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राधिका आप्टे का नया अवतार, देखें वीडियो

वीडियो में राधिका अपनी किशोरावस्था की पुरानी यादों में खो जाती हैं।

राधिका आप्टे का नया अवतार, देखें वीडियो
मुंबई. कल्चर मशीन की ‘अनब्लश्ड सीरीज‘ के नवीनतम वीडियो में अभिनेत्री बता रही है कि ‘फिट इन‘ रहना क्यों महत्वपूर्ण नहीं है।‘खूबसूरती‘ क्या है? जब आप खुश होते हैं तो आपकी आंखों से बहने वाले आंसू.. वह एक मुस्कान, जो किसी के भी दिन को सार्थक बना सकती है। वे मासूम आंखें, बिखरे हुये बाल, प्यार, नरम आवाज, परियों जैसी भावनायें सब कुछ! हां, आपसे जुड़ी हर चीज खूबसूरत है! बॉलीवुड अभिनेत्री राधिका आप्टे कल्चर मशीन के लाइफस्टाइल चैनल ‘ब्लश‘ पर प्रसारित होने वाली अनब्लश्ड सीरीज के अपने नवीनतम वीडियो में आपसे यही कहने की कोशिश कर रही हैं।

क्या है वीडियो में
‘अनब्लश्ड‘ में राधिका के नये वीडियो में सवाल किया गया है कि एक भारतीय महिला के लिये क्या ‘सामान्य‘ और ‘स्वीकार करने योग्य‘ है और इससे महत्वपूर्ण यह कि कौन इसे परिभाषित करता है। यह वीडियो महिलाओं और युवा लड़कियों के माध्यम से एक सशक्त संदेश भेजता है, जोकि अपने लव-हैंडल्स या इम्परफेक्ट दांतों पर शर्मिंदा नहीं हैं। महिलायें, जो अपने मूल तक पहुंची हैं और उन्होंने एक ऐसी चीज पाई है, जो उन्हें अनूठा और खूबसूरत बनाता है। थिएटर और बॉलीवुड की चर्चित अदाकारा राधिका मौजूदा दौर के समाज में एक प्रांसगिक विषय पर अपनी राय रख रही हैं।
राधिका का क्या है कहना
वीडियो के बारे में बताते हुये उन्होंने कहा, ‘‘हर व्यक्ति के पास अपने लिये कुछ खूबसूरत और खास होता है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि खूबसूरती खुद में होती है और उस पर गर्व करना चाहिये। समाज ने ‘खूबसूरत‘ की परिभाषा बनाई है, जिससे हम प्रभावित होते हैं और उस फिल्टर से खुद को देखना शुरू
कर देते हैं। जब कल्चर मशीन की ब्लश टीम ने कॉन्सेप्ट के साथ मुझसे सम्पर्क किया, तो मुझे फौरन वे सारी बातें याद आ गईं, कि किस तरह टीनेज के दौरान मैं इस ग्लैमरस खूबसूरत छवि में खुद को बिठाने का प्रयास कर रही थी, जो मुझ पर थोपा गया था। इस वीडियो के माध्यम से हम कहना चाहते हैं कि हम सभी महिलाओं को उनके अंदाज में खूबसूरत मानते हैं। मुझे लगता है कि हमें खुद की अधिक सराहना करनी चाहिये।‘‘
वीडियो की कहानी
वीडियो में 30 वर्षीय राधिका अपने पुरानी फोटो को महत्वाकांक्षी परामर्श देती दिखाई दे रही है। अपनी 15 साल पुरानी एक तस्वीर को देखकर राधिका अपनी किशोरावस्था की पुरानी यादों में खो जाती हैं। वे शब्द उनकी कानों में गूंजते हैं, जो वह छोटी राधिका से कहना चाहती थीं। उनके ज्ञान के मोती ‘खुद का घोषणापत्र; बन जाते हैं, जहां विजुअल्स हमें दूसरी अन्य युवा ‘‘राधिकाओं‘ के पास ले जाते हैं, जो खुद भी अपनी सच्चाई को देख नहीं पा रही हैं।
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