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Sayantani Ghosh Interview: टीवी की ''कुंती'' ने खोले कई राज

सायंतनी घोष हिंदी टीवी सीरियल्स में लगभग सोलह साल से काम कर रही हैं। वह कई पॉपुलर टीवी सीरियल्स में लीड, पैरलल लीड कैरेक्टर निभा चुकी हैं।

Sayantani Ghosh Interview: टीवी की

सायंतनी घोष हिंदी टीवी सीरियल्स में लगभग सोलह साल से काम कर रही हैं। वह कई पॉपुलर टीवी सीरियल्स में लीड, पैरलल लीड कैरेक्टर निभा चुकी हैं।

सायंतनी को सबसे ज्यादा ‘कुमकुम-एक प्यारा सा बंधन’, ‘घर एक सपना’, ‘नागिन’, ‘इतना करो न मुझसे प्यार’ और ‘नामकरण’ जैसे सीरियलों में पसंद किया गया।

इसके अलावा वह ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ और ‘बिग बॉस-8’ जैसे शो का हिस्सा भी बनीं। इन दिनों वह स्टार प्लस के नए माइथोलॉजिकल-फिक्शन सीरियल ‘करण संगिनी’ में कुंती की भूमिका निभा रही हैं।

सीरियल ‘करण संगिनी’ में अपने किरदार के बारे में बताएं?

‘करण-संगिनी’ सीरियल का बैकड्रॉप महाभारत का है, लेकिन इसका ज्यादातर हिस्सा फिक्शन है। ‘करण संगिनी’ का कॉन्सेप्ट पूरी तरह से नया है। मैं इस सीरियल में कुंती का किरदार निभा रही हूं।

कुंती सीरियल के बाकी चार अहम किरदारों अर्जुन, करण, द्रौपदी और उर्वी के बीच एक सेंट्रल कैरेक्टर है। करण और अर्जुन दोनों ही उसके बेटे हैं। समाज के सामने उसने करण को अपना बेटा स्वीकार नहीं किया है।

लेकिन सालों बाद जब वह, कुंती के सामने आ जाता है तब वह उसे स्वीकार करने की इच्छा रखती है। दूसरी तरफ कुंती चाहती है कि उर्वी उसके बेटे अर्जुन की बहू बनकर आए। जबकि उर्वी करण से प्रेम करती है।

एक महाभारत काल की कुंती थी, जो सामाजिक डर की वजह से अपने बेटे करण को नदी में बहा कर आ गई और आज भी कई युवतियां हैं, जो अपनी अनचाही संतान को छोड़ देती हैं। समाज में महिलाओं की स्थिति आज भी वही है। आप क्या सोचती हैं, इस बारे में?

मुझे लगता है कि सच में आज भी महिलाओं में इतनी हिम्मत नहीं आई है और सभी में इतनी हिम्मत होती भी नहीं है। खासतौर पर जो ज्यादा शिक्षित नहीं हैं, उन्हें अभी भी लगता है कि हम पर लांछन लग जाएगा।

दूसरी बड़ी बात यह भी है कि इस कदम को उठाने के लिए परिवार का सपोर्ट होना भी बहुत जरूरी है। हां, यह सच है कि हम पहले से बहुत आगे बढ़े हैं। लेकिन आज भी हम सच को स्वीकारने से डरते हैं।

कुंती के किरदार में ऐसी क्या बात आपको खास लगी, जो आपने इस किरदार को स्वीकार किया?

मैं पिछले ‘महाभारत’ (2013) का भी हिस्सा थी। तब मैंने सत्यवती की भूमिका निभाई थी। लेकिन कुंती बहुत ही कॉम्पलेक्स कैरेक्टर है। मैंने मेकर्स से पूछा भी कि क्या आपको लगता है कि मैं यह किरदार कर पाऊंगी तो उन्होंने कहा कि हां आप कर पाएंगी। धीरे-धीरे मैं कुंती को समझ रही हूं।

आजकल ऐतिहासिक और पौराणिक सीरियलों का ट्रेंड बहुत ज्यादा हो रहा है। इसकी आपको क्या वजह लगती है?

हम लोगों ने बचपन में अपनी दादी-दादाजी से राजकुमार-राजकुमारी और राजा-रानी की कहानियां ही ज्यादा सुनी हैं या ऐसी कहानियां ज्यादा सुनी हैं, जो फैंटेसी वाली होती थीं।

हम इस तरह की कहानियों को बचपन से सुनते आ रहे हैं, इसलिए यह हमें पसंद आती हैं। दूसरी बात आजकल घरों में इन सब्जेक्ट पर बातें नहीं होती हैं, इसलिए मुझे लगता है कि ऐसे सीरियल लोगों को बहुत अट्रैक्ट करते हैं।

अब तक आपने जो काम किया है, आपकी नजर में उसमें आपका बेस्ट वर्क कौन-सा रहा?

सब रहे हैं। मैंने एक्टिंग करनी कहीं से नहीं सीखी। मैंने जो सीखा अपने काम के दौरान सीखा। हां, यह हो सकता है कि किसी सीरियल ने मुझे फाइनेंशियली खूब मजबूत किया तो कुछ किरदार करके मैंने अपनी पहचान बढ़ाई।

कुछ रोल्स से इंडस्ट्री वालों को यह लगा होगा कि यह अच्छी एक्ट्रेस है। इस तरह कह सकती हूं कि आज इतने साल बाद मैं जहां पर हूं, सभी सीरियल्स को मिलाकर ही हूं।

कई बार फाइनेंसियल प्रेशर भी एक्टर्स से काम कराता है। क्या आपने कभी इस प्रेशर को महसूस किया है?

हां बिल्कुल। एक स्ट्रगल होता है, जब हम न्यूकमर होते हैं। आप बहुत कोशिश कर रहे हैं और आपको काम नहीं मिल रहा है। लेकिन स्टैबिलिश होने के बाद दूसरी तरह का स्ट्रगल होता है, तब एक एक्टर के पास काम की कमी नहीं होती लेकिन एक कलाकार के तौर पर हर तरह के किरदार नहीं एक्सेप्ट किए जा सकते हैं।

साथ ही साइनिंग अमाउंट से भी समझौता नहीं किया जा सकता है। मैंने पिछले आठ-नौ महीने काम नहीं किया था, इसकी वजह यही सब थीं। जो रोल मुझे मिल रहे थे, उनसे मैं खुश नहीं थी। लेकिन मैं उन एक्ट्रेसेस में से भी नहीं हूं कि मां के रोल नहीं करूंगी। रोल दमदार हो तो उसकी उम्र बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती है।

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