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समाज के घिनौने सच की तस्वीर दिखाती है ''पाखी'': अनामिका शुक्ला

बॉलीवुड में इन दिनों कई ऐसे न्यूकमर आए हैं, जिनमें एक्टिंग टैलेंट भरपूर है। इस वजह से वे इंडस्ट्री में जल्द अपनी जगह भी बना रहे हैं। कानपुर की अनामिका शुक्ला भी ऐसी ही कलाकार हैं।

समाज के घिनौने सच की तस्वीर दिखाती है

बॉलीवुड में इन दिनों कई ऐसे न्यूकमर आए हैं, जिनमें एक्टिंग टैलेंट भरपूर है। इस वजह से वे इंडस्ट्री में जल्द अपनी जगह भी बना रहे हैं। कानपुर की अनामिका शुक्ला भी ऐसी ही कलाकार हैं।

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘पाखी’ में उनका काम पसंद किया गया। इसके अलावा आगे वह फिल्म ‘मनसुख चतुर्वेदी की आत्मकथा’, धीरज मिश्रा की फिल्म ‘गालिब’ और रणवीर सिंह के साथ ‘सिंबा’ कर रही हैं।

आपका एक्टिंग वर्ल्ड में आना कैसे हुआ?

मैं कानपुर की रहने वाली हूं। मेरे पापा रिटायर्ड एयरफोर्स ऑफिसर और मां रिटायर्ड टीचर हैं। मुझे बचपन से ही एक्टिंग का शौक रहा है। ग्रेजुएशन तक पढ़ाई कानपुर में की। फिर एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ से बायोटेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया।

2013 में डीआरडीओ में इंटर्नशिप करने के लिए दिल्ली आ गई। यहां आकर मैं थिएटर और मॉडलिंग से जुड़ी। दिल्ली में ‘अंतराल’ नाम के थिएटर ग्रुप से जुड़ी। कुछ नुक्कड़ नाटक भी किए। इसी के साथ एड फिल्में कर रही थी। कुछ म्यूजिक वीडियो किए, 2017 में मुंबई आ गई।

मुंबई में सचिन गुप्ता के साथ नाटकों में एक्टिंग करना शुरू किया। विक्रम भट्ट के साथ दो वेब सीरीज कीं। इन दिनों ‘मनसुख चतुर्वेदी की आत्मकथा’, ‘सिंबा’ और ‘गालिब’ फिल्में कर रही हूं। सचिन गुप्ता डायरेक्टेड फिल्म ‘पाखी’ हाल ही में रिलीज हुई है।

फिल्म ‘पाखी’ को लेकर क्या कहेंगी?

यह कमर्शियल फिल्म होते हुए भी सोशल प्रॉब्लम पर रोशनी डालने वाली फिल्म थी। पूरी दुनिया में देह व्यापार और मानव तस्करी का अवैध और गंदा व्यापार दूसरे नंबर पर है। यह फिल्म उसी की बात करती है।

यह फिल्म देह व्यापार में फंसी पीड़ित पाखी के सर्वाइव करने की कहानी है। इस फिल्म में मैंने लीड रोल निभाया था। पाखी एक ऐसी पीड़ित लड़की है, जिसे अपने प्रेमी पर अटूट विश्वास था। वह उसके साथ शादी करने वाली है।

एक दिन उसका प्रेमी उसे शादी करने का झांसा देकर शहर लेकर आता है, जहां वह पाखी को वेश्यालय चलाने वालों को बेचकर चला जाता है। मजबूर और बेबस पाखी दूसरी लड़कियों की तरह इस जिंदगी को स्वीकार करने की बजाय इससे लड़ती है।

आपने इस किरदार को निभाने से पहले किस तरह की तैयारी की?

मैंने लेखक और निर्देशक सचिन गुप्ता के साथ मिलकर काफी शोध किया। शोध के दौरान जिस तरह की जानकारी हमें मिली, उससे मैं हैरान रह गई। सारी जानकारी बहुत दर्दनाक है। हम वह सब अपनी फिल्म में दिखा ही नहीं सकते थे।

हमें शोध में जो कुछ पता चला, उसका चालीस प्रतिशत ही फिल्म में हमने दिखाया। मैं यह जानकर शॉक्ड हुई कि बच्चों को देह व्यापार में ढकेलने के अलावा उनके अंगों की बिक्री के लिए भी किडनैप किया जाता है। इन अगवा की गई लड़कियों को जिस तरह से रखा जाता है, वह भी कम दर्दनाक नहीं होता है।

आपका करियर जिस तरह से बढ़ रहा है, उससे आप कितनी खुश हैं?

मैं अपने करियर को लेकर बहुत खुश हूं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हर इंसान के लिए सफलता के मायने अलग होते हैं। आपके लिए जो सफलता के मायने हैं, वही मेरे लिए हों, ऐसा जरूरी नहीं है।

मेरी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना यह है कि मैं जो कुछ करना चाहती हूं, जिस तरह का काम करना चाहती हूं, उसे करने का मुझे मौका मिले। मैं अपने आपको लकी मानती हूं कि पसंद की फिल्में चुन सकती हूं।

मैं हमेशा वही काम करती हूं, जिसे करने के लिए मेरा दिल कहे। अब तक के करियर में मैंने वही काम किया, जो मुझे पसंद आया। इन सब बातों से मुझे लगता है कि मेरा करियर बहुत सही तरीके से आगे बढ़ रहा है।

कोई खास किरदार जो करना चाहती हों?

ऐसा कुछ नहीं है। मैं अलग-अलग तरह की फिल्में करना चाहती हूं। मुझे हर जॉनर में काम करना है। मुझे लगता है कि जिंदगी में काम ज्यादा और आराम कम करना चाहिए।

मेरी कोशिश यही है कि मैं बहुत-सी फिल्में करूं। लेकिन सब अलग तरह की हों, जिससे मेरी एक्टिंग इंप्रूव हो सके। मैंने एक्टिंग की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है, जो कुछ सीखा है, काम करते हुए सीखा है।

फिल्म ‘सिंबा’ में क्या कर रही है?

रोहित शेट्टी निर्देशित फिल्म ‘सिंबा’ में वूमेन पुलिस अफसर बनी हूं। रणवीर सिंह के साथ मेरे सीन सिर्फ पुलिस स्टेशन के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर भी हैं। इसके अलावा धीरज मिश्रा की फिल्म ‘गालिब’ में मैंने गालिब की टीचर का किरदार निभाया है।

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