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तीज और स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में कृष्ण भक्तिरस में डूबी दिल्ली, ‘सीज़न्स विद् कृष्णा’ का हुआ आयोजन

इंडिया हैबीटेट सेंटर के स्टेन ऑडिटोरियम में सी.के.आर.डी.टी पाउंडेशन द्वारा संगीतमय संध्या सीज़न्स विद् कृष्णा का आयोजन किया गया। जहां पर शास्त्रीय गायिका विधि शर्मा ने अपने खूबसूरत प्रस्तुतिकरण से सभी को अपने रंग में भीगो दिया।

तीज और स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में कृष्ण भक्तिरस में डूबी दिल्ली, ‘सीज़न्स विद् कृष्णा’ का हुआ आयोजन

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2018; सावन का महीना, भजन का मोह। धीमे-धीमे ढलती शाम और रसभरा संगीत। कुछ ऐसा नज़ारा देखने को मिला राजधानी स्थित इंडिया हैबीटेट सेंटर के स्टेन ऑडिटोरियम में।मौका था सी.के.आर.डी.टी. फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत संगीतमय संध्या ‘सीज़न्स विद् कृष्णा’ का, जहां शास्त्रीय गायिका विधि शर्मा ने अपने खूबसूरत प्रस्तुतिकरण से सभी को भावविभोर कर दिया।

इस अवसर पर डॉ. हरिवंश चतुर्वेदी (निदेशक बिमटेक), अनुराधा प्रसाद (निदेशक, बी.ए.जी. नेटवर्क), सतीश उपाध्याय, आरती मेहरा, गायक शकील अहमद, बांसुरी वादक अजय प्रसन्ना आदि सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरूआत पारमपरिक दीप प्रज्जवलन के साथ हुई जिसके बाद विधि शर्मा एवम् साथी कलाकारों के साथ सम्पूर्ण वातावरण को कृष्णा भक्ति रस में डुबो दिया। विधी ने मीरा भजन, अष्टछाप के कुछ कवियों के पद् गाये जो छः ऋतुओं पर आधारित कृष्ण की लीलाओं एवम् भक्ति के विभिन्न रूप दर्शाती रचनायें थी। सीज़न्स विद् कृष्णा शीर्षक से आया उनका नया भजन ‘बंसी वाला आजो म्हारे देस’ भी प्रस्तुत किया। सावन के महीने को ध्यान में रखते हुए विधी ने तीज से सम्बंधित प्रस्तुति दी और स्वतंत्रता दिवस की श्रोताओं को शुभाकामनायें दी।

विधि ने बताया, सीज़न्स विद् कृष्णा गायन संगीत में पहली ही बार प्रस्तुत किया गया कॉन्सेप्ट है, जो कृष्णा को समर्पित है। राधा, गोपियों के प्रेमी, ग्वाल, भगवान और प्रचारक सहित न जाने कितने ही रूपों में जाने गये।

उन्होंने बताया कि कृष्णा लीला, लोक कथाओं को पुराणों में विभिन्न स्क्रिप्ट में लिखा गया एवम् गाया गया है। कृष्ण पर विद्यमान विशाल साहित्य को संगीत की विभिन्न शैलियों में प्रस्तुत किया जाता रहा है और मैने में एक नया प्रयास किया है। सीज़न्स विद् कृष्णा, कृष्ण के जीवन को छः ऋतुओं; ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, हेमंत ऋतु, शीत ऋतु व वसन्त ऋतु में संलग्न करते हुए प्रस्तुत करता है। छह ऋतुओं में भक्ति के विभिन्न रूप और विराहा, श्रृंगार, करुणा, शांत, अद्भुत आदि के नवरस प्रदर्शित होते हैं।

कार्यक्रम में भगवान के प्रति भक्त की भावनाओं को संबोधित किया गया जहां भक्ति के विभिन्न रूपों जैसे देशभक्ति, साध्य भक्ति इत्यादि को व्यक्त किया गया। विधि के प्रस्तुतिकरण में थुमरी और पारंपरिक लोक गायन भी शामिल रहा, जिनके माध्यम से कृष्णा लीला अलग अंदाज में प्रस्तुत हुई। बरसात और वसंत के मौसम में प्रस्तुत की जाने वाली मौसमी ठुमरी; झूला, काजरी, होरी आदि में दर्शाया गया कि किस तरह से कृष्ण अपने प्रिय लोगों और दोस्तों संग कैसे खेल रहे हैं, शरारतें कर रहे हैं भी दिल छूता था। कुल मिलाकर कार्यक्रम में कृष्ण के जीवन का जश्न मनाया गया, जहां सभी छः सत्रों से संबंधित कुछ रोचक दुर्लभ उपाख्यानों और लोककथाओं, विभिन्न प्रसिद्ध लीला, और प्रेम, लालसा, भक्ति, त्यौहार आदि की भावनाएं शामिल रहीं। जहां गायिका विधी शर्मा ने अपनी सारी महिमा के साथ रचना और प्रदर्शन किया था। ये मीरा, सूरदास, नंददास, कृष्णादास, परमानंददास आदि द्वारा कविताओं के रूप में प्रस्तुत किए गए थे।

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