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Radhika Madan Interview : बॉलीवुड की न्यू ‘पटाखा’ राधिका एंट्री से पहले खोले कई राज

फिल्म ‘पटाखा’ से बॉलीवुड में डेब्यू कर चुकीं, राधिका मदान अब दूसरी बॉलीवुड फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ में नजर आएंगी। फिल्म में उनके अपोजिट एक्ट्रेस भाग्यश्री के बेटे अभिमन्यु हैं। इस फिल्म को उन्होंने क्यों एक्सेप्ट किया? अपने करियर को लेकर उनकी क्या प्लानिंग्स हैं? राधिका मदान से बातचीत।

Radhika Madan Interview : बॉलीवुड की न्यू ‘पटाखा’ राधिका एंट्री से पहले खोले कई राज
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Radhika Madan Interview : बतौर डांस इंस्ट्रक्टर अपना करियर शुरू करने वालीं राधिका मदान ने एकता कपूर के सीरियल ‘मेरी आशिकी तुम से ही’ से साल 2014 में एक्टिंग फील्ड में कदम रखा था। उसके बाद डांस रियालटी शो ‘झलक दिखला जा रिलोडेड’ में उन्होंने अपने डांस टैलेंट को दिखाया। पिछले साल विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘पटाखा’ से राधिका ने बॉलीवुड में एंट्री की। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई, लेकिन क्रिटिक्स ने फिल्म को पसंद किया। अब राधिका की दूसरी बॉलीवुड फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ रिलीज होने वाली है। फिल्म में उनके साथ एक्ट्रेस भाग्यश्री के बेटे अभिमन्यु दसानी डेब्यू कर रहे हैं। इस फिल्म, इसमें उनके रोल और करियर से जुड़ी बातें राधिका मदान से।

फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ किस टाइप की फिल्म है?

यह फिल्म सूर्या (अभिमन्यु) के किरदार पर बेस्ड है। सूर्या कॉन्जेंटिनल इनसेंसिटिविटी टू पेन डिजीज से ग्रसित है यानी, एक ऐसी बीमारी से पीड़ित है, जिसमें उसे किसी भी चीज से दर्द महसूस नहीं होता। इस बीमारी से पीड़ित इंसान तीन-चार साल से ज्यादा नहीं जी पाता, लेकिन सूर्या अपनी बीमारी को कैसे डील करता है, कैसे अपनी लाइफ जीता है, यही सब फिल्म में दिखाया गया है। फिल्म की स्टोरी और कॉन्सेप्ट दोनों ही नए हैं। इस फिल्म के जरिए मैं एक बार फिर कुछ नया कर रही हूं, उम्मीद है कि ‘पटाखा’ की तरह लोग इस फिल्म में भी मेरे काम को पसंद करेंगे।

इसमें अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?

फिल्म में मैं सुप्री नाम की लड़की का किरदार निभा रही हूं, जो कराटे, मार्शल आर्ट्स में माहिर है। वो अपनी लड़ाई खुद लड़ती है, उसे बाकी फिल्म की हीरोइनों की तरह अपनी सुरक्षा के लिए हीरो की जरूरत नहीं है। सुप्री, सूर्या की पड़ोसी है। दोनों का बचपन एक ही जगह बीता है। लेकिन बाद में किसी कारणवश दोनों बिछड़ जाते हैं, फिर बड़े होने पर दोनों का एक-दूसरे से आमना-सामना होता है। क्यों, कैसे और कब, इस सवाल का जबाव पाने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

इस फिल्म का ऑफर आपको कब और कैसे मिला?

