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''बुर्का गर्ल'' प्लाबिता बोरठाकुर प्रेमी की तलाश में पहुंची राजस्थान, दे चुकी हैं कई बोल्ड सीन्स

हिंदी फिल्मों में दो साल से असम की प्लाबिता बोरठाकुर भी काफी चर्चा बटोर रही हैं।‘पीके’ और ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ जैसी फिल्मों में उनके काम को काफी पसंद किया गया। इन दिनों प्लाबिता अपनी फिल्म ‘वाह जिंदगी’ को लेकर चर्चा में हैं।

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असम में 1935 से ही फिल्में बनती रही हैं। वहां लगभग हर घर में संगीत और नृत्य का माहौल मिलता है। पिछले कुछ सालों में असम से संबंध रखने वाले कलाकार बॉलीवुड में अपना टैलेंट दिखा रहे हैं।

हिंदी फिल्मों में दो साल से असम की प्लाबिता बोरठाकुर भी काफी चर्चा बटोर रही हैं। कई एड फिल्मों के अलावा ‘पीके’ और ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ जैसी फिल्मों में उनके काम को काफी पसंद किया गया। इन दिनों प्लाबिता बोरठाकुर अपनी फिल्म ‘वाह जिंदगी’ को लेकर चर्चा में हैं।

अपनी अब तक की जर्नी को लेकर क्या कहेंगी?

मैं असम के दुलियाजान की रहने वाली हूं। मेरे पापा क्लासिकल सिंगर हैं, वह एक ऑयल कंपनी में काम करते हैं। मेरी मां रीना बोरठाकुर राइटर, पोएट हैं। दोनों बड़ी बहनें परिणीता और प्रियांगी भी बॉलीवुड में ही हैं।

परिणीता बोरठाकुर एक्ट्रेस हैं और प्रियांगी बोरठाकुर असिस्टेंट डायरेक्टर हैं। हमारे पैरेंट्स ने हमें कल्चरल एक्टिविटीज में हिस्सा लेने के लिए हमेशा मोटिवेट किया। स्कूल की पढ़ाई पूरी कर 2011 में मैं हायर एजुकेशन के लिए मुंबई आ गई थी।

मैंने सायकोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। मुंबई पहुंचकर मैंने पढ़ाई के साथ-साथ बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल से एक्टिंग की ट्रेनिंग हासिल की। एक्टिंग की ट्रेनिंग हासिल करते हुए मैंने अहसास किया कि मुझे इसी फील्ड में करियर बनाना है।

मुझे अलग-अलग तरह के किरदार निभाने से खुशी मिलती है। फिर मैंने कुछ विज्ञापन फिल्में कीं। उसके बाद पहली बार फिल्म ‘पीके’ में अनुष्का शर्मा की बहन का छोटा-सा किरदार निभाया।

यह बहुत छोटा-सा किरदार था, इसलिए मैं नहीं करना चाहती थी। लेकिन राजकुमार हिरानी के साथ काम करने का मौका मिल रहा था, इसलिए इंकार नहीं कर पाई। फिर एक साल बाद मैंने फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ के लिए ऑडिशन दिया और मेरा सेलेक्शन हो गया।

करियर की दूसरी फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ में सेंट्रल किरदार निभाना मेरे लिए अच्छा एक्सपीरियंस रहा। अब मेरी दो फिल्में ‘वाह जिंदगी’ और ‘छोटे नवाब’ रिलीज के लिए तैयार है।

आपने फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ में दो गाने भी गाए थे?

जी हां, मैं सिंगर भी हूं। म्यूजिक मेरा पैशन है। मैं गाती भी हूं और धुनें भी बनाती हूं। मैं एक सिंगिंग बैंड ‘मनु और चाव’ का हिस्सा भी हूं। इस बैंड के तहत कई म्यूजिकल कंसर्ट भी किए हैं। बैंड का मेरा साथी चाव अच्छा सॉन्ग राइटर, म्यूजिक कंपोजर और सिंगर भी है। हमने खुद का बनाया हुआ एक सॉन्ग ‘इन टू योर आर्म्स’ गाया है।

फिल्म ‘वाह जिंदगी’ के बारे में कुछ बताइए?

इस फिल्म में लव स्टोरी के साथ कई बातें हैं। इसे आप न्यू एज ड्रामा फिल्म भी कह सकते हैं। इस फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ रियलाइज करता है। इसी के साथ फिल्म में ‘मेक इन इंडिया’ का कॉन्सेप्ट भी है।

फिल्म में अशोक का मेन किरदार नवीन कथूरिया ने निभाया है। अशोक ने अपना जो प्रोडक्ट बनाया है, उसके लिए उसका अपना एक स्ट्रगल है। तो वहीं राजस्थान में बारिश ना होने की वजह से सूखा पड़ता है, उस पर भी बात की गई है। गांव में पानी की समस्या को बड़ी गंभीरता से दिखाया गया है। मेरा रीना का किरदार अपने बचपन के प्यार को ढूंढ़कर उसे पाती है, इसमें उसका अपना एक स्ट्रगल है। जबकि अशोक भी अपने प्यार को पाने के लिए सब कुछ करने के लिए आमादा है। इस तरह यह फिल्म अशोक और रीना की लव स्टोरी है। फिल्म में कई उतार-चढ़ाव हैं।

अपने किरदार के बारे में डिटेल में बताएं?

मैंने इसमें एक साधारण लड़की का किरदार निभाया है, जो कि अपने बचपन के प्रेमी की तलाश में है। अपने प्रेमी से मिलन के लिए वह कई मुश्किलों का सामना करती है। फिल्म में मेरे ज्यादातर सींस विजय राज और नवीन कथूरिया के साथ हैं।

कहानी राजस्थान की है तो भाषा को लेकर क्या तैयारी की?

सेट पर राजस्थानी भाषा पर ध्यान देने के लिए कोच मौजूद रहते थे। वह हमें शब्दों का सही उच्चारण बताते थे। पूरी फिल्म में ठेठ राजस्थानी भाषा का इस्तेमाल नहीं है। फिल्म को इस अंदाज से बनाया गया है, जिससे पूरे भारत के लोग समझ सकें।

इसके अलावा कौन-सी फिल्में की हैं?

एक फिल्म ‘छोटे नवाब’भी की है। इसे लखनऊ में शूट किया गया है। एक और फिल्म की शूटिंग पूरी की है, लेकिन उस फिल्म को लेकर अभी बोलना ठीक नहीं है।

अब तक के अभिनय करियर के बारे में क्या कहेंगी?

मैंने इस बारे में सोचा नहीं। अब तक मैंने कुछ भी सोचकर काम नहीं किया है। मैं अपने नाम के हिसाब से ही बहते जाना पसंद करती हूं। मेरा नाम है-प्लाबिता, जिसका मतलब होता है बहते रहना। जब जो मन में आता है, करती रहती हूं। योजना नहीं बनाती। मुझे सिर्फ इतना पता है कि मुझे फिल्मों में अभिनय करना है या गाना है। लेकिन मैं यह नहीं सोचती हूं कि मेरा करियर कहां जा रहा है? मुझे अच्छे किरदार निभाने हैं, कहीं पहुंचने की जल्दी नहीं है।

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