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सपनों को साकार करने की उड़ान है ''गर्ल्स आॅन टॉप'': एमटीवी

एमटीवी के नए सीरियल ‘गर्ल्स आॅन टॉप’ तीन यंग गर्ल्स की कहानी है।

सपनों को साकार करने की उड़ान है
एमटीवी के नए सीरियल ‘गर्ल्स आॅन टॉप’ तीन ऐसी यंग गर्ल्स की कहानी है, जो अलग-अलग शहरों से मुंबई अपने सपनों को साकार करने आती हैं। वहां उन्हें किस तरह के चैलेंजेज एक्सेप्ट करने पड़ते हैं? कैसे वे अपने सपनों को साकार करने की उड़ान भरती हैं, यही इसमें दिखाया जा रहा है। इस सीरियल और सोसाइटी में गर्ल्स की कंडीशन से जुड़े सवालों पर अपने विचार रंगारंग से साझा कर रही हैं, सीरियल की तीनों लीड एक्ट्रेसेस आयशा अदलखा,बरखा सिंह और सलोनी चोपड़ा।
समय झिझकने का नहीं, सपने सच करने का है: आयशा अदलखा
आयशा अदलखा सीरियल ‘गर्ल्स आॅन टॉप’ में डीजे रेवती का रोल प्ले कर रही हैं। रियल लाइफ में भी आयशा को म्यूजिक से बहुत प्यार है। वह बताती हैं, ‘म्यूजिक से मैं प्यार नहीं करती, वो मेरे वजूद का हिस्सा है।’ सीरियल में रेवती देहरादून से डीजे बनने का सपना लेकर मुंबई आती है। इन दिनों तमाम दूसरे छोटे-शहरों से लड़कियां मुंबई, दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में आ रही हैं। लेकिन बड़े शहरों में कई प्रकार के चैलेंजेज का उन्हें सामना करना पड़ता है। टफ कॉम्पिटीशन को फेस करना पड़ता है। तो ऐसी लड़कियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए कि वे सभी चैलेंजेज को फेस करते हुए अपने सपनों को साकार कर सकें? इस सवाल पर आयशा थोड़ा ठहरकर कहती हैं, ‘मुझे लगता है सबसे पहले लड़कियों को अपना गोल डिसाइड कर लेना चाहिए। उसको अचीव करने को लेकर पूरी तरह कॉन्फिडेंट होना चाहिए। कितना भी टफ कॉम्पिटीशन हो, हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।’
यह सच है कि लड़कियों को जब भी मौका मिलता है, वे अपनी मेहनत और टैलेंट से शानदार सफलता हासिल कर लेती हैं। लेकिन अभी भी सोसाइटी की सोच पूरी तरह उनके लिए ओपन नहीं हुई है। इस सोच को बदलने के लिए किस तरह के प्रयास होने चाहिए? इस पर आयशा कहती हैं, ‘सोसाइटी की सोच लगातार बदल रही है, आगे और बदलेगी। आज से दस-पंद्रह साल पहले की तुलना में बेशुमार लड़कियों/महिलाओं ने कई क्षेत्रों में शानदार मुकाम बनाया है। सरकार, कानून हमारे साथ है। मैं तो कहूंगी हर लड़की को झिझकना नहीं चाहिए, यह समय है कि अपने टैलेंट को पहचानें और कुछ कर दिखाएं।’
सीरियल में रेवती शादी पर बिलीव नहीं करती लेकिन (सोल-मेट्स) दो जिस्म एक जान पर यकीन करती है। क्या आयशा की सोच भी यही है? ‘नहीं,’ वह तपाक से जवाब देती हैं, ‘मुझे शादी और इसकी पूरी रस्म बहुत अच्छी लगती है। मुझे मैरिज पर पूरा भरोसा है। बल्कि सोल-मेट्स मुझे नहीं लगता कि होते हैं। हां, लव कपल या मैरिड कपल अगर एक-दूसरे की रेस्पेक्ट करें, भरोसा करें, हर बात शेयर करें, खूब प्यार करें तो जरूर सोल-मेट्स की तरह रह सकते हैं।’
महिलाएं अगर ठान लें तो हो सकता है बड़ा परिवर्तन: बरखा सिंह
बरखा सिंह सीरियल में जिया का कैरेक्टर निभा रही हैं। जिया पेज-थ्री जर्नलिस्ट है, जो कोलकाता से मुंबई पहुंची है। जर्नलिस्ट का रोल पाकर बरखा बहुत खुश हैं। उत्साहित होकर वह बताती हैं, ‘मैं बहुत लकी हूं कि ऐसा बढ़िया रोल मुझे मिला। ये बहुत हार्ड वर्किंग प्रोफेशन होता है। इस रोल को निभाते हुए मेरे मन में जर्नलिस्ट के लिए रेस्पेक्ट और बढ़ गई है।’
