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तब मैंने सोचा- मैं भी तो किसी की मां बनूंगी: संध्या मृदुल

संध्या मृदुल एक्टिंग को अपना पैशन मानती हैं।

तब मैंने सोचा- मैं भी तो किसी की मां बनूंगी: संध्या मृदुल
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मुंबई. संध्या मृदुल ने टीवी पर कम लेकिन अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। लंबे गैप के बाद इन दिनों वह स्टार प्लस के सीरियल ‘पी.ओ.डब्ल्यू.-बंदी युद्ध के’ में नाजनीन के रोल में नजर आ रही हैं। अपने रोल्स को लेकर चूजी संध्या ने क्या सोचकर इस सीरियल में काम करना एक्सेप्ट किया? टीवी के बदलते सिनेरियो पर उनकी क्या राय है? इस सीरियल और उनके किरदार से जुड़ी बातचीत संध्या मृदुल से...
सबसे पहले तो शो ‘पी.ओ.डब्ल्यू.- बंदी युद्ध के’ में अपने किरदार के बारे में बताइए?
नाजनीन एक सशक्त महिला का किरदार है, जिसने अपने पति स्क्वाड्रन लीडर इमान खान की गैर-मौजूदगी में अपने दोनों बच्चों को पाला है। वह 17 सालों से अपने लापता फौजी पति का इंतजार कर रही है। पति आएंगे भी या नहीं वह इस कशमकश में जी रही है। यह एक सिंगल मदर का किरदार है। इसकी कहानी दमदार है और मेरा रोल चैलेंजिंग है, इसलिए बहुत अच्छा लग रहा है। निखिल आडवाणी जैसे मैच्योर डायरेक्टर हैं तो और क्या चाहिए।
इस चैलेंजिंग रोल को निभाने के लिए आपने किस प्रकार खुद को तैयार किया?
सबसे पहले तो इस रोल के लिए यह फीलिंग अंदर से आनी चाहिए कि एक औरत जिसका पति युद्ध भूमि से लापता है, उसकी मनोदशा क्या होगी? उन कठिनाइयों को जानना-समझना, जो ऐसा परिवार झेल रहा है, उनके घर के हालातों को महसूस करना मेरे लिए बहुत ही कठिन रहा। लेकिन निखिल ने इसे समझने में मेरी बहुत हेल्प की। मैंने खुद भी, जिन लोगों को अपनी जिंदगी में खोया है, जब उनके बारे में सोचा तो थोड़ा उस दर्द को भी महसूस किया। यह एक मां का किरदार है, जिसके दो बच्चे हैं। वह मां अपने हर इमोशन बाहर नहीं निकाल सकती। उसे अपने बच्चों के लिए कई बार अपनी भावनाओं को कंट्रोल में रखना होता है ताकि बच्चों को हिम्मत दे सके और उसका दु:ख दर्शकों को भी महसूस हो। कुल मिलाकर मेरे लिए यह रोल बहुत ज्यादा चैलेंजिंग है।
मां की भूमिका आप पहली बार निभा रही हैं। इसके लिए क्या खास तैयारी करनी पड़ी?
असल जिंदगी में तो मैं अभी मदर नहीं बनी हूं, इसलिए मुझे यह एक बड़ा चैलेंज लगा कि कैसे एक मां के भावों को पेश करूं? एक ऐसी महिला, जिसका फौजी पति लापता है, वह दो बच्चों की मां है, उसकी जिंदगी में क्या चल रहा होगा, वह क्या सोचती होगी? इसलिए जब मैंं नाजनीन के किरदार को समझने की कोशिश कर रही थी तब मैंने सोचा कि मैं कैसी मां बनूंगी? एक ऐसी मां, जो मां से ज्यादा अपने बच्चों की दोस्त हो। दूसरी बात यह कि ये बच्चे छोटे नहीं हैं। उनके साथ तो समझदारी भरा रिश्ता बनाना होगा। इसमें मुझे निखिल ने बहुत गाइड किया।
टीवी पर आप काफी गैप के बाद दिखाई दे रही हैं, इसके पीछे क्या वजह रही?
मैं गैप प्लान नहीं करती, बस मेरी सीधी-सी मांग होती है कि रोल अच्छा होगा तो ही मैं करूंगी। एक्टिंग मेरे लिए नौकरी नहीं है, करियर भी नहीं है। मैंने एक्टिंग को बचपन से अब तक हॉबी ही समझा है। एक्टिंग मेरा पैशन हैै।
टीवी का आज का जो दौर है, उसे आप किस नजरिए से देखती हैं? ऐसे में जबकि आप बहुत गैप के बाद टीवी पर वापस लौटी हैं?
इन दिनों जो टीवी हम देख रहे हैं, वह सच में बहुत बदल चुका है। क्या आप सोच सकती थीं कि कभी टीवी पर ‘पी.ओ.डब्ल्यू.-बंदी युद्ध के’ जैसे सीरियल भी बन सकते हैं? खुशी की बात यह है कि अब ऐसे सीरियल बन रहे हैं। मैंने खुद ‘सास बहू’ टाइप शो किया, रियालिटी शो भी किया और अब ‘पी.ओ.डब्ल्यू.’ भी कर रही हूं। अब मुझे लगता है कि टीवी एक बैलेंस जगह पर है, जहां हर टाइप के शोज बन रहे हैं। हर टाइप का अपना दर्शक वर्ग है।
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