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‘मेरी आवाज ही पहचान है’, लता मंगेशकर और आशा भोसले की कहानी नहीं: दीप्ति नवल

दीप्ति म्यूजिक बैकग्राउंड पर आधारित एंड टीवी के सीरियल ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ में नजर आएंगी

‘मेरी आवाज ही पहचान है’, लता मंगेशकर और आशा भोसले की कहानी नहीं: दीप्ति नवल

मुंबई. दीप्ति नवल पर्दे पर बहुत कम नजर आती हैं, लेकिन जब भी आती हैं तो खूब चर्चा पाती हैं, क्योंकि उनके किरदार बहुत अलग तरह के होते हैं, जो दर्शक खूब पसंद आते हैं। जल्द ही दीप्ति म्यूजिक बैकग्राउंड पर आधारित एंड टीवी के सीरियल ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ में नजर आएंगी। इस सीरियल के बारे में यही कहा जा रहा है कि यह लता मंगेशकर और आशा भोसले की लाइफ से इंस्पायर है। इस सीरियल और रोल से जुड़ी बातचीत दीप्ति नवल से।

लंबे समय के बाद आपने अभिनय की तरफ रुख किया, इस बार बड़े पर्दे की बजाय छोटा पर्दे को ही क्यों चुना?

सालों पहले मैंने ‘सौदा’, ‘मुकम्मल’ और ‘तनाव’ जैसे कुछ टीवी सीरियल्स में एक्टिंग की थी। फिर मैंने ‘मुक्ति-बंधन’ नाम का एक टीवी सीरियल भी किया, जो कुछ समय पहले कलर्स चैनल पर टेलिकास्ट हुआ था। अब काफी गैप के बाद यह सीरियल ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ कर रही हूं। इस सीरियल में अपने रोल को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं। यह सीरियल म्यूजिक पर बेस्ड है, एक प्यारे परिवार की, खासकर दो बहनों की प्यार, दोस्ती और दुश्मनी की कहानी है। इस सीरियल को करने की एक वजह यह भी है कि संगीत से मुझे गहरा लगाव है।

सुना है आपका नया सीरियल ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ लता मंगेशकर और आशा भोसले की जिंदगी पर बेस्ड है?

सीरियल में दो अहम महिला किरदार हैं, कल्याणी और केतकी। कल्याणी गायकवाड़ का ओल्ड एज का किरदार मैंने निभाया है, अमृता राव यंग एज की कल्याणी बनी हैं। सीरियल की कहानी कुछ ऐसी है कि राजाराम गायकवाड़ एक छोटे से गांव में रहने वाले सामान्य इंसान हैं, जिनकी पत्नी देविका (पल्लवी जोशी) भी संगीत का शौक रखती हैं, इनकी दो बेटियां हैं, कल्याणी और केतकी। केतकी का कैरेक्टर ओल्ड एज में जरीना वहाब निभा रही हैं और यंग एज में अदिति वासुदेव निभा रही हैं। यह कहानी दो बहनों के आपसी प्यार-रिश्ते की। जहां तक बात लता जी और आशा जी की जिंदगी से इंस्पायर होने की है, तो मेरी राय में ऐसा बिलकुल नहीं है। लोगों को तो हर म्यूजिकल शो में लता और आशा जी की सिबलिंग राइवलरी ही नजर आती है।

क्या आपको लता मंगेशकर जी जैसा किरदार निभाने के लिए कोई खास तैयारी करनी पड़ी?

सीरियल में लता मंगेशकर और आशा भोसले के जीवन से जुड़ी कुछ बातें नजर आ सकती हैं, लेकिन यह उनकी जिंदगी पर बेस्ड नहीं है। मुझे इसके लिए कोई तैयारी नहीं करनी पड़ी। इस शो के लेखक ने कमाल की कहानी लिखी है, होमवर्क करने की जरूरत नहीं पड़ी।

अब टीवी सीरियल्स करना पहले की तरह आसान नहीं रहा। 12 घंटे से 14 घंटे एक्टर लगातार सेट पर काम करते हैं, क्या आप इस तरह के वर्किंग स्टाइल में एडजस्ट कर पाएंगी?

मैं अपने काम में परफेक्शनिस्ट हूं। दूसरों की तरफ से भी कम से कम गलतियां हों, ऐसी मुझे उम्मीद होती है। मैं कोशिश करती हूं, अपना काम ढंग से, अनुशासन से और वक्त पर करूं। देखें, आगे क्या होता है! उम्मीद है, जितना संभव हो शूटिंग आराम से होगी।

जिंदगी के इस पड़ाव पर आकर आपको किसी बात का अफसोस है?

मुझे शुरू से ही संगीत में दिलचस्पी रही है। मैंने म्यूजिक सीखा भी है। लेकिन मैं गा नहीं पाई हूं। प्रोफेशनल तरीके से म्यूजिक एक्सप्लोर नहीं कर पाई, इस बात का अफसोस है।

आपकी एक कविता की किताब भी आने वाली थी, उसके बारे में बताएं?

मेरी किताब ‘रिवर एंड आई (नदी और मैं)’ पिछले साल पब्लिश होने वाली थी, लेकिन जो देरी हुई, वह मेरी तरफ से है। पब्लिशर्स की तरफ से मेरे पास जो कॉपी आई, मैंने उनमें कुछ सुझाव दिए, लेकिन अब उन्हें फाइनल करना है, इस काम के लिए वक्त नहीं मिल पा रहा है।

आप कोई नई फिल्म कर रही हैं?

एक फिल्म साइन करने जा रही हूं। अभी डिटेल्स नहीं बता सकती हूं। बहुत जल्द बता दूंगी।

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