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रणवीर कपूर को लेकर दिया मिर्जा ने किया बड़ा खुलासा, बताया सेट पर क्या-क्या करते थे

अपने करियर की शुरुआत दीया मिर्जा ने मॉडलिंग से की थी। लेकिन इसके बाद दिया को फिल्मोें के ऑफर आने लगे। दिया करीब 6 साल बाद बड़े पर्दे पर लौट रही हैं।

रणवीर कपूर को लेकर दिया मिर्जा ने किया बड़ा खुलासा, बताया सेट पर क्या-क्या करते थे

अपने करियर की शुरुआत दीया मिर्जा ने मॉडलिंग से की थी। जब वह मिस इंडिया एशिया पैसिफिक बनीं तो उनके पास अपने आप ही फिल्मों के ऑफर आने लगे। उनकी डेब्यू फिल्म थी ‘रहना है तेरे दिल में’। इसके बाद उनकी ‘तुमको ना भूल पाएंगे, ‘दम’, ‘तुमसा नहीं देखा’, ‘क्यों हो गया ना’, ‘परिणीता’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ फिल्में आईं।

दीया ने बतौर प्रोड्यूसर ‘लव ब्रेकअप जिंदगी’ और ‘बॉबी जासूस’ फिल्मों को प्रोड्यूस भी किया। साल 2011 में फिल्म ‘लव ब्रेकअप जिंदगी’ में नैना का किरदार निभाने के लगभग छह साल बाद वह फिल्म ‘संजू’ से रुपहले पर्दे पर लौटी हैं। इस फिल्म में उन्होंने मान्यता दत्त की भूमिका निभाई है। पेश है, दीया दीया मिर्जा से हुई बातचीत के चुनिंदा अंश।

तकरीबन पूरे छह साल के बाद सिल्वर स्क्रीन पर वापसी के लिए आपने फिल्म ‘संजू’ ही क्यों चुनी?

मैं सही मौके के इंतजार में थी। कोई भी किरदार निभाकर मैं अपने फैंस को निराश नहीं करना चाहती थी। मैं ऐसा किरदार करना चाहती थी, जिससे लोग मुझे याद रखें। कमबैक के लिए जो मैं चाहती थी, वो सारी चीजें इस फिल्म में थीं। मैं मानती हूं, छह साल के इंतजार में मेरा ही नुकसान हुआ है। लोग सोचने लगे थे कि मैंने एक्टिंग छोड़ दी है, खासकर लोग तब ऐसा सोचने लगे, जब मैंने फिल्में प्रोड्यूस करना शुरू किया। उस वक्त कई लोग पूछते, ‘आपने एक्टिंग छोड़ दी?’ मैं बड़े आश्यर्च से जवाब देती, ‘जी नहीं।’ इतना ही नहीं, एयरपोर्ट की लेडीज सिक्योरिटी गार्ड, वहां मौजूद मेरे फैंस और मेरे घर में काम करने वाले भी मुझसे कहते कि मैडम आपने फिल्म करना छोड़ दिया क्या, ऐसे सवाल मेरे लिए सुनना और सहना बहुत मुश्किल था। लेकिन मैं लोगों को इसका जवाब कोई अच्छी फिल्म करके देना चाहती थी।

मान्यता दत्त का किरदार निभाते वक्त सबसे बड़ा चैलेंज क्या था?

यही कि मान्यता दत्त अलग-अलग सिचुएशन में क्या फील करती थीं, उसे महसूस करना और फिर उसी फीलिंग और इमोशंस को अपनी एक्टिंग में लाना था। दरअसल, किसी भी किरदार को निभाने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि वो इंसान ऐसी परिस्थिति में क्या सोच रहा होगा और कैसे रिएक्ट करेगा। जब आप यह बात समझ जाते हैं तो किरदार को निभाना बहुत ही आसान हो जाता है। इसके साथ ही मेरे लिए यह जानना भी मुश्किल रहा कि मान्यता दत्त और संजू सर के बीच किस तरह की रिलेशनशिप है, उनके बातचीत का तौर-तरीका कैसा है ताकि उसी बॉन्डिंग को मैं अपनी एक्टिंग में ला सकूं। सच कहूं तो फिल्म में मैंने मान्यता के सारे इमोशंस को बड़ी ईमानदारी से निभाए हैं।

ऐसी कौन-सी बात है, जिसे आपने संजय दत्त के साथ काम करने से पहले नहीं, बल्कि उनकी बायोपिक करने के बाद जाना?

दरअसल, हम कई सालों से संजू सर के बारे में पढ़ते और सुनते आ रहे हैं। जब हम किसी इंसान के बारे में लंबे समय से पढ़ते-सुनते आते हैं तो उसी के अनुसार उस इंसान को देखने का नजरिया रखते हैं। यही लगता है कि हम उसके बारे में सब कुछ जानते हैं। लेकिन जब मैंने ‘संजू’ की स्क्रिप्ट सुनी तो मेरा भ्रम टूट गया। मुझे अहसास हुआ कि संजू सर के बारे में मैं कुछ नहीं जानती हूं। मैं यह बात पूरे यकीन के साथ कह सकती हूं कि फिल्म देखने के बाद दर्शकों को भी ऐसा जरूर लगेगा। संजू सर ने एक जिंदगी में कई जिंदगी जी हैं। मुझे लगता है कि उनके ऊपर एक बायोपिक क्या, उनकी हर एक जिंदगी पर दस फिल्में बन सकती हैं। मैं मानती हूं, संघर्ष हम सबकी जिंदगी में होता है, लेकिन जितना संघर्षपूर्ण जीवन उनका रहा है, उतना शायद ही किसी का हो।

इस फिल्म में रणबीर कपूर के साथ काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा, उनके बारे में आपकी क्या राय है?

