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''जोधा अकबर'' गर्ल परिधि शर्मा ने ''पटियाला बेब'' बन की वापसी, इन किरदारों को निभाने की हैं इच्छुक

परिधि शर्मा अब सिरियल पटियाला बेब्स में नजर आएंगी। इश सिरियल में उनके साथ अश्नूर कौर मुख्य भूमिका में हैं।

परिधि शर्मा, मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली हैं। एक्टिंग से लगाव था तो मुंबई आ गईं। उन्होंने अपने टेलीविजन करियर की शुरुआत 2010 में सीरियल ‘तेरे मेरे सपने’ से की।

2011 में परिधि ने तन्मय सक्सेना से शादी कर ली। शादी के बाद भी उनका एक्टिंग करना जारी रहा, वह सीरियल ‘रुक जाना नहीं’ में दिखीं। लेकिन परिधि को पॉपुलैरिटी मिली सीरियल ‘जोधा अकबर’ में रानी जोधाबाई का किरदार निभाकर।

इसके बाद वह टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस बन गईं। इस सीरियल के खत्म होने के बाद परिधि ने कोई लीड कैरेक्टर वाला सीरियल एक्सेप्ट नहीं किया, एक-दो सीरियल में कैमियो किया। तीन साल से वह टीवी से दूर हैं।

दरअसल, दो साल पहले उन्होंने एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया, जिसकी परवरिश में परिधि बिजी रहीं। अब वह सीरियल ‘पटियाला बेब्स’ में दिखाई देंगी। हाल ही में अपने सीरियल के प्रमोशन के लिए परिधि दिल्ली आई थीं।

सीरियल ‘पटियाला बेब्स’ से तीन साल बाद टीवी पर वापसी कर रही हैं। इस सीरियल को ही क्यों एक्सेप्ट किया? सीरियल के अपने कैरेक्टर के बारे में डिटेल में बताएं?

इस सीरियल की कहानी एक हाउस वाइफ बबिता उर्फ बेब्स की है, जो परिवार की देखभाल और बच्चों की परवरिश में, अपने सपनों को भूल जाती है। बबिता की एक टीनएज बेटी है, जिसका नाम मिनी है। इस किरदार को अश्नूर कौर निभा रही हैं।

सीरियल में मिनी अपनी मां बबिता की अधूरी ख्वाहिशों और सपनों को पूरा करने का जिम्मा उठाती है। मुझे पूरा यकीन है कि इस कहानी से ज्यादातर हाउसवाइफ रिलेट करेंगी। मेरे लिए भी एक एक्टर के तौर पर बबिता का किरदार परफॉर्मेंस ओरिएंटेड है।

आपने कहा कि सीरियल में बेटी अपनी मां के सपनों को पूरा करती है, आखिर हमारे यहां महिलाओं की इच्छाएं, सपने शादी के बाद अधूरे क्यों रह जाते हैं?

इसकी वजह हमारा सोशल सिस्टम है, जिसमें अभी बहुत कम बदलाव आया है। शादी और बच्चों के जन्म के बाद एक महिला की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, उसे ही सब-कुछ करना होता है, इसमें परिवार का सहयोग उसे कम मिलता है।

इसी वजह से उनके अपने सपने कहीं दब जाते हैं, अधूरे रह जाते हैं। लेकिन ऐसा नहीं कि समाज में बिल्कुल बदलाव नहीं आया है। अपनी दादी, मां के समय से आज की महिलाएं बेहतर स्थिति में हैं।

अब परिवार का सपोर्ट महिलाओं को मिल रहा है, इसलिए वह शादी और बच्चे के जन्म के बाद भी वर्किंग रह पाती हैं। मैं अपना ही उदाहरण देती हूं। मां बनने के बाद मैंने टीवी पर कमबैक किया, इसकी वजह मेरे पति, ससुराल का सपोर्ट है।

