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कई भेरुपियों को नकाबपोश करती है रजनीकांत की काला

फिल्म ''काला'' कल सिनेमाघरों में रिलीज की गई थी। दर्शकों द्वारा ''काला'' को खूब सराहा गया। कहानी रफ्तार तब पकड़ती है जब यह तय हो जाता है कि काला धारावी का किंग बन चुका है और कोई उससे टकराने का दम नहीं रखता।

कई भेरुपियों को नकाबपोश करती है रजनीकांत की काला

सुपरस्टार रजनीकांत का 'काला' के नाम से एक कैजुअल सा लेकिन प्यारा सा इंट्रोडक्शन दिया गया है, जिसका पूरा नाम कारीकालन है। कहानी रफ्तार तब पकड़ती है जब यह तय हो जाता है कि काला धारावी का किंग बन चुका है और कोई उससे टकराने का दम नहीं रखता।

ज़रीना (हुमा कुरैशी) और काला के बीच लव ट्रैक ठीक उसी अंदाज़ में पेश किया जाता है जैसा कि कबाली-कुमुदावली में दिखाया गया था, लेकिन जल्द ही रजनीकांत को अपनी इस बेवकूफी का एहसास हो जाता है और फिर एक्स-लवर्स के साथ खूबसूरत डिनर सीन में नज़र आते हैं जहां काला अपनी प्राथमिकताओं के बारे में स्पष्टीकरण दे रहा होता है।

यहां दोनों शानदार ऐक्टर का परफॉर्मेंस देखने लायक है। फिल्म 'काला' में तिरुनेलवेली का एक गैंगस्टर, जो कि बाद में धारावी का किंग बन जाता है और फिर वह ताकतवर नेताओं और भू माफिया से जमीन को सुरक्षित रखने की लड़ाई लड़ता है।

एनिमेटेउ स्टोरी से शुरूआत

काला की कहानी शुरू होती एक एनिमेटेड स्टोरी कहने वाली डिवाइस से, ठीक वैसा ही जैसा 'बाहुबली' में नज़र आया था। यहां जमीन की अहमियत के साथ-साथ ताकत के भूखों द्वारा गरीबों का दमन दिखाया गया है। फिल्म की कहानी तेजी से मौजूदा समय में आ पहुंच आती है। दुष्ट औैर भ्रष्ट नेता व भू माफिया हैं, जो धारावी को तबाह कर उसे डिजिटल धारावी और मेन मुंबई के रूप में तब्दील करना चाहते हैं।

इंटरवल से पहले मसाला स्टंट

इंटरवल से पहले का हिस्सा टिपिकल मसाला स्टंट सीक्वेंस से भरा है, जिसमें कि मुंबई फ्लाईओवर (जहां कुछ वीएफएक्स तकनीक का इस्तेमाल किया गया है) के सीन हैं। यह सीन आपको पुराने रजनीकांत की याद दिला देगा, जो उनके फैन्स के लिए एक बड़े ट्रीट की तरह है।

हरिदादा खूब जमे

धमाल मचना तो तब शुरू होता है जब दुष्ट हरि दादा (इस किरदार में खूब जमे हैं नाना पाटेकर यानी हरिनाथ देसाई) की सीन में एंट्री होती है। इंटरवल के बाद कहानी का बहुत कुछ अंदाज़ा आपको पहले ही लग जाता है, जिसमें हरी दादा बदला लेना चाहता है और वह काला से उसका प्यार छीन लेता है, लेकिन धीरे-धीरे रजनीकांत फिल्म में अपनी स्टाइल लेकर आते हैं।

वह इस बारे में बात करते हैं कि जब तक विरोध न करें तो कैसे तब तक गरीबों को दबाया जाता है। वह अपने लोगों से अपने शरीर को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की सलाह देता है।

वह अपने लोगों से हड़ताल पर जाकर मुंबई को ठप्प करने का आदेश देता है, क्योंकि झुग्गियों में रहने वाले ज्यादातर लोग शहर चला रहे, जिनमें टैक्सी ड्राइवर्स, म्युनिसिपैलिटी स्टाफ, हॉस्पिटल स्टाफ जैसे लोग शामिल हैं। ...और फिर मुंबई की रफ्तार अचानक खामोश हो जाती है। हरि दादा बदला लेना चाहता है।

नाना-रजनी का मुकाबला देखने लायक

फिल्म में नाना पाटेकर और रजनीकांत का मुकाबला देखने लायक है। दोनों के बीच के सीन बस पैसा वसूल लगेंगे, इतना ही समझिए। रजनी को हिन्दी और मराठी में सुनकर उनके फैन्स जरूर खुश होंगे।

ये हैं पूरी फिल्म के कलाकार

यहां जिक्र करना जरूरी है कि काला की पत्नी सेल्वी के रूप में ईश्वरी राव और काला के बेटे की गर्लफ्रेंड के रूप में पुयल यानी अंजली पाटील ने इतनी खूबसूरती से अपने किरदार को निभाया है कि उनसे आपको प्यार हो जाएगा।

थीम सॉन्ग पहले से ही फेमस हो चुका है, जिसमें रजनीकांत ने बतौर राइटर डायरेक्टर शानदार परफॉर्म दिया है। रजनीकांत की फिल्मों की बात करें तो इस फिल्म का क्लाइमैक्स बेहतरीन है। रजनीकांत के टेक्निकल क्रू (सिनेमटॉग्रफर मुरली, म्यूज़िक डायरेक्टर संतोष नारायण, एडिटर श्रीकर प्रसाद और आर्ट डायरेक्टर रामालिंगम) ने बेहतरीन काम किया है।

कहानी सिंपल

इस बार डायरेक्टर पा. रंजीत ने अपना मेसेज (भूमि आम आदमी का अधिकार है) दर्शकों तक पहुंचाने के लिए रजनीकांत के स्टारडम का इस्तेमाल किया है। कहानी सिंपल है, जिसमें तमिलनाडु से आया एक प्रवासी मुंबई की फेमस झुग्गी बस्ती धारावी में सेटल हो जाता है और फिर इसे बेहतर बनाने में लग जाता है।

इसके साथ ही वह अब शहर को भी चलाने का काम कर रहा है। तभी एक दुष्ट नेता जो कि एक भू माफिया भी है, उसकी नज़र उसके जमीन पर पड़ जाती है, जिसके लिए उनके बीच जंग शुरू हो जाती है। क्या भू माफिया इसमें सफल हो जाता है।

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