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बहुत मुश्किल होता है बच्चों को जज करना: सोनाली बेंद्रे

सोनाली बेंद्रे ‘इंडिया बेस्ट ड्रामेबाज 2’ को जज कर रही हैं।

बहुत मुश्किल होता है बच्चों को जज करना: सोनाली बेंद्रे
मुंबई. सोनाली बेंद्रे एक बेहतरीन एक्ट्रेस ही नहीं, प्रोग्रेसिव-कॉन्शस मां भी हैं, जो बच्चों की फीलिंग्स को अच्छी तरह समझती हैं। अपने अब तक के करियर में सोनाली बेंद्रे 50 से ज्यादा फिल्में कर चुकी हैं। लेकिन मैरिज के बाद वे बड़े पर्दे से दूर हो गर्इं और 2005 में मां बनने के बाद केवल 2013 में फिल्म ‘वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई’ में स्पेशल अपीयरेंस में ही नजर आई थीं। इसके बाद उसी साल ‘इंडिया बेस्ट ड्रामेबाज’ शो के सीजन वन में बतौर जज और फिर 2014 में सीरियल ‘अजीब दास्तान है ये’ से टीवी पर अपने कदम बढ़ाए। इन दिनों जीटीवी पर आ रहे रियालिटी शो ‘इंडिया बेस्ट ड्रामेबाज’ के सीजन 2 के कंटेस्टेंट्स को विवेक ओबेरॉय, साजिद खान के साथ जज कर रही हैं। इस शो और अपने जजिंग एक्सपीरियंस को शेयर कर रही हैं सोनाली बेंद्रे।
‘इंडिया बेस्ट ड्रामेबाज’ सीजन 2 में पार्टिसिपेट करने वाले कंटेस्टेंट्स के बारे में सोनाली बताती हैं, ‘इस बार शो में बच्चे खूब तैयारी के साथ आए हैं। ऑडिशन राउंड में तो हम किस बच्चे को रखें और किसे बाहर करें, इसको लेकर बड़ी परेशानी हो रही थी। इस बात को लेकर पूरी तरह अश्योर हूं कि इस बार शो में जबरदस्त टक्कर देखने को मिलेगी।’
हालांकि इससे पहले भी इस शो के सीजन वन में बच्चों को जज कर चुकी हैं। लेकिन बच्चों को जज करना कितना ईजी या टफ मानती हैं? इस सवाल पर वह सीरियस होकर कहती हैं, ‘बच्चों को जज करना कतई आसान नहीं है। बच्चे तो बच्चे होते हैं, उन्हें कैसे जज किया जा सकता है। शो में हम जज जरूर हैं लेकिन हम जजमेंटल नहीं होना चाहते हैं। मैं हमेशा ट्राई करती हूं कि बच्चों को पॉजिटिव वे में समझाया जाए। बच्चे के सामने पूरी जिंदगी होती है, इसलिए उनसे ऐसी कोई बात नहीं कही जा सकती जो उनको किसी तरह हर्ट करे।’
इस शो के दौरान बच्चों के साथ को वह खूब एंज्वॉय करती हैं। उनके साथ बिताने वाले पलों के एक्सपीरियंस को वह चहकते हुए शेयर करती हैं, ‘सच कहूं तो बच्चों के साथ रहकर मेरी सारी टेंशन और थकावट दूर हो जाती है। बच्चों के अंदाज इतने प्यारे लगते हैं कि मैं उनमें खो जाती हूं। समय का पता ही नहीं चलता।’
बच्चों की शरारतें और उनके नटखट अंदाज सोनाली को बहुत प्यारे लगते हैं। तो क्या उन्हें देखकर अपने बचपन की शरारतें भी याद आती हैं? इस पर सोनाली मुस्कुराते हुए कहती हैं, ‘इस शो में बच्चों की हरकतें देखकर मुझे अपने बचपन की तो कम लेकिन अपने 10 साल के बेटे रणवीर की खूब याद आती है। बच्चों के एक्ट देखकर अपने बेटे की शरारत भरी हरकतें याद आकर मुझे मन ही मन गुदगुदा जाती हैं।’
सोनाली का मानना है कि बच्चों पर किसी भी काम या परफॉर्म के लिए प्रेशर देना ठीक नहीं है। इस रियालिटी शो में भी वह बच्चों और उनके पैरेंट्स के प्रेशर को दूर करती नजर आ रही हैं। इस बारे में सोनाली का कहना है, ‘वही बच्चे प्रेशर लेते हैं या परेशान होते हैं, जिनके पैरेंट्स उन पर बेहतर करने का लगातार दबाव डालते हैं। इसलिए मैं पैरेंट्स को समझाया करती हूं कि बच्चों पर दबाव न बनाएं। उन्हें यहां मौज-मस्ती से काम करने दें। मैं फील कर रही हूं कि पिछली बार की तुलना में इस बार बच्चे और उनके पैरेंट्स ज्यादा रिलेक्स नजर आ रहे हैं और प्रेशर नहीं ले रहे हैं।’
ऐसे रियालिटी शो तो कई महीनों तक चलते हैं, ऐसे में बच्चों की स्कूली पढ़ाई भी प्रभावित होती है। ऐसे में पढ़ाई को मैनेज करना आसान नहीं है, यह बात सोनाली भी एक्सेप्ट करती हैं, ‘बच्चों की पढ़ाई का मुद्दा वाकई बहुत अहम है। इसलिए हमने बच्चों की पढ़ाई के लिए भी समय निर्धारित किया है। पैरेंट्स और हमारे मैंटर्स इस दिशा में बच्चों की मदद करते हैं।’
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, पूरा इंटरव्यू -

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