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Exclusive: टीवी के ''सलीम-अनारकली'' ने अपनी लव-लाइफ का किया जिक्र, दर्शकों से की ये अनूठी पहल

सोनारिका भदौरिया और शहीर शेख टीवी जगत के पॉपुलर एक्टर्स हैं। पहली बार ये दोनों साथ में सीरियल ‘दास्तान-ए-मोहब्बत : सलीम-अनारकली’ में नजर आ रहे हैं। सीरियल में सोनारिका, अनारकली और शहीर, शहजादे सलीम के किरदार में हैं।

Exclusive: टीवी के

सोनारिका भदौरिया ने टीवी पर अब तक चुनिंदा सीरियल ही किए हैं, इनमें भी उनके ऐतिहासिक और पौराणिक सीरियल ज्यादा पसंद किए गए। सीरियल ‘देवों के देव-महादेव’ में पार्वती की भूमिका और ‘पृथ्वी वल्लभ’ में मृणाल के किरदार में सोनारिका को खूब पॉपुलैरिटी मिली।

अब वह कलर्स चैनल के सीरियल ‘दास्तान-ए-मोहब्बत : सलीम-अनारकली’ में अनारकली का किरदार निभा रही हैं। अनारकली का किरदार निभाकर वह काफी खुश हैं। इस सीरियल और अपने किरदार से जुड़ी बातें साझा कर रही हैं सोनारिका भदौरिया।

इस तरह बनी अनारकली:

अनारकली का किरदार निभाना चांद पर चढ़ने जैसी बात है। यह किरदार तो किसी भी कलाकार के लिए सपने के सच होने जैसा है, मेरे लिए भी। जहां तक अनारकली के किरदार को निभाने के लिए तैयारी की बात है तो इसके लिए भी मैंने खूब तैयारी की है।

मैंने सबसे पहले कथक सीखा, क्योंकि अनारकली एक कनीज थी, जो नाचने-गाने का काम करती थी। सीरियल में मुझे कई बार क्लासिकल डांस करना होगा। इसके अलावा अनारकली के रोल के लिए जरूरी था कि मेरी उर्दू भाषा पर पकड़ अच्छी हो, इसके लिए मेरी मां ने बहुत मदद की।

मेरी मां लखनऊ से हैं और बहुत अच्छी उर्दू जानती हैं। उन्होंने उर्दू बोलने में खूब मदद की। मेरा एक बचपन का दोस्त है, अरबाज। उससे भी मैं उर्दू में बात करती थी, जिससे मेरी प्रैक्टिस हो जाती थी।

इसके अलावा सीरियल में मेरे को-एक्टर शहीर, जो सलीम बने हैं, उनके साथ भी उर्दू बोलने की प्रैक्टिस करती थी। सीरियल में मेरा लुक भी बहुत अच्छा है। मुझे अपना अनारकली का लुक बहुत ही खूबसूरत लग रहा है। उम्मीद है कि दर्शकों को भी मेरी एक्टिंग और लुक पसंद आएगा।

मुगल-ए-आजम से कंपैरिजन ठीक नहीं:

सलीम-अनारकली की कहानी एक अमर प्रेम कहानी है। इसे हम फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में देख चुके हैं। मैं भी इस फिल्म की, अनारकली के रोल में मधुबाला जी की बहुत बड़ी फैन हूं।

मेरी दादी जी भी इस फिल्म और मधुबाला जी की फैन हैं, जो भी घर में आता है वह सबको बताती हैं कि सोनारिका अनारकली का किरदार निभा रही है। ऐसे में कुछ लोगों को लग रहा है कि हमारा सीरियल ‘मुगल-ए-आजम’ से इंस्पायर है। लेकिन ऐसा नहीं है।

हम ‘दास्तान-ए-मोहब्बत : सलीम-अनारकली’ बना रहे हैं। हमारे सीरियल में तो सलीम और अनारकली बचपन में ही मिल जाएंगे। जबकि फिल्म में ऐसा नहीं था। दर्शक सीरियल देखेंगे तो फर्क अपने आप महसूस करेंगे। जहां तक मधुबाला जी से कंपैरिजन वाली बात है तो मैं खुद को उनके पैरों की धूल के बराबर भी नहीं समझती।

मेरे लिए मोहब्बत के मायनेः

सलीम-अनारकली की मोहब्बत अमर है, इसी दास्तान को हम सीरियल में दिखाएंगे। जहां तक असल जिंदगी में इस तरह के प्यार की बात है तो मैंने ऐसा प्यार देखा है। मेरे मम्मी-पापा 26 साल से साथ हैं।

रिश्ते को लेकर उनके बीच जो डिवोशन है, वह मुझे बहुत अच्छा लगता है। उनमें मनमुटाव भी होते हैं, लेकिन उनका एक-दूसरे लिए के प्यार, अपनापन और डिवोशन कम नहीं होता है।