रणबीर कपूर एक फाइनेस्ट एक्टर हैं। उनके साथ काम करके बहुत अच्छा लगा। उनके बारे में मैं बस यही कहना चाहूंगी कि अपने पूरे करियर में मैंने जिन भी लोगों के साथ काम किया है, वो काम के मामले में उन सबसे लाजवाब हैं। उन्हें रोज सेट पर सबसे पहले आना पड़ता था और अकसर सबसे आखिर तक रुकना भी पड़ता था, लेकिन मैंने उन्हें हमेशा कूल देखा। संजय सर का लुक पाने के लिए उन्हें बहुत ज्यादा मेकअप की जरूरत थी। उस मेकअप को लगाए वो घंटों बैठे रहते थे, लेकिन मैंने कभी उन्हें इसकी वजह से इरिटेट होते नहीं देखा। किसी भी सिचुएशन में मैंने उन्हें अपना आपा खोते नहीं देखा, यह अपने आप में एक बड़ी बात है।

डायरेक्टर राजकुमार हिरानी के साथ आपने 2006 में फिल्म ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ की थी, तब से अब तक उनमें कितना बदलाव देखने को मिला?

कुछ भी नहीं, राजू जी जैसे पहले थे, आज भी बिल्कुल वैसे ही हैं। ग्राउंडेड, डिसेंट, ऑनेस्ट, सिंपल जैसे शब्द डिफाइन करने के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं। उनकी ये क्लॉलिटीज उनके काम में, उनकी फिल्मों में भी झलकती है, शायद इसलिए उनकी फिल्म सुपरहिट साबित होती हैं। अकसर सफलता मिलने के बाद इंसान बदल जाता है, लेकिन राजू जी में मैंने कोई बदलाव नहीं देखा है। वो मेरे बहुत अच्छे दोस्तों में से एक हैं। हमारे बीच अमेजिंग बाउंड है। उनके साथ काम करने का मतलब है कि आप एक कंफर्ट जोन में काम कर रहे हैं। उनके साथ मुझे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती।

इंडस्ट्री में आप अपने सफर को किस तरह देखती हैं?

मैंने बतौर एक्ट्रेस अट्ठारह साल की उम्र से काम करना शुरू किया था। पचीस की होते-होते मैंने पैंतालिस फिल्में कर लीं। अट्ठारह साल कोई उम्र नहीं होती है, काम करने की, क्योंकि चार-पांच साल तो आपको सिर्फ इंडस्ट्री को समझने में लग जाते हैं, फिल्मों को समझने की तो बात ही अलग है। शायद मैं चार साल और रुक जाती और फिर इंडस्ट्री में आती तो मैं थोड़ा-बहुत पहले से सीख और समझकर आती। एक एक्टर का बिना किसी तैयारी के इंडस्ट्री में आना गलत है। जहां तक मेरे करियर की बात है, मेरा करियर ग्राफ रोलर कोस्टर की तरह रहा है, मैंने अपने करियर में अप्स एंड डाउन, ऑफ एंड ऑन्स बहुत देखे हैं। बिना किस सपोर्ट सिस्टम के इंडस्ट्री में आना और यहां अपनी जगह बनाना मेरे लिए बहुत मुश्किल रहा है।

इतने सालों में आपके अनुसार इंडस्ट्री कितनी बदली है?

इंडस्ट्री में काफी बदलाव आए हैं और यह अच्छी बात है कि ये बदलाव एक्ट्रेसेस के फेवर में आए हैं। आज बॉलीवुड में वूमेनसेंट्रिक फिल्में बन रही हैं, एक्ट्रेसेस को ध्यान में रखकर उन पर फिल्में लिखी जा रही हैं। एक्ट्रेसेस आज शादी के बाद भी काम कर रही हैं, मां बनने के बाद भी वो एक्टिव हैं। इतना ही नहीं, अब कई यंग एक्ट्रेसेस फिल्में प्रोड्यूस भी कर रही हैं, ये अपने आप में ही बड़ी बातें हैं। वरना पहले तो हमें स्क्रिप्ट भी नहीं सुनने को मिलती थी, बस कह दिया जाता था कि आपकी फिल्म सलमान खान के साथ है, फिल्म में आपके चार गाने हैं, (हंसते हुए) फिल्म हिट होगी, कर लो। लेकिन आज ऐसा नहीं है।

दीया मिर्जा से यह पूछने पर कि आप कब तक फिल्मों में काम करना चाहेंगी, उनका जवाब था, ‘मेरे हिसाब से आप तब तक एक्टर हैं, जब तक आप चाहें। यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है कि आप पचास की उम्र तक काम करें या फिर नब्बे साल तक। आजकल तो आपकी उम्र के हिसाब से भी रोल लिखे और ऑफर किए जाते हैं, ऐसे में आप जब तक चाहें काम कर सकते हैं। मुझे जब भी अच्छा मौका और किरदार मिलेगा, मैं भी इंडस्ट्री में काम करती रहूंगी।’

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