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रफी के अनसुने किस्से: नेहरू जी ने इस कारण रात में अपने घर बुलाया था मोहम्मद रफी को

अपनी सुरीली और मधुर आवाज से लोगों को अपना दीवाना बनाने वाले सिंगर मोहम्मद रफी की आज बर्थ एनिवर्सरी है। सिंगर मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था।

रफी के अनसुने किस्से: नेहरू जी ने इस कारण रात में अपने घर बुलाया था मोहम्मद रफी को
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अपनी सुरीली और मधुर आवाज से लोगों को अपना दीवाना बनाने वाले सिंगर मोहम्मद रफी की आज बर्थ एनिवर्सरी है। हर कोई मोहम्मद रफी की गायकी का दीवाना है। अपनी गायकी से उन्होंने लोगों के दिलों में अपने लिए अलग जगह बनाई है।

सिंगर मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। उनका निकनेम फेकू था। मोहम्मद रफी ने मात्र 13 साल की उम्र में ही स्टेज परफॉर्मेंस देनी शुरु कर दी थी।

मोहम्म्द रफी ने इसी के बाद अपनी सिंगिग की जर्नी शुरु कर दी। वह कई लाइव परफॉर्मेंस देते रहे और इसी के बाद उन्होंने 1945 में बॉलीवुड में काम करना शुरु कर दिया। मोहम्मद रफी ने 1945 में आई फिल्म गांव की छोरी से बॉलीवुड में डेब्यू किया।

साल 1945 में आई फिल्म गांव की छोरी के लिए मोहम्मद रफी ने पहला गाना गाया था। इसी के बाद उन्होंने बॉलीवुड में गाना गाते-गाते अपने पैर जमाने भी शुरु कर दिए। 1944 में मोहम्म्द रफी ने जीनत बेगम के साथ सिंगिंग में डेब्यू किया था।

1848 में महात्मा गांधी के निधन के बाद मोहम्मद रफी ने उन्हें ट्रिब्यूट देने के लिए सॉन्ग 'सुनो सुनो ऐ दुनियावालों, बापू जी की अमर कहानी' गाया। इस गाने को दोबारा सुनने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने अपने घर बुलाया था।

अपने सिंगिंग करियर में मोहम्मद रफी ने 4 हजार के करीब गाने गाए हैं। मोहम्मद रफी 112 भाषाओं के ज्ञानी थे। हिंदी के अलावा मोहम्मद रफी ने असमी, पंजाबी, मराठी, स्पैनिश, डच, तेलुगू, मैथिली आदि भाषाओं में गाने गाकर अपनी सेवाएं दी हैं।

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