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राधिका ने ऑन-स्क्रीन ही सान्या से निकाली अपनी भड़ास, ''पटाखा'' में गोबर वाले सीन पर ये दिया जवाब

दिल्ली में पली-बढ़ीं राधिका मदान का एक्टिंग से जुड़ने का कोई इरादा नहीं था। वह डांस की फील्ड में जाना चाहती थीं। लेकिन तकदीर उन्हें एक्टिंग की फील्ड में ले आई।

राधिका ने ऑन-स्क्रीन ही सान्या से निकाली अपनी भड़ास,

दिल्ली में पली-बढ़ीं राधिका मदान का एक्टिंग से जुड़ने का कोई इरादा नहीं था। वह डांस की फील्ड में जाना चाहती थीं। लेकिन तकदीर उन्हें एक्टिंग की फील्ड में ले आई।

अपने पहले टीवी सीरियल ‘मेरी आशिकी तुम से ही’ में राधिका ने ईशानी का किरदार निभाया था, जो खूब पॉपुलर हुआ। अब वह विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘पटाखा’ को लेकर चर्चा में हैं।

टीवी से फिल्मों की तरफ कैसे मुड़ीं?

मैंने टीवी पर एक ही सीरियल ‘मेरी आशिकी तुम से ही’ के अलावा रियालिटी शो ‘झलक दिखला जा’ किया था। पहले सीरियल का टेलीकास्ट खत्म होते ही मैंने टीवी से ब्रेक लेकर फिल्मों के लिए कोशिश शुरू कर दी थी।

उस वक्त मेरी उम्र भी महज इक्कीस साल ही थी। मैंने ऑडिशन देना शुरू किया। मुझे पहली फिल्म मिली ‘मर्द को दर्द नहीं होता’, लेकिन कुछ समय बाद यह फिल्म बीच में ही बंद हो गई। अब फिर से वह शुरू हुई। इसका वर्ल्ड प्रीमियर इसी महीने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हो रहा है। इसके अलावा ‘पटाखा’ भी रिलीज हो रही है। मैं बहुत खुश हूं।

आपने तो बिना कुछ सोचे-समझे विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘पटाखा’ साइन कर ली होगी?

जी हां, ऐसा कह सकते हैं। मैं क्या कोई भी एक्ट्रेस विशाल भारद्वाज के साथ काम करने से इंकार नहीं कर सकती। मैं तो विशाल भारद्वाज सर की बहुत बड़ी फैन हूं। मैंने उनकी ‘ओमकारा’, ‘मकबूल’ के अलावा कई फिल्में देखी हैं।

मैं तो उनके म्यूजिक की भी फैन हूं। वह बेहतरीन फिल्ममेकर हैं। मुझे तो विशाल भारद्वाज के साथ कोई भी फिल्म, किसी भी तरह का किरदार निभाने का मौका मिलता तो मैं आंख मूंदकर कर लेती। लेकिन मुझे विशाल भारद्वाज के साथ ही एक बेहतरीन, दमदार कहानी वाली फिल्म मिली।

सच यह है कि फिल्म ‘पटाखा’ के लिए सेलेक्शन होने के बाद विशाल सर ने मुझे कहानी देते हुए कहा कि जाकर पढ़ लो। फिल्म की कहानी पढ़ने के बाद मुझे लगा कि कितनी कमाल की स्टोरी है, इसे तो मुझे हर हाल में करना है।

फिल्म में आपका किरदार क्या है?

फिल्म ‘पटाखा’ राजस्थान के राइटर चरण सिंह पथिक की कहानी ‘दो बहनें’ पर आधारित है। यह फिल्म एक राजस्थानी गांव की दो बहनों की कहानी है, जिसमें से बड़ी बहन का किरदार मैंने और छोटी बहन का किरदार सान्या मल्होत्रा ने निभाया है।

मेरे किरदार का नाम चंपा कुमारी उर्फ बड़की है। वह हर किसी पर हुक्म चलाना जानती है। उसे लगता है कि वह बड़ी है तो हर चीज पर उसी का हक है। उसे लगता है कि छोटी बहन के पास न अक्ल है और न किसी चीज या बात की समझ है।

सब कुछ सिर्फ उसी के पास है। उसके हिसाब से छोटी बहन तो उसका हक छीनने वाली है, पता नहीं मां-बाप ने छुटकी को क्यों पैदा कर दिया। उसे अपनी छोटी बहन उर्फ छुटकी से नफरत है। इस तरह दोनों बहनों के बीच पूरी फिल्म में नोक-झोंक चलती रहती है। कहानी का अंत भी बहुत अच्छा है।

क्या आप रियल लाइफ में अपने किरदार बड़की जैसी हैं?

मैं अपने पूरे परिवार में सबसे छोटी हूं तो बहुत पैंपर्ड हूं। मेरे दो बड़े भाई हैं। ऐसे में मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि बड़ी बहन का किरदार कैसे निभाऊं। लेकिन किरदार को निभाते हुए मैंने अपने बड़े भाइयों को याद किया।

मेरे बड़े भाइयों को भी लगता है कि वह बड़े हैं, वही सब कुछ जानते हैं और वही मैच्योर हैं। मुझे तो कुछ समझ नहीं है। जबकि मेरा बड़ा भाई मुझसे सिर्फ चार साल ही बड़ा है।

मां कहती थीं कि छोटी बहन की पिटाई नहीं करते हैं, तो मैं इस बात का फायदा उठाती थी और अपने बड़े भाई को बहुत मारती थी। शूटिंग के दौरान वह सब याद कर मैं कैमरे के सामने छुटकी की पिटाई करती थी।

यानी कि बड़की के किरदार को निभाने के लिए आपको किसी तरह के होमवर्क को करने की जरूरत नहीं पड़ी?

ऐसा नहीं है। कहानी राजस्थान के गांव की है तो मैं और सान्या दोनों राजस्थान में जयपुर से दो तीन घंटे की दूरी पर स्थित रॉक्सी गांव गए थे। वहां पर हम कुछ गांव वालों के साथ रहे।

उनसे हमने गोबर उठाना, गोबर से उपले बनाना, कुंए से पानी निकालना, गोबर से जमीन पर लीपना, चूल्हे पर रोटी पकाना वगैरह सब कुछ सीखा। जबकि अब तक मैं अपने घर के किचन में कभी गई नहीं थी।

फिल्म में दोनों बहनों का गोबर में लड़ने का सीन भी है?

जी हां, यह कहानी का हिस्सा है। विशाल सर ने हमसे पूछा था कि गोबर असली रखें या नकली। हम गोबर के उपले बनाने की प्रैक्टिस कर चुके थे तो हमने कह दिया कि असली रख लें। शूटिंग ठंड के दिनों में हो रही थी।

शूटिंग के दिन बारिश भी हो रही थी। जैसे ही मैं और सान्या गोबर के अंदर पहुंचे तो गोबर गर्म था। हमें ठंड से राहत मिली, इसके बाद हमने गोबर के अंदर मुंह डुबाने से लेकर हर सीन को एंज्वॉय किया।

सान्या मल्होत्रा के संग काम करने के एक्सपीरियंस कैसे रहे?

मुझे वह पहले दिन से ही अच्छी लगी। मैंने उसकी फिल्म ‘दंगल’ देख रखी थी। ‘दंगल’ में उसकी एक्टिंग मुझे कमाल की लगी थी। मैं उसके साथ काम करने को लेकर एक्साइटेड थी। हमने एक साथ वर्कशॉप की। हम बहुत अच्छे दोस्त बन चुके हैं।

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