उन्होंने मेरे बच्ची की परवरिश की जिम्मेदारी ली, इंदौर से मुंबई शिफ्ट हुए। इस तरह हर परिवार को समझना चाहिए कि एक हाउसवाइफ को भी हेल्पिंग हैंड की जरूरत होती है।

थोड़ा सा सपोर्ट उनकी जिंदगी को बेहतर बना सकता है। इससे किसी भी हाउवाइफ के सपने अधूरे नहीं रहेंगे और परिवार भी खुशहाल रहेगा।

सीरियल में आपके कैरेक्टर बबिता में कॉन्फिडेंस की कमी है, वह नई चीजें सीखने से डरती है। इसी तरह का नेचर ज्यादातर हाउसवाइफ का होता है। किस तरह हाउसवाइफ अपना कॉन्फिडेंस बूस्ट कर सकती है?

सबसे पहले तो हमें हर हाउसवाइफ को यह रियलाइज करवाना चाहिए कि वह कितना बड़ा काम कर रही है। जब वह जानेगी कि उनकी वैल्यू क्या है तो कॉन्फिडेंस अपने आप बढ़ेगा। मैं तो हर हाउस वाइफ को सलाम करती हूं। टीवी से ब्रेक लेने पर मुझे अहसास हुआ कि एक हाउसवाइफ कितनी मेहनत करती है।

सीरियल में आप एक टीनएज बेटी की मां बनी हैं, जिनका रिश्ता मां-बेटी से ज्यादा दोस्त का है। क्या आपको लगता है कि पैरेंट्स और बच्चों में फ्रेंडशिप का रिलेशन पॉसिबल है?

बिल्कुल पॉसिबल है। अकसर पैरेंट्स चिंता में रहते हैं कि हमारा बच्चा कुछ गलत न करे। यह डर तब ही दूर होगा, जब पैरेंट्स बच्चे के साथ दोस्ती का रिश्ता रखेंगे। दोस्त बनकर ही पैरेंट्स, बच्चे के दिल की बात जान सकते हैं। मेरा और मेरी मम्मी का रिलेशन, फ्रेंड जैसा है। मैं अपनी लाइफ की हर बात मम्मी से शेयर करती हूं।

सीरियल में मिनी, अपनी मां की ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करती है। क्या आपने अपनी मां के ड्रीम्स को पूरा करने के लिए, ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए कुछ खास किया है?

मेरी मम्मी अच्छा डांस करती थीं, लेकिन शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारियों के बीच कभी प्रोफेशनल डांस नहीं सीख पाईं। इस सीरियल से मैंने भी सीख ली है और सोच लिया है कि मम्मी को डांस सीखने के लिए कहूंगी।

हिस्टोरिकल सीरियल ‘जोधा-अकबर’ में जोधा के किरदार के लिए आपको आज भी याद किया जाता है। आगे फ्यूचर में कोई हिस्टोरिकल कैरेक्टर प्ले करना चाहेंगी?

क्यों नहीं। आगे भी मुझे जोधाबाई जैसे हिस्टोरिकल किरदार करने को मिलेंगे तो जरूर करूंगी। मैंने शुरू से ही अलग-अगल किरदार निभाए हैं।

परिधि दो साल के बेटे की मां हैं, अब शूटिंग में ज्यादा बिजी रहती होंगी, ऐसे में बच्चे की परवरिश और शूटिंग को मैनेज करना कितना मुश्किल है?

‘मेरे लिए यह काम बहुत मुश्किल रहा है। मैंने पूरे दो साल सिर्फ अपने बच्चे की परवरिश में दिए हैं। फिर से एक्टिंग में लौटने के लिए मेंटली, इमोशनली खुद को तैयार किया। मेरी खुशकिस्मती है कि मेरा बच्चा अपने दादी-दादा और नाना-नानी की परवरिश में बड़ा हो रहा है। इस बात का मुझे बहुत सुकून है।’

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