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सरताज मानते हैं कॉन्फिडेंट-पॉजिटिव बंदा ही किंग ऑफ लाइफ होता है

सरताज गिल ने कैसे ‘बेगुसराय’ का ऑफर एक्सेप्ट कर लिया?

सरताज मानते हैं कॉन्फिडेंट-पॉजिटिव बंदा ही किंग ऑफ लाइफ होता है
दिल्ली. सरताज गिल एक नॉर्मल पंजाबी फैमिली से ताल्लुक रखते हैं, जिसका ग्लैमर वर्ल्ड से कोई नाता नहीं है। लेकिन वह शुरू से ही फिल्म एक्टर बनना चाहते थे, इसीलिए मुंबई आने पर एक्टिंग कोर्स ज्वाइन किया। कई एड फिल्मों के साथ दो तमिल और एक हिंदी फिल्म भी की। इन दिनों वह टीवी सीरियल ‘बेगुसराय’ में नजर आ रहे हैं। शुरू से ही फिल्म स्टार बनने की ख्वाहिश रखने वाले सरताज ने कैसे ‘बेगुसराय’ का ऑफर एक्सेप्ट कर लिया? सीरियल और पर्सनल लाइफ से जुड़ी और भी बातें सरताज गिल से।
आप तो फिल्म स्टार बनना चाहते थे, हिंदी और तमिल फिल्में भी कीं फिर टीवी वर्ल्ड में कैसे आना हुआ?
यह सच है कि मैं फिल्मों में ही काम करना चाहता हूं। एड फिल्मों के बाद एक हिंदी और दो साउथ इंडियन फिल्में भी कीं। इस बीच टीवी शोज के लगातार ऑफर मिल रहे थे, लेकिन ज्यादातर में रोल्स सास-बहू टाइप फैमिली ड्रामा के ही थे। फिर ‘बेगुसराय’ का ऑफर आया। इसका कॉन्सेप्ट काफी अलग लगा। प्रियम सिंह के किरदार में काफी कुछ करने का स्कोप दिखा। मेल ऑरिएंटेड शो है, जिसमें ठाकुर फैमिली में ‘पावर’ पाने और उसे बचाए रखने का संघर्ष है, तो लगा कि इसमें काम किया जा सकता है।
हमारी सोसायटी में भी लोगों में पावर पाने की होड़ क्यों रहती है? अपने रुतबे को बचाए रखने के लिए लोग दूसरों की जान तक ले लेते हैं। इसके पीछे क्या वजह मानते हैं आप?
मुझे लगता है रुतबा पाने की भूख और सोसेबाजी की मुख्य वजह, अशिक्षा और नासमझी है। जो लोग पढ़े-लिखे नहीं होते, वे पैसा-पावर-जमीन को इंसान से ज्यादा अहमियत देते हैं। हालांकि बहुत से पढ़े-लिखे लोग भी पावर के लिए पागल हो जाते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी सोच हमारी सोसायटी, आसपास के माहौल और परिवार की सोच पर निर्भर करती है। ऐसे लोगों की सोच बहुत छोटी होती है। उनके पास लाइफ की रियालिटी को देखने-समझने का लार्जर व्यू नहीं होता है। तभी वे इंसान और रिश्तों से बढ़कर पैसा-पावर को महत्व देते हैं।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, पूरा इंटरव्यू -
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