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Interview: ''मंटो'' के जरिए नंदिता दास ने मोदी सरकार पर साधा निधाना

फिल्म ''मंटो'' बड़े पर्दे पर जल्द ही रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के जरिए नंदिता दास काफी समय बाद डायरेक्शन के फील्ड में कदम रख रही हैं। ''मंटो'' में नवाजुद्दीन सिद्दीकी, ऋषि कपूर आदि कलाकार लीड रोल में हैं।

Interview:
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1. सादत हसन मंटो एक सुलझे हुए व्यक्ति थे। मंटो की लिखावट समाज का आईना थी। तो नंदिता दास आज समाज में चल रहे उन सामाजिक मुद्दों पर क्या कहना चाहेंगी?

'मंटो' एक जरिया है दूसरों तक अपनी बात पहुंचाने का। जो भी आज देश या विदेश में चल रहा है। जाति, धर्म और राष्ट्रवाद के आधार पर बांटा जा रहा है। तो फिल्म में उन सभी कहानियों को दर्शाया गया है।

दूसरा, आप पत्रकार हैं और हम आर्टिस्ट हैं। आज हममें एक डर का माहौल हो गया है। ये बोलेंगे तो ऐसा हो जाएगा। यहां तक की हम पर भी सेंसरशिप लगा दी गई है। मंटो के साथ भी ऐसा ही हुआ था। उन्होंने अपनी कहानियों के जरिए लोगों को समाज में व्याप्त मुद्दों के बारे में बताया। वो खुद भी कहते थे कि सादत हसन मर जाए लेकिन मंटो जिंदा रहे।

2. क्या आपको लगता है कि फिल्म 'मंटो' से समाज में कोई परिवर्तन आएगा?

देखिए, हम समाज में परिवर्तन लाने के लिए फिल्में नहीं बनाते हैं। हां, ये जरूर है कि हम एक सच दिखाने की कोशिश करते हैं। जिसे लोग देखे और कोई फैसला लें। ये भी है कि हम जो भी देखते और सुनते हैं उसका धीरे-धीरे हम पर असर होता है। वह बातें हमारे जेहन में धीरे-धीरे ही अंदर तक जाती हैं। फिर हमें एहसास होता है कि क्या सही है और क्या गलत।

3. बॉलीवुड में ऐसे कौन से कलाकार हैं जो मंटो का किरदार अच्छे से निभा सकें?

मुझे लगता है कि मंटो के किरदार को मेरे अलावा कोई और नहीं कर सकता था।

4. सादत हसन मंटो एक कॉन्ट्रोवर्सियल लेखक थे। अपनी लेखनी के कारण ही वह जेल गए और उन्हें कोर्ट में भी हाजिर होना पड़ा। क्या फिल्म मंटो में उनकी उन विवादित कहानियों का भी जिक्र किया जाएगा?

ऐसा नहीं है, अगर सादत हसन मंटो के जीवन पर फिल्म बनी है तो मूवी में उनकी उन विवादित कहानियों का भी जिक्र किया गया होगा। मेरे लिए ये जरूरी है कि मंटो की उन कहानियों की लोगों को झलक दिखाई जाए।

यदि हम किसी म्यूजिशियन पर फिल्म बनाएंगे, ऐसा को नहीं कि हम उनके गानों को ही न सुनाए। मंटो ने भारत-पाक विभाजन, सेक्स वर्कर्स आदि पर काम किया, उन पर कहानी लिखी। वह जो उन्होंने लिखा मुझे लगता है कि वह मंटो के चाहने वालों और लोगों को भी पसंद आएगी।

5. क्या आपको नहीं लगता कि बॉलीवुड में अब जितनी भी फिल्में बन रही हैं वो सभी किसी न किसी की जीवनी पर ही बन रही हैं। चाहें वह क्रिकेट की हो या फिर किसी भी लेखक की, जैसे मंटो?

में तो वैसे भी कम ही फिल्में देखती हूं लेकिन फिर भी मैं कहना चाहूंगी मैं अपना आप में ऑनेस्ट थी कि ये एक मंटो की बायोपिक है। यह एक ऐसी भी बायोपिक भी नहीं है जो यह बताती हो कि कैसे एक इंसान ने अपना एक लेखनी का सफर तय किया है।

यह सिर्फ एक लेखक की जर्नी है।आज भी ऐसे कई राइटर हैं, जो छिपे हुए हैं। वो अलग बात है कि मीडिया उन पर बात नहीं कर रहा है। कुछ जेल में बैठे हैं, कुछ को मार दिया गया है, कईयों को हम चुप कराते रहते हैं। वह सभी आज भी हमारे लिए लोकतंत्र और आजादी को बनाए रखे हैं।

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