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सार्थक दास का 17 साल का वनवास खत्म, ''नेटफ्लिक्स'' पर देखिए अब अपना ''म्यूजिक टीजर''

सार्थक दासगुप्ता की पैदाइश और परवरिश मुंबई में हुई। बचपन से ही कला क्षेत्र की तरफ झुकाव रहा। वह हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक में ट्रेंड हैं।

सार्थक दास का 17 साल का वनवास खत्म,

सार्थक दासगुप्ता की पैदाइश और परवरिश मुंबई में हुई। बचपन से ही कला क्षेत्र की तरफ झुकाव रहा। वह हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक में ट्रेंड हैं। सार्थक, म्यूजिक के साथ-साथ स्टडी पर भी फोकस रहे, उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अलावा एमबीए किया।

डेढ़ साल तक सेबी में नौकरी की। लेकिन वहां काम में मन नहीं लगा। सार्थक सेबी की नौकरी छोड़कर जीटीवी में सुभाषचंद्र गोयल के साथ काम करने लगे। इसके बाद वह फिल्म की कहानियां लिखने लगे।उन्होंने लघु फिल्म ‘ऋणानुबंध’ बनाई।

फिर ‘ईजी चेयर’ और ‘देहदंड’ नाम की दो फिल्में निर्माता, लेखक और निर्देशक के रूप में बनाईं। फिर उन्होंने 2003 में फिल्म ‘द ग्रेट इंडियन बटरफ्लाई’ का लेखन और निर्देशन किया। अब सार्थक दासगुप्ता की दूसरी फिल्म ‘म्यूजिक टीचर’ रिलीज होगी। इस फिल्म से जुड़ी बातचीत डिटेल में बता रहे हैं, डायरेक्टर सार्थक दासगुप्ता।

सत्रह साल पहले लिखी थी कहानी

मैंने 2001 में ‘म्यूजिक टीचर’ की कहानी लिखी थी, जिसे मैं बांग्ला भाषा में इरफान खान के साथ बनाना चाहता था। लेकिन इस फिल्म को बनाने के लिए प्रोड्यूसर नहीं मिल पाए, तो फिल्म बन नहीं पाई।

उसके बाद मैं टीवी पर सीरियल लिखने में बिजी हो गया। कई पॉपुलर टीवी सीरियल लिखे। सागर आर्ट्स के सीरियल ‘हैलो डॉली’ को निर्देशित भी किया था। इस बीच पैसा भी आ गया था और सीरियल लिखते-लिखते बोर हो गया था।

मैंने यह काम छोड़ दिया। अच्छी बात यह हुई कि ‘म्यूजिक टीचर’ की कहानी को अमेरिका के विश्व प्रसिद्ध ‘सन डांस फिल्म फेस्टिवल’ और इंस्टीट्यूट की तरफ से स्क्रिप्ट लैब के लिए चुना गया।

इसके लिए मुझे अमेरिका में दस हजार डॉलर की राशि का सन डांस ग्लोबल अवार्ड भी मिला। अफसोस इस स्क्रिप्ट लैब में जितने लोग चुने गए थे, उनमें से किसी पर भी फिल्म नहीं बन पाई।

मैंने ‘म्यूजिक टीचर’ पर 2013 में फिर फिल्म बनाने की कोशिश शुरू की। अब यह 2018 में नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही है। फिल्म ‘म्यूजिक टीचर’ में अभिनय करने के लिए नवाजुद्दीन तैयार हो गए।

उन्होंने मेरी फिल्म में अभिनय करने के लिए डेढ़ साल इंतजार भी किया। लेकिन बाद में स्थिति नवाज को फिल्म में लेने की नहीं बनी। पैसे की तंगी आने पर मैंने कुछ दिन ‘सावधान इंडिया’ के कुछ एपीसोड भी निर्देशित किए, पर किसी को बताया नहीं।

वहीं पर मेरी मुलाकात दिव्या दत्ता से हुई, जिन्होंने ‘म्यूजिक टीचर’ में अहम किरदार निभाया। बाद में फिल्म से अमता बख्शी और मानव कौल जुड़े। इस फिल्म को यूडली फिल्म ने प्रोड्यूस किया है। हमारी फिल्म को कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सराहा जा चुका है।

इमोशन से भरी स्टोरी

फिल्म की कहानी हिमाचल प्रदेश में शिमला के पास छोटे कस्बे की है। जहां एक शख्स (मानव) संगीत से जुड़ा हुआ है और उसकी तमन्ना मुंबई जाकर बहुत बड़ा गायक बनने की है। उसके घर में उसकी मां और छोटी बहन है।

घर की समस्याओं के चलते मानव मुंबई जा नहीं पा रहा था। वह वहीं आस-पास के लोगों को म्यूजिक की ट्यूशन देकर पैसे कमा रहा था। एक बंगाली परिवार की लड़की को भी उसने संगीत सिखाना शुरू किया।

उस लड़की की अपनी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है, लेकिन वह अच्छा गाती है। मानव उसके अंदर महत्वाकांक्षाओं को जगाते हुए कई म्यूजिक कॉम्पिटिशन में भेजता है, वह हर बार जीतकर आ जाती।

इस बीच वह लड़की मानव से प्यार भी करने लगती है। जबकि मानव पसोपेश में है। फिर एक दिन उसे मुंबई में एक फिल्म में गाने के लिए बुलावा आ जाता है। लड़की की मां उसे मानव से दूर करने के लिए मुंबई जाने के लिए कहती है।

लेकिन लड़की को जाना नहीं है। मानव उसके कदमों में रोक नहीं लगाना चाहता। अचानक लड़की और म्यूजिक टीचर के बीच कुछ ऐसा होता है कि लड़की गुस्से में मुंबई चली जाती है। मुंबई में वह बहुत बड़ी गायिका बन जाने के आठ साल बाद शिमला आती है।

म्यूजिक टीचर उससे न मिलने का फैसला कर उसी दिन अपनी बहन की शादी रख देता है। लेकिन अंत में दिल मानता नहीं, वह मजबूर होकर उससे मिलने जाता है, फिर बहुत कुछ होता है।

फिल्म का मैसेज

यह फिल्म स्लाइस ऑफ लाइफ है। हमारी फिल्म इस तरफ इशारा करती है कि कितने लोग रिग्रेट में जीते हैं। हमारी यह फिल्म इंसान की अपनी स्थितियों का चित्रण करती है।

इंसान किस तरह से मेहनत करता है और फिर भी उसे सफलता नहीं मिलती है। इसके अलावा वह किस तरह से कंफ्यूजन में जीता है। फिल्म में गुस्सा, नफरत, प्यार सारे इमोशंस हैं।

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