

पद्मावात विवादः सुप्रीम कोर्ट में ASG ने की गांधी और शराब की बात, कहा- गांधी को व्हिस्की पीते हुए नहीं दिखा सकते

सजय लीला भंसाली की मेगा बजट फिल्म पद्मावत पर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आपको बता दें कि पद्मावत फिल्म का यह विवाद अब सड़कों से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। पद्मावत को कई राज्यो में बैन किए जाने पर आज सुप्रीम कोर्ट में जोरदार बहस हुई।

आपको बता दें कि सेंसर बोर्ड की ओर से इस फिल्म को पास किए जाने के बाद कुछ राज्यों ने फिल्म के प्रदर्शन पर बैन लगा दिया था। राज्यों के इस बैन के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की बेंच ने आसंवैधानिक करार दिया है।

पद्मावत पर लगा इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप-

पद्मावत पर लगे इतिहास के छेड़छाड़ के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में जमकर बहस हुई। राज्यों के पक्ष में दलील पेश कर रहे एएसजी तुषार मेहता ने फिल्म बैन को जायज ठहराया तो वहीं दूसरी तरफ जानेमाने वकील हरीश साल्वे ने पद्मावत के पक्ष में दलील दी।

गांधी और शराब का हुआ जिक्र-

राज्यों की तरफ से पेश हुए ASG तुषार मेहता ने कहा, इस फ़िल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। इस पर हरीश साल्वे ने फिल्म में दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर को कोर्ट के सामने पढ़कर सुनाया, जिसमें कहा गया है 'यह एक काल्पनिक कहानी पर आधारित है', इतिहास से इसका कोई लेना देना नहीं है।

साल्वे ने तो कोर्ट में यहां तक कहा एक दिन मैं चाहूंगा कि मैं इस बात पर दलील दूं कि कलाकारों को इतिहास से छेड़छाड़ का अधिकार भी होना चाहिए। इस पर तुषार मेहता ने कहा 'ऐसा नहीं हो सकता। आप महात्मा गांधी को विस्की पीते नहीं दिखा सकते। इस पर साल्वे ने कहा लेकिन यह इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होगी। हरीश साल्वे की इस बात पर कोर्ट में मौजूद सभी लोग हंस पड़े।

यह भी पढेंः पद्मावत विवाद: राज्यों के बैन के खिलाफ सु्प्रीम कोर्ट पहुंचे फिल्म निर्माता, 25 जनवरी को होगी रिलीज

आपको बता दें कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की बेंच ने फिल्म बैन को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि राज्यो का यह फैसला संविधान के आर्टिकल 21 के तहत लोगों को जीवन जीने की स्वतंत्रता का हनन है।

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