जबकि आज की जनरेशन ऐसी नहीं है। यंग जनरेशन के तो रिश्ते टिकते ही नहीं हैं। शायद आज की जनरेशन बहुत प्रैक्टिकल हो गई है। लेकिन मेरी नजर में तो प्यार एक ऐसा इमोशन है, जो हमारी जिंदगी में बहुत जरूरी है, इसके बिना सबकुछ अधूरा है।

शहीर शेख

शहीर शेख सीरियल ‘महाभारत (2013)’ में अर्जुन की भूमिका निभाकर चर्चा में आए थे। फिर ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ सीरियल में उनका निभाया देव दीक्षित का किरदार दर्शकों को खूब भाया।

अबशहीर शेख को सीरियल ‘दास्तान-ए-मोहब्बत : सलीम अनारकली’ में शहजादे सलीम का किरदार निभाने का मौका मिला है। वह हमेशा से ही सलीम के किरदार को निभाने की ख्वाहिश रखते थे, ऐसे में जब उन्हें सलीम का रोल ऑफर हुआ तो वह तुरंत ही तैयार हो गए। सीरियल ‘दास्तान-ए-मोहब्बत : सलीम अनारकली’ में शहजादे सलीम बनने के यादगार अनुभव को बता रहे हैं, शहीर शेख।

शहजादा सलीम बनकर खुश हूं:

दर्शकों को सलीम और अनारकली की कहानी और उनके प्यार के बारे में काफी कुछ पता है। लेकिन हमारे सीरियल ‘दास्तान-ए-मोहब्बत : सलीम अनारकली’ के जरिए दर्शक सलीम और अनारकली को ज्यादा करीब से जान सकेंगे।

मुझे भी यह कहानी बहुत पसंद है। एक वक्त था, जब मैंने सोचा था कि काश! मुझे सलीम का किरदार करने को मिले। मैं लकी रहा कि एक प्रोडक्शन हाउस सच में सलीम और अनारकली पर सीरियल बना रहा था और वो मेरे टच में आया और आज मैं सलीम का किरदार कर रहा हूं।

जब उन्होंने मुझे अप्रोच किया तो मेरे लिए मना करने जैसी कोई बात ही नहीं थी, क्योंकि मैं तो हमेशा से ही इस किरदार को करने ही चाह रखता था। मैं शहजादा सलीम बनकर बहुत खुश हूं।

सलीम के किरदार की तैयारी:

जब मेरे पास यह ऑफर आया तो मैंने तय किया कि अब मैं फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ नहीं देखूंगा। मैंने कोशिश की है कि इस किरदार को जितना हो सकता है, उतना फ्रेश दिखाऊं।

लोगों के दिमाग में सलीम के किरदार का मतलब दिलीप कुमार साहब हैं। बेशक, मैं भी जब कभी सलीम के बारे में सोचता था तो मेरे दिमाग में भी सबसे पहले दिलीप कुमार साहब ही आते हैं।

लेकिन एक कलाकार होने के नाते मेरी यही कोशिश रहेगी कि सलीम के किरदार को जितना हो सके रियल बना सकूं। हमारा सीरियल सलीम के इंसानी पहलू को सामने लेकर आएगा।

वह जब मां की गोद में सिर रखता है तो उसे कैसा महसूस होता है। जब वह अनारकली से मोहब्बत करता है तो क्या महसूस करता है, इन बातों को हम ज्यादा गहराई से दिखाएंगे।

प्यार एक अनोखा अहसास है: सीरियल ‘दास्तान-ए-मोहब्बतः

सलीम अनारकली’ का जो सबसे खास अहसास है, वह प्यार ही है। प्यार से हर कोई खुद को आसानी से जोड़ पाता है। इसके लिए हमें अलग से कुछ करने की जरूरत ही नहीं है।

हां, हम बस आज की युवा पीढ़ी को सच्चे और असल प्यार के मायने बता रहे हैं। इस सीरियल को इतनी खूबसूरती से बनाया जा रहा है कि युवा भी इस कहानी को बहुत करीब से महसूस करेंगे।

जहां तक मेरा सवाल है तो मेरे लिए प्यार एक अनोखा अहसास है। प्यार वहां भी हो जाता है, जहां हम सोच भी नहीं सकते हैं। जैसे किसी दूसरे देश की भाषा तक हम नहीं जानते, लेकिन वहां भी किसी से प्यार हो जाता है।

ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि प्यार शब्दों की नहीं, अहसासों की भाषा को समझता है। मैं अगर किसी को प्यार करता हूं तो उसके माथे पर एक शिकन तक नहीं देख सकता।

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