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Padman Review: सुपरहिट है अक्षय की ''पैडमैन'', पैड और पीरियड के संघर्ष की कहानी है ये फिल्म

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की बहुचर्चित फिल्म पैडमैन आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। पैडमैन की कहानी तमिलनाडु के रहने वाले अरूणाचलम मुरूगनाथम की जिंदगी पर आधारित है।

Padman Review: सुपरहिट है अक्षय की

अक्षय कुमार और ऑर बॉल्की की पैडमैन एक ऐसे विषय को टटोलती हैं जो आज भी हिंदुस्तान की रूढ़िवादी परंपराओं से जकड़ा हुआ है। जैसा कि आप सभी जानते है कि कि पैडमैन की कहानी तमिलनाडु के रहने वाले अरूणाचलम मुरूगनाथम की जिंदगी पर आधारित है। जिसने महिलाओं को सस्ते सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के लिए खूब जद्दोजेहद किया था।

आपको बता दें कि पैडमैन में अक्षय कुमार उसी अरूणाचलम मुरूगनाथम का किरदार निभा रहे हैं। इस फिल्म में अक्षय के किरदार का नाम लक्ष्मी है जो अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता है। पैडमैन एक सामाजिक संदेश देते हुई एक जबरदस्त प्रेमकहानी है।

फिल्म की कहानी-

फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के लक्ष्मीकांत चौहान (अक्षय कुमार) के बारे में है जो एक दिन अपनी पत्नी गायत्री को अपने माहवारी के दिनों में गंदे कपड़े का इस्तेमाल करते हुए देख लेता है। उसकी लाख कोशिश के बावजूद कि उसकी पत्नी गंदे कपड़े के बदले सैनेट्री नैपकिन इस्तेमाल नहीं करती है और इसके पीछे की बड़ी वजह होती है नैपकिन का महंगा होना और उससे जुड़ी रूढ़ीवादी परम्परा की कहानियां। लक्ष्मीकांत पर इस बात का धुन सवार हो जाता है कि वो खुद ही नैपकिन बनाकर अपनी पत्नी को उसके इस्तेमाल के लिए राजी जरूर करेगा।

फिल्म की कहानी में मोड़ तब आता है जब लक्ष्मीकांत की पत्नी उसकी कारगुजारियों से परेशान होकर घर छोड़ कर अपने मायके चली जाती है और उसके बाद बात तलाक पर भी आ जाती है। लेकिन जब लक्ष्मीकांत की मुलाकात आईआईटी के प्रोफेसर की बेटी परी (सोनम कपूर) से होती है तब उसके जुनून को एक तरह से पंख मिल जाते हैं। परी और उसके पिता की वजह से सैनेट्री नैपकिन बनाकर उसे घर-घर तक पहुंचाने का उसका सपना सफल होता जाता है जिसका अंत राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री से होता है।

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अक्षय, राधिका सोनम ने किया है शानदार काम-

लक्ष्मीकांत की भूमिका में अक्षय कुमार पूरी तरह से फिल्म पर छाये हुए है। लेकिन यहां पर मैं ये भी कहूंगा कि अगर अभिनय के नव रस की बात यहां पर की जाए तो अक्षय में कमी जरुर नजर आती है। फिल्म की कहानी इस तरह की है कि दर्शक देखते वक्त उनके किरदार से पूरी तरह अपनी सहमति जताएंगे लिहाजा उनको खामियों को कम ही लोग देख पाएंगे। एक अंडर डॉग की कहानी होने की वजह से उनको पूरी तरह से माफी मिल जाती है। लेकिन अक्षय के बारे में ये भी कहना जरूरी हो जाता है कि जैसे-जैसे उनकी फिल्में आजकल आ रही हैं, उनका आत्मविश्वास और भी बढ़ता जा रहा है।

फिल्म में अक्षय खुद अपने ऊपर सैनेट्री पैड का प्रयोग करते है तब वो सीन काफी शानदार नजर आता है। उनकी मेहनत और लगन साफ नजर आती है। राधिका आप्टे गायत्री के रूप में फिल्म में नजर आएंगी और भले ही फिल्म मे उनकी वेशभूषा का परिवेश ग्रामीण है लेकिन अपने किरदार में वो पूरी तरह से जची हैं।सोनम इस फिल्म में परी के रोल में है और उनका किरदार ऐसा है जो ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं है। अपने एक आयामी रोल के लिए सोनम जानी जाती हैं और परी का रोल उसी परंपरा को आगे बढ़ता है।

आर बाल्की की बेस्ट फिल्म है पैडमैन-

बाल्की की ये फिल्म उनकी पिछली फिल्मों से काफी अलग है। कहने का मतलब ये है कि ‘पैडमैन’ उनके फिल्मोग्राफी में अब तक की सबसे सधी हुई फिल्म मानी जाएगी। लेकिन ये भी सच है कि बाल्की ने चतुर निर्देशन और कहानी का सहारा लिया है। एक अंडर डॉग की कहानी ने हमेशा से लोगों को लुभाया है और बॉक्स ऑफिस पर इस तरह की कहानी एक सुरक्षित दांव मानी जाती है।

फिल्म में बाल्की ने शानदार निर्देशन किया है। बाल्की के सामने जो चुनौती है वो फिल्म में साफ नजर आती है क्योंकि उन्हें दर्शकों को फिल्म के जरिए मनोरंजन के अलावा समाज में वर्जित एक विषय को भी अपनी कहानी में पिरोना है जो कहीं से भी उपदेश न लगे। बाल्की अपनी इस कोशिश में कामयाब जरूर हुए हैं लेकिन कई बार लड़खड़ाए भी हैं।

फिल्म का म्यूजिक-

अक्षय कुमार की इस फिल्म का म्यूजिक साधारण है। अरिजीत सिंह की आवाज में आज से तेरी गाना काफी अच्छा लगता है। पैडमैन का एक और गाना हू ब हू भी आप अपनी प्लेलिस्ट में जरूर रखना चाहेंगे। इन दोनों गानों को छोड़कर फिल्म का म्यूजिक कुछ खास छाप नहीं छोड़ता है।

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समाज के लिए जरूरी है अक्षय की पैडमैन-

सामाजिक विषय वस्तु पर आजकल थोक के भाव से फिल्मों का निर्माण हो रहा है लेकिन अपने अनूठे विषय की वजह से ‘पैडमैन’ उन सभी फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म का पहला हाफ कुछ हद तक बोर भी करता है क्योंकि विषय को लेकर थोड़ा बहुत उपदेश भी दिया गया है।

‘पैडमैन’ और अक्षय की पिछली फिल्म ‘टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ का स्वरूप काफी हद तक एक जैसा ही है। ये फिल्म भी मूलत: एक प्रेम कहानी है जहां पर पति अपनी पत्नी के लिए जुनून की हदों को पार कर जाता है। ‘पैडमैन’ अपने विषय वस्तु के हिसाब से आज के परिवेश में एक जरुरी फिल्म है।

पैडमैन में एक बड़े ही संवेदनशील विषय को हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया है और ये बाल्की की सबसे बड़ी जीत है। लेकिन अगर इस फिल्म को देखने के बाद लोगों का नजरिया इसकी ओर से बदल जाए तो ये सबसे बड़ी जीत मानी जाएगी जिसका कोई मूल्य नहीं है। आप इस फिल्म को एक बार जरूर आजमा सकते हैं।

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