यह सीरियल भारतीय समाज में महिलाओं/लड़कियों को लेकर मौजूद ट्रेडिशनल/स्टीरियोटाइप सोच पर सवाल उठाता है। उन मुद्दों पर भी बात करता है, जो महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकते हैं। आज की हाईटेक सोसाइटी में वास्तव में वो कौन-सी वजहें हैं, जो महिलाओं को आगे बढ़ने की राह में सबसे बड़ी बाधा बनती हैं? इस पर बरखा तुरंत कहती हैं, ‘सोसाइटी की थिंकिंग/मेंटेलिटी। यह भी क्लीयर कर देना चाहती हूं कि महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने में केवल पुरुषों की ही नहीं बहुत-सी महिलाओं की भी सोच जिम्मेदार है। पुरुष अगर ऐसे बोलें या सोचें कि लड़कियों को ये नहीं करना चाहिए, वहां नहीं जाना चाहिए तो एक बार समझ में आता है लेकिन छोटे इलाकों में बहुत-सी महिलाएं ही अपनी बेटियों पर तमाम बंधन लगाती हैं। जब तक यह मेंटेलिटी नहीं बदलेगी, तब तक कंडीशन पूरी तरह नहीं सुधरेगी। अगर समाज की आधी आबादी (सभी महिलाएं) ही ठान लें तो भी बड़ा परिवर्तन आ सकता है। महात्मा गांधी की शिक्षाओं को हमें याद रखना होगा। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को आगे बढ़ाने, शिक्षित करने से ही देश-समाज आगे बढ़ेगा शिक्षित होगा।’ ऐसे में यह भी सवाल उठता है कि वो कौन-से प्रयास हो सकते हैं, जो सोसाइटी की इस ट्रेडिशनल सोच को चेंज करने में बड़ी भूमिका निभाएं? इस पर बरखा का जवाब होता है, ‘एजूकेशन से तो यह पॉसिबल है ही। इसके अलावा टीवी जैसे घर-घर में मौजूद मीडियम में ऐसे सीरियल्स आने चाहिए, फिल्में बननी चाहिए, इससे लोगों की सोच बहुत प्रभावित होती है।’ सीरियल में जिया अपनी लव लाइफ, पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को मैनेज कर अपने ड्रीम की ओर बढ़ती है। इनमें बैलेंस कैसे किया जा सकता है? इस पर बरखा कहती हैं, ‘एक सिंसियरिटी, डिसीप्लिन के जरिए सब मैनेज हो सकता है। प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को अलग रखना हमें जरूर आना चाहिए।’
चाह लें तो क्या नहीं कर सकतीं लड़कियां: सलोनी चोपड़ा
सलोनी चोपड़ा ‘गर्ल्स आॅन टॉप’ में टीवी प्रोड्यूसर ईशा का रोल निभा रही हैं। ईशा अपने काम से भरपूर प्यार करती है। वह सबकी हेल्प के लिए तैयार रहती है। सलोनी रियल लाइफ में ईशा से अपने आपको काफी रिलेट करती हैं लेकिन कुछ मामलों में बिल्कुल अपोजिट भी हैं। वो कौन-से प्वाइंट्स हैं, पूछने पर वह हंसकर बताती हैं, ‘मुझे गुस्सा बहुत जल्द आ जाता है। मुझे किचेन वर्क बिल्कुल नहीं आता है।’
सीरियल में ईशा प्यार के मामले में बहुत कच्ची है। सबका बहुत ख्याल रखती है लेकिन अपने प्यार को नहीं संभाल पाती। तीन साल में उसके सत्तराह बार बे्रकअप हो चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है अपने रिलेशंस को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए सबसे जरूरी वे क्या मानती हैं? पूछने पर सलोनी का जवाब होता है, ‘मुझे लगता है कि अगर जिससे आप प्यार करते हैं, उससे लगातार कम्युनिकेट करते रहेंगे तो ब्रेकअप नहीं होंगे। लगातार बातचीत से कोई गलतफहमी नहीं पनपती। एक बात यह भी है कि किसी वजह से अगर मन-मुटाव हो गया है तो भी अगर हम उस बंदे से जुड़े हैं तो इसका मतलब है कि हमें उससे प्यार है, हम उसके साथ रहना चाहते हैं। तो समझदारी से रिलेशंस को स्ट्रॉन्ग बनाना चाहिए।’
सलोनी का ज्यादातर समय तो विदेश में बीता। लेकिन इंडिया आकर उन्हें महसूस हुआ कि यहां अभी लड़कियों को अपने सपनों को साकार करने में ज्यादा चैलेंजेज का सामना करना पड़ता है। वो कौन-से तरीके हो सकते हैं, जिनसे वे अपनी बाधाओं को हराकर ड्रीम्स को साकार कर सकती हैं? इस पर सलोनी साफ कहती हैं, ‘मेरा तो मानना है कि लड़कियां अगर चाह लें तो क्या नहीं कर सकती हैं? पहले तो उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि वो लड़की हैं तो किसी तरह से कमजोर हैं। वे सब कर सकती हैं, उन्हें भी सब प्रॉब्लम्स को फेस करना चाहिए। यह सीरियल यही मैसेज देता है कि लड़कियों में जबरदस्त मल्टीटास्कर की पावर होती है। वे लड़कों की तुलना में ज्यादा बेहतर ढंग से कई काम को एक साथ अंजाम दे सकती हैं। वे अपने फ्रेंड्स-रिलेटिव्स का ख्याल भी रख सकती हैं।’
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