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Shashank Vyas Interview: ''रूप'' के सेट पर इस कारण इमोशनल हो गए शशांक

शशांक व्यास ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत सीरियल ‘बालिका वधु’ से की थी। लेकिन अब शशांक सिरियर रूप- मर्द का एक स्वरूप में अभिनय कर रहे हैं।

Shashank Vyas Interview:

शशांक व्यास ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत सीरियल ‘बालिका वधु’ से की थी। इसमें उनका जगदीश का कैरेक्टर दर्शकों के बीच खूब पॉपुलर हुआ। इस सीरियल में बाल-विवाह के खिलाफ मैसेज दिया गया था।

इसके बाद शशांक व्यास ने एक सीरियल ‘जाना न दिल से दूर’ किया। अब वह कलर्स चैनल के सीरियल ‘रूप-मर्द का नया स्वरूप’ में लीड रोल निभा रहे हैं। यह सीरियल लड़का-लड़की को लेकर समाज की बनी-बनाई धारणाओं को तोड़ने की बात करता है, भेद-भाव को मिटाने की बात कहता है।

आपके सीरियल का नाम ‘रूप-मर्द का नया स्वरूप’ है। आखिर आप मर्द के किस नए स्वरूप की बात कर रहे हैं?

अब तक टीवी सीरियल में महिलाएं ही अपने हक की, अपने अधिकारों की बात करती थीं। लेकिन हमारे सीरियल में यह काम मेरा कैरेक्टर रूप करता है। लेकिन वह इस काम को बहुत ही अलग तरीके से करता है।

रूप किसी से लड़ता-झगड़ता नहीं है। वह अपनी बात को सबके सामने बहुत ही तर्क के साथ रखता है। सीरियल में रूप के पिता की सोच बहुत ही पुरानी और रूढ़िवादी है, लेकिन उन्हें भी वह प्यार से बदलने की कोशिश करता है।

आप सीरियल के किरदार से खुद को कितना रिलेट कर पाते हैं?

मैं नब्बे प्रतिशत सीरियल के किरदार से रिलेट करता हूं। रूप के रोल को निभाने के लिए मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। बस मुझे सीन और सिचुएशन को समझना पड़ता है, इसके बाद मेरा रिएक्शन वैसा ही होता है, जैसा रियल लाइफ में होना चाहिए।

क्या आप महसूस करते हैं कि आज पुरुषों की सोच में बदलाव आया है? क्या वह महिलाओं को बराबर मानते हैं?

हां, बदलाव आया है। यह बदलाव शिक्षा की वजह से आया है। अब पुरुष इस बात को समझते हैं कि महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए। घर में पिता, भाई और पति, महिलाओं को सपोर्ट करते हैं।

हम अपने आस-पास कई ऐसे उदाहरण देखते हैं। लेकिन अभी भी महिलाओं के प्रति सोच में बहुत बदलाव आना बाकी है, सबसे पहले महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने की जरूरत है। इसमें भी महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों को भी सहयोग करना होगा।

लेकिन समाज में आज भी लड़का-लड़की को लेकर भेद-भाव है, इसे कैसे दूर किया जा सकता है? क्या आपने अपने स्तर पर इस भेद-भाव को दूर करने की कोशिश की है?

भेद-भाव दूर करने के लिए एजुकेशन पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। मैं एक्टर हूं तो अपने सीरियल के जरिए इस दिशा में योगदान दे रहा हूं। मैंने सीरियल ‘रूप-मर्द का नया स्वरूप’ को इसलिए ही चुना क्योंकि मैं एंटरटेनमेंट के साथ-साथ सोशल मैसेज भी दर्शकों को देना चाहता था।

मेरा मानना है कि हर किसी को अपनी-अपनी फील्ड में रहकर लड़का-लड़की के बीच बरकरार भेदभाव को दूर करना चाहिए।

घर-परिवार और समाज में लड़कों को शुरुआत से ही इमोशंस कंट्रोल करने होते हैं, ऐसा ही आपके सीरियल में भी दिखाया जाता है। लेकिन रूप इमोशन को जाहिर करता है, क्या आप अपने इमोशन को एक्सप्रेस करते हैं?

हां, मैं भी अपने इमोशन को जाहिर करता हूं। मैं जैसा हूं, जो फील करता हूं, वैसे ही एक्सप्रेस करता हूं। मुझे रोना आता है तो मैं रोता हूं, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

कभी-कभी मैं शूटिंग में अपने सींस करने के दौरान भी इमोशनल हो जाता हूं। यह सब नेचुरल है। जो इंसान अपने इमोशन एक्सप्रेस करता है, वह साफ दिल का होता है।

आप अपने डेब्यू सीरियल से ही हिट हो गए थे, आज अपने करियर को किस तरह देखते हैं?

टीवी पर मेरे करियर को आठ साल हो गए हैं। अब तक मैंने तीन ही सीरियल किए हैं। तीनों सीरियलों के काम पर मुझे प्राउड फील होता है। मैंने पहले सीरियल में पांच साल काम किया था।

मेरा दूसरा सीरियल एक साल ही चला। मैंने हमेशा अपना काम ईमानदारी से किया है, तभी लोगों ने मेरा काम पसंद किया। इस तरह अभी तक की जर्नी कमाल की रही।

आगे क्या फिल्में भी करेंगे?

मैं प्लानिंग करके नहीं चलता हूं। ऐसा करने से लाइफ बोरिंग हो जाती है। अच्छा ऑफर आने पर ही फिल्में करूंगा।

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