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Interview : आखिर किससे ''बदला'' लेनें की फिराक में हैं सुजॉय घोष, खुद किया खुलासा

थ्रिलर फिल्मों में माहिर सुजॉय घोष फिल्म ‘कहानी -2’ के बाद अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू स्टारर फिल्म ‘बदला’ लेकर आए हैं। क्या यह फिल्म बदले की भावना पर आधारित है?फिल्म से जुड़ी और भी कई अहम बातें सुजॉय घोष की जुबानी।

Interview : आखिर किससे

बतौर डायरेक्टर सुजॉय घोष की पहली फिल्म ‘झनकार’ थी, जो साल 2003 में आई थी। छोटे बजट की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सरप्राइज हिट साबित हुई। इसके बाद सुजॉय ने ‘होम डिलीवरी’ और ‘अल्लाहदीन’ फिल्में डायरेक्ट कीं। उनकी यह दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ठंडी रहीं। फिर साल 2012 में उनकी फिल्म ‘कहानी’ आई, जो सुपरहिट रही, उसके बाद साल 2016 में ‘कहानी’ की सीक्वल ‘कहानी-2’ आई। इस फिल्म को भी दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया। अब लगभग तीन साल बाद सुजॉय घोष ने फिल्म ‘बदला’ के साथ सिल्वर स्क्रीन पर वापसी की है। इस फिल्म से जुड़ी बातें विस्तार से बता रहे हैं सुजॉय घोष-

फिल्म ‘पिंक’ की सीक्वल नहीं है ‘बदला’

कुछ लोगों को ऐसा लगा रहा है कि फिल्म ‘बदला’, ‘पिंक’ की सीक्वल है। फिल्म ‘पिंक’ की तरह इस फिल्म में भी अमिताभ बच्चन जी का वकील और तापसी पन्नू का उनका क्लाइंट होना महज एक कोइंसिडेंस है। इसके साथ ही दोनों को इस फिल्म में ‘पिंक’ के किरदार को देखकर नहीं लिया गया है, बल्कि कहानी की डिमांड को ध्यान में रखकर लिया गया है।

स्पेनिश फिल्म की रीमेक है ‘बदला’

फिल्म ‘बदला’ स्पेनिश फिल्म की रीमेक है। मेरे पास बनी-बनाई कहानी के साथ यह फिल्म आई थी। ऐसे में डायरेक्टर होने के नाते मेरे लिए यह बहुत ही चैलेंजिंग था कि जहां पहले से ही कहानी और किरदार को इतने अच्छे से प्रेजेंट किया गया है, तो इसे मैं दोबारा अच्छे से कैसे पेश करूं यानी कि मेरा कॉन्ट्रिब्यूशन क्या होगा? सो बहुत विचार-विमर्श के बाद मैंने इसमें इंडियन ऑडियंस को ध्यान में रखते हुए कुछ चेंजेस किए।

बदले की कहानी बयां करती है फिल्म

इसमें कोई दो राय नहीं कि फिल्म ‘बदला’ एक थ्रिलर फिल्म है और रिवेंज यानी कि बदला लेने की भावना पर आधारित है। जैसा कि फिल्म की टैग लाइन है ‘हर बार माफ करना सही नहीं होता’ यही बात फिल्म में भी बताई गई है। हालांकि बदले की भावना पर इंडस्ट्री में कई फिल्में पहले भी बनी हैं, लेकिन यह उनसे अलग है, ऐसा इसलिए, क्योंकि इसमें बदला लेने का जो तरीका है, वो अलग और नया है। ठीक उसी तरह जिस तरह रोमांटिक फिल्में तो कई होती हैं लेकिन इमोशन को प्रेजेंट करने का तरीका सबका अलग-अलग होता है।

तापसी फिल्म की होल एंड सोल हैं

मेरी नजर में तापसी एक सुपर्ब एक्टर होने के साथ, एक बहुत ही स्ट्रॉन्ग और इंडिपेंडेंट वूमेन भी हैं। फिल्म में तापसी ने जो किरदार निभाया है, वो लेडी भी बहुत ही स्ट्रॉन्ग है, ऐसे में मेरी पहली पसंद क्या कहूं, बल्कि यह कहना ज्यादा सही होगा कि स्क्रिप्ट की डिमांड ही तापसी पन्नू थीं। उनके सिवाय यह किरदार और कोई भी इतनी खूबसूरती से नहीं कर पाता। उन्होंने स्ट्रॉन्गली एक स्ट्रॉन्ग वूमेन का रोल किया है। मैं तो इतना तक कह सकता हूं कि तापसी फिल्म की होल एंड सोल हैं।

अमित सर की एनर्जी माउंट एवरेस्ट से भी हाई है

अमित सर के काम को मैं कभी डिफाइन नहीं कर सकता। लेकिन उनकी तारीफ में यह जरूर कहूंगा कि इन टर्म्स ऑफ एनर्जी, अमित जी एक तरफ और पूरे क्रू मेंबर की एनर्जी एक तरफ होती थी। सर 24 घंटे लगातार काम करने को तैयार रहते थे और हम 18 घंटे बाद ही डाउन हो जाते थे। उनका एनर्जी लेवल तो माउंट एवरेस्ट से भी हाई है। वो सारी एनर्जी फिल्म के लिए लेकर आते हंक और फिल्म के सिवाय आगे-पीछे, ऊपर-नीचे कहीं से कोई मतलब नहीं रखते। उनकी एनर्जी क्रू मेंबर को भी मोटिवेट करती है।

चैलेंज फिल्म बनाने से पहले होता है बाद में नहीं

एक डायरेक्टर के नजरिए से कहूं तो मेरे लिए फिल्म बनाना चैलेंजिंग नहीं होता बल्कि फिल्म के पहले जो तैयारियां होती हैं, वो चैलेंजिंग होती हैं। खासकर एक्टर्स को फिल्म की कहानी इस ढंग से सुनाना कि उन्हें पसंद आए। फिर किरदार के बारे में बताना कि यह किरदार ऐसा क्यों है, ऐसा क्यों करता है? स्क्रिप्ट, कैरेक्टर को लेकर जितने भी सवाल एक्टर और प्रोड्यूसर के होते हैं, उन्हें पार करना या यह कहूं कि उसे परिभाषित करना बहुत मुश्किल और चैलेंजिंग होता है। एक बार ये सब हो गया तो फिल्म मेकिंग ईजी हो जाती है फिर फिल्म मेंकिंग में चैलेंजेस नहीं होते हैं।

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