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मिलन टॉकीज रिव्यू : दमदार अभिनेताओं और डायलॉग से सजी है फिल्म लेकिन असर छोड़ पाने में नाकामयाब

साहब बीवी गैंगस्टर सीरीज में दो जबरदस्त फिल्म और बुलेट राजा जैसी रिवेंज ड्रामा के लिए महशूर तिग्मांशु धूलिया इस बार मिलन टॉकीज लेकर आए हैं। कैसी है फिल्म देखिये फिल्म की पूरी रिपोर्ट

मिलन टॉकीज रिव्यू : दमदार अभिनेताओं और डायलॉग से सजी है फिल्म लेकिन असर छोड़ पाने में नाकामयाब
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ऐसा लग रहा है कि तिग्मांशु धूलिया का जादू कमजोर हो गया है। साहब बीवी गैंगस्टर सीरीज में दो जबरदस्त फिल्म और बुलेट राजा जैसी रिवेंज ड्रामा के लिए महशूर तिग्मांशु धूलिया इस बार मिलन टॉकीज लेकर आए हैं। तिग्मांशु की पिछली फिल्म साहब बीवी गैंगस्टर 3 फ्लॉप थी। वीकेंड पर करने के लिए कुछ और काम है, तो बेहतर होगा आप अपने काम पूरे करें, बजाय इस फिल्म को देखने।

कहानी

अनू (अली फजल) नाम का एक लड़का बड़ा फिल्म निर्देशक बनने का सपना देखता है, पर उसकी जाती जिंदगी में तमाम तरह के संघर्ष हैं। वो छोटी-मोटी फिल्में बनाकर अपना गुजारा कर रहा है। इसी के साथ वह कुछ दोस्तों के साथ एक रैकेट भी चला रहा है। ये रैकेट परीक्षा में नकल करवाने का काम करता है। जनार्दन (आशुतोष राणा) को अपनी बेटी मैथली (श्रद्धा श्रीनाथ) को बीए की परीक्षा में पास करवाना है। इस काम के लिए जनार्दन, अनू की मदद लेता है। यहीं से अनू मैथली के संपर्क में आता है और दोनों की प्रेम कहानी परवान चढ़ती है और कहानी में ट्विस्ट शुरू होता है।

अभिनय

बड़े पर्दे पर अपना पदार्पण कर रहीं श्रद्धा श्रीनाथ ने जरूर कुछ हद तक प्रभावित किया है। फिल्म में उन्होंने डांस भी किया, इंटेंस सीन्स भी दिए और ड्रामा भी काफी किया है। दिक्कत यह हुई कि उनके किरदार में गहराई ही नहीं है। ठहराव की भी कमी लगती है। स्क्रीन पर उनकी केमिस्ट्री अली के साथ जचीं है, लेकिन कहानी की वजह से दोनों के पास दर्शकों को बांध कर रखने के लिए कुछ भी नहीं है।

आशुतोष राणा की काबिलियत को देखते हुए लगता है मिलन टॉकीज उनके लिए नहीं थी। उनका किरदार बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं लगा। फिल्म में संजय मिश्रा का भी छोटा रोल है. लेकिन वो भी कुछ ख़ास नजर नहीं आते। इस रोमांटिक कहानी में एक विलेन भी है। सिकंदर खेर ने यह किरदार निभाया है, लेकिन स्क्रीन पर वो बेअसर नजर आए हैं। वैसे इस फिल्म में अगर किसी को देखकर चेहरे पर मुस्कान आती है तो वो हैं तिग्मांशु धूलिया। तिग्मांशु ने फिल्म में एक्टिंग भी की है। उन्होंने अनू के पिता का किरदार निभाया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग और पंचेस सटीक हैं। फिल्म में बाकी कलाकारों का किरदार ज्यादा डेवलप नहीं है।

निर्देशन

तिग्मांशु धूलिया ने मिलन टॉकीज के साथ एक शुद्ध देसी रोमांटिक फिल्म बनाने की कोशिश की है, लेकिन इसे देखकर कहा जा सकता है वो इसमें बुरी तरह फेल हुए हैं। ये फिल्म आज के दर्शकों को हजम हो ही नहीं सकती। तिग्मांशु ने इस बात पर तो जोर दिया कि अनू, मैथली से प्यार करता है, लेकिन पूरी फिल्म में ये नहीं बताया की मैथली के पिता उनके रिश्ते को स्वीकार क्यों नहीं करते हैं। ये पहलू आखिर तक खटकता है। फिल्म की लेंथ भी समझ से परे है। क्लाइमेक्स भी निराशाजनक है और तमाम चीजें पहले से ही पता चल जाती हैं।

म्यूजिक

मिलन टॉकीज के गाने भी याद किए जाने लायक नहीं हैं। पूरी फिल्म में बस सोनू निगम का 'शर्त' गाना ही थोड़ा सुकून देता है। बैकग्राउंड स्कोर भी बहुत औसत है और किसी भी सीन को ज्यादा प्रभावी नहीं बनाता। रोमांटिक फिल्में देखने का शौक है तो मिलन टॉकीज देखने से परहेज करें। तिग्मांशु इस फिल्म के जरिए बॉक्स ऑफिस पर कोई उम्मीद नहीं कर सकते।

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