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Siddhant Karnick Interview: सिद्धांत ने टीवी जगत में छेड़ा ''इनसिक्योरिटी'' का मुद्दा, साईं बाबा में लेंगे एंट्री

सिद्धांत कार्णिक चौदह साल से टीवी वर्ल्ड में एक्टिव हैं। वह अब तक अलग-अलग तरह के किरदार टीवी सीरियल्स में कर चुके हैं। ‘माही वे’, ‘ये है आशिकी’, ‘एक था राजा एक थी रानी’ में उनकी एक्टिंग को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

Siddhant Karnick Interview: सिद्धांत ने टीवी जगत में छेड़ा

सिद्धांत कार्णिक चौदह साल से टीवी वर्ल्ड में एक्टिव हैं। वह अब तक अलग-अलग तरह के किरदार टीवी सीरियल्स में कर चुके हैं। ‘माही वे’, ‘ये है आशिकी’, ‘गुस्ताख दिल’ और ‘एक था राजा एक थी रानी’ में उनकी एक्टिंग को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

टीवी के साथ वह फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग का हुनर दिखा चुके हैं। जल्द ही वह सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर सीरियल ‘मेरे साईं’ में एक रंगमंच कलाकार के रूप में नजर आएंगे। उनका एपिसोड साईं बाबा की समाधि के सौ साल पूरा होने पर प्रसारित होगा। हाल ही में उनसे फोन पर लंबी बातचीत हुई।

आप सीरियल ‘मेरे साईं’ से जुड़े हैं, सीरियल में एक रंगमंच कलाकार के किरदार में हैं। आपके किरदार के आने से सीरियल में क्या मोड़ आएंगे? अपने किरदार के बारे में विस्तार से बताएं।

सबसे पहले तो कहना चाहूंगा कि साईं बाबा की समाधि के सौ साल पूरे होने पर मेरा एपिसोड प्रसारित होगा, इस बात से मुझे काफी खुशी मिली है। जहां तक बात सीरियल में मेरे कैरेक्टर की एंट्री के बाद बदलाव या मोड़ आने की है तो इसके बारे में तो आपको सीरियल देखने के बाद ही पता चलेगा। मैं तो सीरियल में गणपत राव का किरदार निभा रहा हूं, जो एक रंगमंच कलाकार है। वह अभिनय और संगीत में बहुत-प्रतिभाशाली है, लेकिन उसे अपनी प्रतिभा पर बहुत घमंड है। साईं बाबा से मिलने पर उसे पता चलेगा कि इंसान को सफल होने के साथ-साथ विनम्र भी होना चाहिए।

असल जिंदगी में आप भी एक कलाकार हैं। इस सीरियल में आप ऐसे रंगमंच के कलाकार बने हैं, जो घमंडी है? आखिर प्रसिद्धि पाने के बाद कुछ लोग घमंड, अहंकारी क्यों हो जाते हैं?

हां, यह सच है कि कई लोग सफल होने के बाद घमंडी, अहंकारी हो जाते हैं खासकर कलाकार। मेरे मुताबिक इसकी दो वजहें हैं, एक तो वे अपनी कला में बहुत पारंगत हो जाते हैं, यह समझने लगते हैं कि मुझसे बेहतर कोई नहीं है।

दूसरा है इनसिक्योरिटी। हमारी फील्ड में इनसिक्योरिटी बहुत ज्यादा है। ऐसे में हमेशा यह जताना पड़ता है कि हां, मैं भी कुछ हूं। इससे भी कलाकार में अहंकार आ जाता है, वह घमंडी हो जाता है।

क्या असल जिंदगी में आपको कभी अपने कलाकार होने का घमंड, गुरूर हुआ है?

मैं टीवी कलाकार होने के साथ-साथ थिएटर एक्टर भी हूं। मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि मुझमें कभी घमंड या गुरूर न आए। वैसे मुझमें घमंड है या नहीं, इसके बारे में मुझे करीब से जानने वाले ही बेहतर बता सकते हैं।

आप इंडस्ट्री से हैं तो कुछ घमंडी कलाकारों के साथ भी काम करना पड़ा होगा, ऐसे में आप उनसे कैसे डील करते हैं?

सबसे पहली बात तो अगर पता चल जाए कि सामने वाला इस तरह रिएक्ट क्यों कर रहा है तो उसे अपने कंफर्ट जोन में लाया जा सकता है। उसे यह फील कराया जा सकता है कि उसे मुझसे घबराने की जरूरत नहीं है।

जैसे ही वह आपके साथ कंफर्ट जोन में आ जाता है, उसकी इनसिक्योरिटी चली जाती है। इससे उसके चेहरे पर चढ़ा नकली घमंड निकल सकता है। इसके बावजूद अगर कोई नहीं बदलता है तो बेहतर है उसे उसके हाल पर छोड़ दो। ईगो तो किसी के भी करियर को पूरी तरह चौपट कर सकता है, खराब कर सकता है।

सीरियल ‘मेरे साईं’ में साईं बाबा के जीवन को दिखाया जा रहा है। आपकी साईं बाबा में कितनी आस्था है?

सीरियल ‘मेरे साईं’ में आने के पहले तक मैं अलग था। लेकिन इस सीरियल से जुड़ने के बाद मैंने साईं बाबा को जाना है। जैसे-जैसे मैं सीरियल करता जा रहा हूं, वैसे-वैसे उनके प्रति मेरी श्रद्धा बढ़ती जा रही है।

संकट की घड़ी में क्या आप कभी भगवान को याद करते हैं?

मुझे लगता है कि सिर्फ संकट की घड़ी में भगवान को याद करना सही नहीं है। इसके बजाय मैं यह मानता हूं कि भगवान का एक रूप तो मां-बाप हैं तो फिर हम उनके पास क्यों नहीं जाते हैं। मैं पर्सनली यह फील करता हूं कि संकट हो या कोई परेशानी हो, हमें भगवान को याद करने के बजाय अपने माता-पिता, भाई, बहन, पति या पत्नी के पास जाना चाहिए।

आगे किन प्रोजेक्ट्स में आप नजर आएंगे?

एक वेब सीरीज की है, इसकी कुछ शूटिंग बाकी है। इसके अलावा मैं एक यू-ट्यूब चैनल भी लॉन्च करने वाला हूं।

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