सबको लगता है कि यह फिल्म मेरे करियर की दूसरी फिल्म है, जबकि सच यह है कि मेरे करियर की दूसरी फिल्म ‘पटाखा’ थी। पहली फिल्म तो यही है। दरअसल, हुआ यह कि मैं जब फिल्म ‘लैला-मजनूं’ में लैला के किरदार के लिए ऑडिशन देने गई थी, वहीं एक शख्स के कहने पर मैं ऑडिशन छोड़कर डायरेक्टर वासनबाला सर के पास पहुंच गई। उन्होंने मुझे किक मारने को कहा, मैंने किक मार दी। पता नहीं उन्हें मेरी एक्शन स्टाइल में क्या अच्छा लगा और उन्होंने मुझे इस फिल्म के लिए सेलेक्ट कर लिया। मैंने कहा भी कि मैं एक्शन नहीं कर पाऊंगी, वो बोले सब हो जाएगा। मैं भी खुश हो गई कि चलो कुछ अलग तरह की फिल्म तो मिली।

इस फिल्म में एक्शन सींस की तैयारी कैसे की?

सच कहूं तो मुझे एक्शन करने में, एक्शन फिल्में देखने में भी बिल्कुल इंटरेस्ट नहीं था। इस फिल्म के लिए नौ महीने तक मुझे रोज पांच घंटे ट्रेनिंग दी गई। यहां तक कि मुझे रोज रात एक एक्शन फिल्म भी देखनी पड़ती थी। इस दौरान मैंने कई जख्म और दर्द भी सहे। लेकिन ऐसे हालात शुरुआत के कुछ महीन थे। तीन महीनों के बाद धीरे-धीरे मुझे एक्शन से प्यार हो गया और मैं अपने काम और किरदार को एंज्वॉय करने लगी। आज मुझे लगता है कि मैं बहुत लकी थी, जो यह फिल्म मुझे मिली।

एक्टर अभिमन्यु के साथ पहली मुलाकात कैसी रही?

मुझे याद है वो दिन जब मैं पहली बार अभिमन्यु से मिली थी। डायरेक्टर सर ने उससे कहा कि राधिका को फिल्म की स्टोरी सुनाओ, मैंने कहानी सुनी फिर सर से पूछा हीरो कौन होगा? सर ने कहा, ‘यही जो तुम्हारे सामने बैठा है।’ मैंने कहा, ‘क्या ये एक्शन कर पाएगा?’ उस समय मैं नहीं जानती थी, वो स्टार किड है। कई महीनों तक मुझे पता भी नहीं चला, क्योंकि उसके अंदर कोई एटिट्यूड नहीं है, वो बहुत हंबल और हार्ड वर्कर है। वो ऑटो से घर जाता था। जब एक दिन मैं उसके घर गई, वहां मैंने भाग्यश्री मैम के साथ उसकी पिक्स देखे, तब मुझे पता चला वो उनका बेटा है।
क्या आपको लगता है आप अपने करियर में सही दिशा में बढ़ रही हैं, सही फिल्में साइन कर रही हैं?
मुझे नहीं पता और मुझे लगता है यह बात मुझे क्या, किसी एक्टर को नहीं पता होती कि वह कौन-सी फिल्म सही कर रहा है या गलत, किस दिशा में जा रहा है? अगर सबको यह पता हो तो आज सबकी फिल्में हिट ही होतीं। मुझे लगता है जब आप खुद अंदर से फील करते हैं कि आप सही कर रहे हैं, तब आप वाकई में सही होते हैं। मैंने तो बस इतना सोचा है कि जब तक जान है फिल्मों में काम करते रहना है, मिस्टेक से डरना नहीं है। मैं अपने काम को एंज्वॉय करूंगी और हर कैरेक्टर को दिल से निभाऊंगी।

हमेशा फैमिली के साथ खेली है होली

होली मेरे पसंदीदा त्योहारों में से एक है। होली का जिक्र आते ही मेरी नजरों के सामने गुझिया, जलेबी और ठंडाई आ जाती है। मैंने अब तक हमेशा अपनी फैमिली के साथ दिल्ली में होली खेली है। बचपन में होली वाले दिन सुबह 6 बजे ही हम उठ जाते थे और गुब्बारों में अलग-अलग रंगों के पानी भरकर दूसरों पर फेंकने के लिए तैयार कर लेते थे। सुबह से शाम तक रंगों और पानी से खूब खेलते थे, खूब मजा आता था।

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