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सोन चिरैया मूवी रिव्यू : लम्बे अरसे बाद परदे पर उतरे डकैत

इस शुक्रवार परदे पर रिलीज़ हुई सोन चिरैया अपनी मेगास्टरकास्ट के लिए पहले से चर्चाओं में है।

सोन चिरैया मूवी रिव्यू : लम्बे अरसे बाद परदे पर उतरे डकैत

इस शुक्रवार परदे पर रिलीज़ हुई सोन चिरैया अपनी मेगास्टरकास्ट के लिए पहले से चर्चाओं में है। सुशांत सिंह राजपूत , भूमि पेंडेकर, मनोज बाजपेयी, आशुतोष राणा जैसे मंझे हुए कलाकारों से सजी सोन चिरैया चम्बल के बीहड़ों और डकैतों की दिल को छू लेने वाली कहानी है। फिल्म के जानदार डायलॉग और डायरेक्टर अभिषेक चौबे ने जिस अंदाज़ से फिल्म को बनाया है वो काबिल ए तारीफ है । फिल्म में इतना सब होने के बाद भी अगर कुछ इस फिल्म की सफलता के आड़े आ सकता है तो वो है फिल्म की धीमी गति और कहानी की परतों को सही ढंग से न खोल पाना । फिल्म का प्लॉट शानदार है लेकिन कहानी का तानाबाना ऐसे बुना गया है कि उसे समझने के लिए जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

फिल्म कि कहानी:

फिल्म कि कहानी 1975 के चम्बल पर केंद्रित है जब समाज जात पात और अमानवीय रीति रिवाजों में उलझा हुआ था। इस फिल्म में डकैतों का एक गैंग दिखाया गया है जिसके सरदार मनोज बाजपेयी हैं और इस गैंग का मुख्य दुश्मन वीरेंद्र गुज्जर ( आशुतोष राणा ) है, जो किसी भी नीचता की हद तक जाके मान सिंह के गिरोह को खत्म करना चाहता है। फिल्म डकैतों की पुलिस और सरकार के लिए नफरत के इर्द गिर्द घूमती है जिसमें समाज में अपनी वापसी की तड़प समझाने में डायरेक्टर अभिषेक चौबे कामयाब रहें हैं। सिर्फ अपने फायदे और निजी ईर्ष्या के खेल को दिखाती फिल्म सोन चिरैया एक अच्छी फिल्म है।

फिल्म में डकैतों कि कहानी में मोड़ तब आता है जब डकैतों के गिरोह में इंदुमती ( भूमि पेंडेकर ) की एंट्री होती है । इंदुमती के किरदार में भूमि पेंडेकर दमदार हैं। फिल्म में सुशांत सिंह ने डकैत लाखन का किरदार इस संजीदगी से निभाया है कि फिल्म देखते वक्त परदे पर लाखन से नजर नहीं हटती है । वकील सिंह (रणवीर शौरी) एक बेरहम डाकू के किरदार में इस कदर जमे है कि जब जब उनका किरदार परदे पर आता है उनसे डर लगता है । भूमि पेंडेकर और आशुतोष राणा की अदायगी शानदार है लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी हाईलाइट है पदमश्री मनोज बाजपेयी, मनोज बाजपेयी ने फिल्म में डकैतों के मुखिया मान सिंह का किरदार इस शानदार ढंग से निभाया है कि दर्शक तारीफ किये बिना नहीं रह पाएंगे । फिल्म की कहानी की गति धीमी है जिसे और क्रिस्प किया जा सकता था।

फिल्म के डायलॉग और संगीत :

फिल्म के कुछ डायलॉग 'अगर पुलिस का धर्म बागी को पकड़ना है तो बागी का क्या धर्म होना चाहिए' 'बैरी बेईमान बागी सावधान' और 'जात पात तो आदमियों के लिए है औरतों के लिए तो एक है जात है...नीच' ऐसे कई दमदार डायलॉग है जो थिएटर से बहार आकर भी याद रहते है। फिल्म की कोरियोग्राफी और सिनेमेटोग्राफी बेजोड़ है । चम्बल के सीन बहुत सजीव और रियल लगते हैं और कलाकारों पर किया गया डिटेल वर्क तारीफ के लायक है। विशाल भारद्वाज का बैकग्राउंड संगीत पावरफुल है जो सिचुएशन को और भी प्रभावी बनाता है।

बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म का मुकाबला 2 और फिल्मों 'लुका छुपी' और 'टोटल धमाल' से होगा। टोटल धमाल और लुका छुपी कॉमेडी बेस्ड फिल्में है और टोटल धमाल बॉक्स ऑफिस पर अपनी अच्छी पकड़ बनाये हुए है । देखना यह होगा की एक सीरियस विषय पर आधारित यह फिल्म दर्शकों को कितना पसंद आती है।

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