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मैं हर तरह का किरदार निभाना चाहता हूं: सानंद वर्मा

सानंद वर्मा पहली बार साइलेंट कॉमेडी करते हुए नजर आएंगे।

मैं हर तरह का किरदार निभाना चाहता हूं: सानंद वर्मा
मुंबई. सानंद वर्मा अब तक कई फीचर फिल्में, विज्ञापन और टीवी सीरियल कर चुके हैं। लेकिन सीरियल ‘भाबीजी घर पर हैं’ में अनोखे लाल सक्सेना के कॉमिक कैरेक्टर ने उन्हें भरपूर पॉपुलैरिटी दिलाई। अब हाल ही में सब टीवी पर शुरू हुए साइलेंट कॉमेडी सीरियल ‘गुपचुप’ में वह बहुत अलग तरह के कैरेक्टर में नजर आ रहे हैं। बातचीत सानंद वर्मा से।
आपने क्या सोचकर यह साइलेंट कॉमेडी सीरियल एक्सेप्ट किया?
मैंने इस सीरियल की नॉवेल्टी और अनोखेपन की वजह से इसमें काम करना स्वीकार किया। इंडिया में साइलेंट कॉमेडी का कॉन्सेप्ट अपने आप में बिल्कुल नया है। राइटर-डायरेक्टर प्रवाल बरुआ और सब टीवी के बिजनेस हेड अनुज कपूर ने ‘गुटर-गंू’ के बाद इसे नए लेवल पर क्रिएट किया है।
सीरियल का स्टोरी कॉन्सेप्ट क्या है?
बेसिकली इसकी कहानी खुद को बेस्ट समझने और साबित करने की है। दो पड़ोसी हैं और दोनों ही एक ही तरह के प्रोफेशन में हैं। कोहली फैमिली की बेकरी शॉप है और सेठी फैमिली की मिठाई की दुकान है। दोनों की शॉप आस-पास है। ऐसे में दोनों के बीच अपना काम बढ़ाने की खूब होड़ मची रहती है। ऐसी ही सिचुएशन में मजेदार कॉमेडी क्रिएट होती है।
सीरियल में आप विवेक कोहली के अपने कैरेक्टर से खुद को किस तरह रिलेट करते हैं?
मैं विवेक कोहली को खुद से बिल्कुल भी रिलेट नहीं करता हूं। मैं बहुत ही एनर्जेटिक आदमी हूं, जबकि मेरा कैरेक्टर विवेक कोहली बहुत ढीला-ढाला और सुस्त है, जो बिल्कुल काम ही नहीं करना चाहता है। इसके अलावा वो अपनी पत्नी के इशारों पर नाचता है।
आपके लिए साइलेंट कॉमेडी करना कितना चैलेंजिंग है?
साइलेंट कॉमेडी करना बहुत चैलेंजिंग होता है। एक्चुअली, कॉमेडी में 90 फीसदी योगदान डायलॉग्स का होता है, जबकि 10 फीसदी फिजिकल या अन्य पहलुओं का होता है। कॉमिक पंच डिलिवर करने के लिए डायलॉग्स जरूरी हैं। लेकिन साइलेंट कॉमेडी में हमें बिना डायलॉग्स के फिजिकल लेवल पर जबर्दस्त काम करना पड़ रहा है। कैरेक्टर्स के बीच में फिजिकल केमिस्ट्री बैठाना आसान नहीं होता है। कह सकता हूं कि साइलेंट कॉमेडी मेरे करियर का सबसे टफ पार्ट है।
अपने कैरेक्टर को निभाने के लिए आपने किस तरह से तैयारी की? क्या चार्ली चैपलिन से भी इंस्पिरेशन ली आपने?
मैं चार्ली चैपलिन का बहुत बड़ा फैन हूं। हर कॉमेडियन उनसे इंस्पायर होता है, मैं भी हूं। लेकिन अपने इस कैरेक्टर के लिए मेरे जेहन में चार्ली चैपलिन या दूसरा एक्टर नहीं था। इस कैरेक्टर को तैयार करने में सिर्फ यह कैरेक्टर ही था, जिसका नाम विवेक कोहली है। वह बहुत सुस्त है, उसकी आंखें बंद रहती हैं, उसका चेहरा भी सोने की मुद्रा में झुका रहता है। यही वजह है कि वो हमेशा किसी न किसी चीज से टकराता रहता है और चोटिल होता रहता है।
मौजूदा समय में आप साइलेंट कॉमेडी के लिए कितना स्कोप देखते हैं?
इंडिया में तो इसका स्कोप बहुत ज्यादा है। इंडिया के लिए यह बिल्कुल नया जॉनर है। इसकी वजह है कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें डायलॉग्स की जरूरत ही न पड़े। पुराने जमाने में तकनीक न होने की वजह से हमारी फिल्में मूक होती थीं। लेकिन हमारा यह सीरियल डिजाइन वाइज साइलेंट है। फिजिकल मूवमेंट और एक्सपे्रशन पर खास जोर दिया गया है।
क्या आप कॉमेडी रोल्स में ही संतुष्ट हैं या इसके दायरे से बाहर भी कुछ करना चाहते हैं?
मैं कॉमेडी जॉनर के बाहर भी बहुत कुछ करना चाहता हूं। मेरा मानना है कि जो सच्चा एक्टर होता है, वो किसी जॉनर में बंधकर नहीं रहना चाहता है। मैं हर तरह का किरदार करना चाहता हूं और मैंने किया भी है। मैंने चार साल पहले सीरियल ‘अदालत’ किया था। उसमें मैंने बहुत सीरियस रोल किया था। लोग उसे देखकर खूब रोए थे। इसलिए मैं हर तरह के किरदार निभाना चाहूंगा।
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