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जानें कहां गुम है नदिया के पार की 'गूंजा', अब दिखती हैं ऐसी

फिल्म 'नदिया के पार' एक ऐसी फिल्म है जिसका जादू आज भी बरकरार है। 1 जनवरी 1982 को रिलीज हुई इस फिल्म ने सफलता के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। फिल्म में चंदन और गुंजा की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था। फिल्म 'नदिया के पार' की चुलबुली और हसमुख 'गुंजा' यानी साधना सिंह इस फिल्म से काफी पॉपुलर हो गई थीं।

जानें कहां गुम है नदिया के पार की

फिल्म 'नदिया के पार' एक ऐसी फिल्म है जिसका जादू आज भी बरकरार है। 1 जनवरी 1982 को रिलीज हुई इस फिल्म ने सफलता के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। फिल्म में सचिन और साधना सिंह (गुंजा) की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था। फिल्म 'नदिया के पार' की चुलबुली और हसमुख 'गुंजा' यानी साधना सिंह इस फिल्म से काफी पॉपुलर हो गई थीं।

एक छोटे से गांव के साधारण परिवार की कहानी पर बेस्ड इस फिल्म के दृश्य बेशक साधारण लगते हो लेकिन लोगों के दिलों में इस फिल्म ने गहरी जगह बनाई थी। इस फिल्म की हीरोइन साधना सिंह ने कभी सपने में भी नही सोचा था कि इस फिल्म से उन्हें ऐसी सफलता और पहचान मिलेगी जो एक इतिहास रच देगी।

साधना सिंह अपनी बहन के साथ एक फिल्म की शूटिंग देखने के लिए गई थी। इस फिल्म की शूटिंग उसी गाँव में हो रही थी जंहा साधना सिंह अपने परिवार के साथ रहती थी। उसी दौरान डायरेक्टर सूरज बड़जात्या की नजर साधना सिंह पर पड़ी और उनकी मासूमियत देख सूरज ने साधना को फिल्म 'नदिया के पार' की हीरोइन चुन लिया। साधना सिंह खुद भी कानपुर के एक छोटे से गांव नोनहा नरसिंह की रहने वाली हैं।

'नदिया के पार' फिल्म की शूटिंग जौनपुर एक गांव में हुई थी। कई दिनों तक फिल्म की पूरी टीम इस गाँव में रही थी, शूटिंग के दौरान गाँव वालों और फिल्म टीम के बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन गया था। बलिया और चोबेपुर नाम के 2 गाँव के सीन को एक ही गाँव के अलग-अलग हिस्सों में फिल्माया गया था। फिल्म के कई सीन में गाँव के ही लोगों को कास्ट किया जाता था क्यूंकि फिल्म के लिए सुपोर्टिंग एक्टर लाना इतना आसान नही था।

कहा जाता है कि जब इस फिल्म की शूटिंग खत्म हुई थी तो उस गांव के लोग रोने लगे थे। गांव में शूटिंग के दौरान गुंजा और गांव वालों के बीच एक आत्मीय रिश्ता बन गया था। फिल्म के डायरेक्टर से लेकर आम लोग तक सब साधना को गूंजा कहकर ही पुकारते थे।

साधना सिंह का जादू ऐसा था कि उस वक्त लोग अपनी बेटियों का नाम भी गूंजा रखने लगे थे। साधना सिंह ने फिल्म 'नदिया के पार' के बाद 'पिया मिलन', 'ससुराल', 'फलक', 'पापी संसार' 'तुलसी' जैसी कुछ फिल्मों में काम किया और फिर भोजपुरी फिल्म प्रोडूसर राजकुमार शाहाबादी से शादी कर ली और फिल्मों को अलविदा कह दिया।

साधना सिंह वाराणसी से ताल्लुक रखती हैं और सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं वे अक्सर गंगा किनारे की तस्वीरों को अपने फैन्स के साथ शेयर करती रहती हैं। साधना सिंह अब फिल्मों से दूर घर संभाल रही हैं। फिल्में को छोड़ देने के सवाल पर साधना सिंह ने बताया था कि जिस तरह के रोल वो करना चाहती थी वैसे रोल उन्हें मिल नही रहे थे इसलिए उन्होंने फिल्मों को छोड़ घर बसा लेने का निर्णय लिया था।

इसे 'नदिया के पार' फिल्म का जादू कह लीजिए कि अपनी ही फिल्म की थीम को सूरज बढ़जात्या ने दोबारा लेकर एक और सुपरहिट फिल्म 'हम आपके हैं कौन' का निर्माण किया था। हम आपके हैं कौन भी नदिया के पार की तरह ही ब्लॉकबस्टर हिट साबित हुई थी। गूंजा और चंदन की तरह ही 'हम आपके हैं कौन' की 'प्रेम और निशा' की जोड़ी आज भी याद की जाती है।

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