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Rasika Dugal Interview: कोई ऐसा किरदार, जिसे निभाने की दिली तमन्ना हो? जानिए जवाब

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘मंटो’ में सआदत हसन मंटो की पत्नी साफिया का किरदार रसिका दुग्गल ने निभाया है। फिल्म में उनके किरदार के लिए रसिका की तारीफ हो रही है।

Rasika Dugal Interview: कोई ऐसा किरदार, जिसे निभाने की दिली तमन्ना हो? जानिए जवाब

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘मंटो’ में सआदत हसन मंटो की पत्नी साफिया का किरदार रसिका दुग्गल ने निभाया है। फिल्म के रिलीज होने के बाद शबाना आजमी से लेकर तमाम फिल्मी हस्तियों ने रसिका दुग्गल के अभिनय की तारीफ की।

इससे पहले वह ‘नो स्मोकिंग’, ‘किस्सा’ और ‘तू है मेरा संडे’ जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। लेकिन ‘मंटो’ ने उनके करियर को नया मोड़ दिया है।

ग्यारह साल के करियर में आपने चुनिंदा फिल्में ही कीं। इसकी क्या वजह रही?

मैं अपने आपको खुशकिस्मत मानती हूं कि पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट की ट्रेनिंग पूरी करते ही मुझे पहली फिल्म ‘अनवर’ और ‘नो स्मोकिंग’ मिल गई। उसके बाद मैंने बहुत सोच-समझकर धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाए।

मैंने जो भी फिल्में कीं, उन सभी फिल्मों की चर्चा हुई। मेरे अभिनय की चर्चा हुई। लेकिन पिछले दो सालों से तो मैं बहुत ज्यादा काम कर रही हूं। अब एक दिन की भी मुझे फुर्सत नहीं मिली। मेरे लिए फिल्म ‘मंटो’ का मिलना नई राह के खुलने के जैसा रहा।

फिल्म ‘मंटो’ मिलने के बाद मैंने तीन और फिल्में कीं। चौथी फिल्म की शूटिंग भी कर रही हूं। इसके अलावा तीन वेब सीरीज की हैं। पिछले दो सालों में मेरे करियर में बहुत बड़ा बदलाव आया है।

पिछले दो सालों से जो आपकी व्यस्तता बढ़ी है, उसकी वजह सिनेमा में आया बदलाव है या अचानक लोगों को आपके टैलेंट की पहचान हो गई?

ईमानदारी से कहूं तो दोनों बातें हैं। पहला काम यह हुआ कि सिनेमा में बदलाव आया। दूसरा ‘किस्सा’ और ‘तू है मेरा संडे’ जैसी कुछ फिल्मों से मेरे अभिनय की ज्यादा चर्चा हुई तो लोगों को लगा कि इस एक्ट्रेस के साथ काम किया जाना चाहिए।

इसके बाद ‘मंटो’ की इंटरनेशनल लेवल पर चर्चा के साथ ही लोगों ने मेरे बारे में भी जाना। अब सिनेमा ज्यादा और अलग तरह का बन रहा है। वेब सीरीज बन रही हैं, शॉर्ट फिल्में बन रही हैं। मुझे लग रहा है कि मेरे करियर का यह सुनहरा समय चल रहा है।

आपने फिल्म ‘मंटो’ क्या सोचकर स्वीकार की थी?

इस फिल्म को करने की तीन वजहें रहीं। पहली वजह मंटो, दूसरी वजह नवाजुद्दीन सिद्दीकी और तीसरी वजह नंदिता दास। मेरे हिसाब से यह ड्रीम कॉम्बिनेशन है। नंदिता दास ऐसी डायरेक्टर हैं, जिनकी संजीदगी की मैं कायल हूं।

मैंने नवाजुद्दीन का काम भी देखा हुआ था। वह ऐसे कलाकार हैं, जो कमर्शियल फिल्म में भी बहुत बेहतर काम करते हैं और लीक से हटकर फिल्मों में भी। उनके काम को लेकर मेरे मन में हमेशा इज्जत रही है। ‘मंटो’ ऐसी फिल्म है, जिसका हिस्सा होने पर मुझे प्राउड फील होता है। इस फिल्म ने कलाकार के तौर पर मुझे काफी इंस्पायर किया।

फिल्म में एक्टिंग करने से पहले आप लेखक सआदत हसन मंटो को कितना जानती थीं?

मैंने दिल्ली में रहते हुए सआदत हसन मंटो को खूब पढ़ा था। जब मैं पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग ले रही थी, उस वक्त मैं उर्दू लिखना और पढ़ना सीख रही थी। तब भी मैं मंटो की कहानियां पढ़ती थी।

जब मैं ट्रेनिंग पूरी करके मुंबई वापस आई, तब भी हिंदी और उर्दू लैंग्वेज की मैंने ट्रेनिंग जारी रखी और उस वक्त भी मंटो की कहानी पढ़ती थी। मैंने सबसे पहले उनकी कहानी ‘बू’ पढ़ी। यह बहुत छोटी कहानी है। इसके अलावा भी मैंने कई बड़े लेखकों को पढ़ा।

‘मंटो’ की रिलीज के बाद फिल्म इंडस्ट्री से किस तरह का रेस्पॉन्स मिल रहा है?

मेरी सोच से भी कहीं ज्यादा अच्छा रेस्पॉन्स मिल रहा है। शाबाना आजमी ने मुझे फोन करके बधाई दी, मेरे अभिनय की तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया में भी मेरे बारे में लिखा।

इम्तियाज अली के अलावा तमाम फिल्मकारों ने तारीफ की है। नंदिता दास ने जिस तरह से फिल्म में मंटो की जिंदगी और उनकी कहानियों को एक साथ गूंथा है, वह बात भी लोगों को बहुत पसंद आई।

आपने अब तक डि-ग्लैम रोल ही ज्यादा निभाए हैं, क्या ग्लैमरस किरदारों से कोई परहेज है?

अफसोस की बात है कि किसी ने मुझे ग्लैमरस किरदार निभाने का मौका ही नहीं दिया। जबकि मैं तो हर तरह के किरदार निभाना चाहती हूं। वेबसीरीज ‘मिर्जापुर’ में थोड़ा-सा ग्लैमरस किरदार है।

पता नहीं क्यों बॉलीवुड में कलाकारों को किसी न किसी इमेज में बांधकर रख दिया जाता है। मेरी राय में फिल्मकारों को अपनी सोच से ऊपर उठना चाहिए। अगर मुझे ग्लैमरस किरदार मिले तो मैं उसमें भी अपनी एक्टिंग एबिलिटी दिखा सकती हूं।

कोई ऐसा किरदार, जिसे निभाने की दिली तमन्ना हो?

मेरी दिली ख्वाहिश है कि कोई ऐसी फिल्म बने, जिसमें मुझे अमृता प्रीतम का किरदार निभाने को मिले।

और क्या नया कर रही हैं?

मैंने एक फिल्म की है ‘हामिद’ जो कश्मीर के बैकग्राउंड पर है। फिल्म के निर्देशक एजाज खान हैं। जिन्होंने कुछ समय पहले फिल्म ‘व्हाइट एलीफेंट’ का निर्देशन किया था। एक फिल्म संजय मिश्रा और अक्षय ओबेराय के साथ की है, उसका नाम है-‘हैश टैग गड़वी।’

इसमें ब्लैक ह्यूमर के साथ-साथ ड्रामा भी है। इसके अलावा करण गौड़ के निर्देशन में एक फिल्म कर रही हूं। एक वेबसीरीज ‘दिल्ली पुलिस’ भी कर रही हूं।

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