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ऑस्कर के लिए नॉमित फिल्म ''विलेज रॉकस्टार'' की डायरेक्टर रीमा दास ने बताई फिल्म बनाने के पीछे की वजह

अगर हौसला और हुनर हो तो नामुमकिन मुकाम को भी हासिल किया जा सकता है। रीमा दास इस बात की मिसाल हैं। उनकी फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ असम की एक बोली कमरूपी में बनी है।

ऑस्कर के लिए नॉमित फिल्म
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अगर हौसला और हुनर हो तो नामुमकिन मुकाम को भी हासिल किया जा सकता है। रीमा दास इस बात की मिसाल हैं। उनकी फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ असम की एक बोली कमरूपी में बनी है।

इस फिल्म को इसी साल बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवार्ड भी मिला है। इसके अलावा इस फिल्म में एक्टिंग करने वाली बाल कलाकार भनिता दास को सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

रीमा दास को सर्वश्रेष्ठ फिल्म संपादन का भी पुरस्कार मिला। रीमा ही इस फिल्म की कैमरामैन भी हैं। फिल्म की कहानी उन्होंने ही लिखी है। साथ ही जया दास के साथ मिलकर इस फिल्म का निर्माण भी किया है।

यह फिल्म टोरंटो फिल्म फेस्टिवल के अलावा अस्सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स का हिस्सा बन चुकी है। इस फिल्म को 44 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। पेश है, डायरेक्टर रीमा दास से बातचीत।

ऑस्कर अवार्ड के लिए भारतीय प्रविष्टि के रूप में ‘विलेज रॉकस्टार’ का चुना जाना, आपके लिए क्या मायने रखता है?

मेरे पास कहने को शब्द नहीं हैं। मेरे लिए सुनहरी राहें खुली हैं। फिल्म के निर्माण से लेकर ऑस्कर के लिए चुने जाने तक की एक लंबी यात्रा, किसी परी कथा सी लग रही है। यह पहली पूर्वोत्तर भारत की फिल्म है, जिसका चयन किया गया है। हमारे लिए सम्मान की बात है।

ऑस्कर में आपकी फिल्म का मुकाबला इंटरनेशनल लेवल और बड़े स्टूडियोज की फिल्मों से होगा, क्या तैयारी है?

मैं एक इंडिपेंडेंट और छोटी फिल्मकार हूं। ऑस्कर में हमारा मुकाबला बड़े-बड़े स्टूडियो की फिल्मों से है। लेकिन मेरे अंदर डर नहीं है। हमें उम्मीद है कि हम ऑस्कर ले आएंगे। लेकिन वहां फिल्म को प्रमोट करना एक खर्चीला काम है।

लेकिन मेरे पास पैसे नहीं हैं। असम सरकार ने पचास लाख रुपए देने की बात कही है। इसके अलावा जब से फिल्म को ऑस्कर में भेजने की घोषणा हुई है, तब से तमाम लोग आर्थिक मदद करने का प्रस्ताव भेज रहे हैं।

मैं अभी कुछ दिन इंतजार करने वाली हूं कि शायद सरकार की तरफ से रकम बढ़ा दी जाए। उसके बाद जिन लोगों ने पैसे देने का प्रस्ताव दिया है, उनसे मदद लूंगी। अब लोग ‘विलेज रॉकस्टार’ को अपनी फिल्म मान रहे हैं।

फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ की प्रेरणा कहां से मिली?

अपनी पहली फिल्म ‘अंतर्दृष्टि’ के रिलीज के बाद मुझे लगा कि अब मुझे कुछ ऐसा करना चाहिए, जो पूरे विश्व के लोगों के साथ जुड़ सके। मैं यह सोच रही थी, तभी अपने गांव पहुंची।

तब मुझे अहसास हुआ कि मुंबई में हम बहुत ही ज्यादा मैटेरियलिस्टिक और बनावटी जिंदगी जीते हैं। उस बार मैं 15 दिन असम में रही। तब मुझे गांव के बच्चों को देखकर अहसास हुआ कि जिंदगी क्या है और खुशियां क्या हैं?

जीवन में छोटी-छोटी खुशियां ही हमें आनंद देती हैं। हमारे गांव में बच्चे प्रकृति के बीच खेलते हैं, पेड़ों पर चढ़ते और झूलते हैं। नदी तालाब में नहाते हैं। मैंने पाया कि हमारे गांव के बच्चे गरीब हैं।

लेकिन वे प्रकृति के साथ घुल-मिलकर सबसे ज्यादा खुशियां पा रहे हैं। एक दिन मैंने कुछ बच्चों को नकली वाद्ययंत्रों के साथ संगीत का कार्यक्रम करते देखा। उसी से मुझे अपनी फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ की कहानी की इंस्प्रेशन मिली।

इस फिल्म की कहानी क्या है?

फिल्म में असम के छायगांव के एक गरीब परिवार की दस साल की बेटी धुनू (भनिता दास) के रॉकस्टार बनने की कहानी है। वह अपना म्यूजिक बैंड बनाने का सपना देखती है।

धुनू छायगांव में अपनी विधवा मां (बसंती दास) और बड़े भाई मनवेंद्र (मनवेंद्र दास) के साथ रहती है। एक दिन वह कुछ बच्चों को नकली चीजों से बने म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट से रॉक बैंड बनाकर म्यूजिक प्रोग्राम पेश करते देखती है।

तब वह सोचती है कि मैं भी अपना रॉक बैंड बनाऊंगी। फिर वह प्लाइवुड का गिटार बनाकर सिंगिंग शुरू करती है। आखिरकार वह किस तरह तमाम प्राकृतिक आपदाओं और अन्य मुश्किलों का सामना कर अपने मकसद में कामयाब होती है।

इस गांव में कहा जाता है कि पेड़ पर चढ़ने के काम सिर्फ लड़के कर सकते हैं, लड़कियां नहीं। लेकिन धुनू पेड़ पर चढ़ती है, नदी तलाब में नहाती है। वह एक ऐसी लड़की है, जो सब कुछ करती है।

वह यह सब लड़कों से बराबरी करने के लिए नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर खुशी पाने के लिए करती है। जिन पेड़ों पर गांव के लड़के नहीं चढ़ पाते थे, उन पेड़ों पर भी धुनू चढ़ जाती है।

फिल्म लोगों को क्या सीख देती है?

फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ उम्मीदों की बात करती है। इसके अलावा फिल्म के लीड कैरेक्टर धुनू की जो जर्नी है, वह लोगों को इस बात का अहसास दिलाती है कि आप जो सपने देखेंगे, उसे पूरा करने के लिए पूरी कायनात आपके साथ होगी। आपको सिर्फ कोशिश करने की जरूरत है।

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