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माहवारी के वो पांच दिन और राधिका आप्टे की ये दर्दभरी कहानी पढ़कर आंखें हो जाएंगी नम

हां! मेरी मुलाकात उनसे हुई, लेकिन फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद। इसके पीछे मेरी सोच यह रही कि मैं इस किरदार को एकदम रियल बनाना चाहती थी। मैं नहीं चाहती थी कि उनसे मिलने के बाद उनसे इंस्पायर होकर किरदार निभाऊं। दूसरी बात हम सभी को कहानी और सब्जेक्ट पर पूरा यकीन था। जब हम फिल्म बनाते हैं, तो रियल किरदार में थोड़ा बहुत बदलाव करना ही पड़ता है। वास्तविक जिंदगी और सिनेमा में थोड़ा फर्क होता है।

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