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Interview: ''बेबो'' पर बोली ''भाभो'', फ़िल्मी सफ़र का भी किया खुलासा

सीरियल ‘दीया और बाती हम’ में नीलू वाघेला ने भाभो का किरदार निभाया था। यह ऐसी सास का किरदार था, जो अपनी बहू को सपोर्ट करती है, उसके सपने पूरे करने में मदद करती है।

Interview:

सीरियल ‘दीया और बाती हम’ में नीलू वाघेला ने भाभो का किरदार निभाया था। यह ऐसी सास का किरदार था, जो अपनी बहू को सपोर्ट करती है, उसके सपने पूरे करने में मदद करती है।

भाभो के किरदार में नीलू को दर्शकों ने भी खूब प्यार दिया। अब वह सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के नए सीरियल ‘मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो’ में भी सास के किरदार में नजर आ रही हैं। लेकिन इस बार उनका किरदार हटकर है।

सीरियल ‘मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो’ दूसरे सास-बहू ड्रामा सीरियल से कितना अलग है?

यह सीरियल एक फैमिली ड्रामा है, जिसमें खूब सारा मनोरंजन दर्शकों के लिए है। मैंने इसमें सत्या देवी नाम की डिवोर्स लॉयर का रोल किया है। वह अपनी बेटी से बहुत प्यार करती है।

जब बेटी की शादी होती है तो सत्या देवी उसे लेकर फिक्रमंद रहती है। ऐसे में जो सलाह वह बेटी को देती है, उससे दामाद अक्सर मुसीबत में फंस जाता है। इस तरह देखा जाए तो हमारा सीरियल आम सास-बहू ड्रामा से काफी अलग हटकर है।

क्या आप सत्या देवी के किरदार से रिलेट करती हैं?

मैं इस किरदार से रिलेट करती हूं। वह पेशे से एक वकील जरूर है, लेकिन एक मां भी है, जिसे अपनी बेटी की हमेशा फिक्र रहती है। सत्या देवी अपनी बेटी की अच्छी परवरिश भी करती है और अपने प्रोफेशन में भी परफेक्ट है। इस तरह मैं भी एक्टिंग के साथ-साथ अपने परिवार को, बच्चों को बखूबी संभालती हूं।

इस सीरियल के जरिए क्या मैसेज देने की कोशिश की जा रही है?

देखिए, हम अपनी बेटियों को लाड़-प्यार से पालते हैं। लेकिन ज्यादातर देखा गया है कि शादी के बाद उन्हें अपने ससुराल में मायका जैसा माहौल नहीं मिलता है। बेटियों को बहू बनने के बाद काफी एडजस्ट करना पड़ता है।

जबकि शादी के बाद लड़के की लाइफ में कोई बदलाव नहीं आता है। सीरियल में सत्या देवी इन्हीं बातों पर कटाक्ष करती है, अपने दामाद को भी इन बातों को समझाने की कोशिश करती है। जबकि उसका दामाद एक अच्छा इंसान है। लेकिन सत्या देवी का मन नहीं मानता है और वह बेटी की जिंदगी में होने वाली हर बात से कनेक्ट रहने की कोशिश करती है।

सीरियल में वकील का किरदार निभाने के लिए आपने क्या तैयारियां कीं?

धीरज सरना हमारे सीरियल के प्रोड्यूसर, राइटर हैं। उन्होंने सत्या देवी का किरदार बहुत अच्छे से लिखा है। इसके अलावा मेरे दिमाग में फिल्म ‘ऐतराज’ में करीना का निभाया लॉयर का रोल भी था। मैंने इससे भी इंस्प्रेशन ली, अपने किरदार को निभाने के लिए।

आज भी दर्शक आपको सीरियल ‘दीया और बाती हम’ की भाभो के तौर पर पहचानते हैं, क्या आप इस इमेज से बाहर नहीं निकलना चाहती हैं?

हां, सीरियल ‘दीया और बाती हम’ में मेरा किरदार भाभो आज भी दर्शकों को याद है। जब भी लोग मिलते हैं, इसी नाम से पुकारते हैं। यह एक खुशी देने वाला अहसास है। अच्छा लगता है कि मुझे दर्शक किरदार की वजह से जानते हैं।

आप अपने अब तक के करियर से कितनी संतुष्ट हैं?

मैं खुश हूं, अपने करियर और जिंदगी से भी। मेरा एक सीरियल खत्म होने को होता है तो दूसरा ऑफर हो जाता है। एक कलाकार को इससे ज्यादा क्या चाहिए।

आप राजस्थानी फिल्में भी करती थीं, क्या टीवी के बाद उन्हें अलविदा कह दिया?

मैंने फिल्म और टीवी दोनों मीडियम में काम किया है। लेकिन टीवी सीरियल में जब हम काम करते हैं तो दूसरे काम के लिए वक्त मिल नहीं पाता है। इस वजह से मुझे भी रीजनल फिल्में करने का वक्त नहीं मिला।

हां, जल्द ही एक फिल्म करूंगी। इन दिनों मेरे पति (अरविंद) अपना होम प्रोडक्शन संभाल रहे हैं। वह ‘शेर ऑफ राजस्थान’ नाम से एक फिल्म बना रहे हैं।

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