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मेरी बहन के साथ जो हुआ मैं नहीं चाहता वह मेरी बेटी के साथ हो : मनोज जोशी

मनोज जोशी फिल्म, टीवी के जाने-माने कलाकार हैं। सीरियस हो या कॉमिक कैरेक्टर, सभी के जरिए दर्शकों का दिल जीत लेते हैं। इन दिनों वह सिरियल मंगलम् दंगलम् में नजर आ रहे हैं। हाल ही में मनोज जोशी से सिरियल से जुड़ी लंबी बातचीत हुई।

मेरी बहन के साथ जो हुआ मैं नहीं चाहता वह मेरी बेटी के साथ हो : मनोज जोशी

मनोज जोशी फिल्म, टीवी के जाने-माने कलाकार हैं। सीरियस हो या कॉमिक कैरेक्टर, सभी के जरिए दर्शकों का दिल जीत लेते हैं। इन दिनों वह सब टीवी के कॉमिक सीरियल ‘मंगलम् दंगलम्’ में एक पिता की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जो अपनी बेटी के लिए बहुत प्रोटेक्टिव है। साथ ही जिस लड़के से बेटी को प्यार है, उसे आसानी से एक्सेप्ट करने को तैयार नहीं है। मनोज जोशी का किरदार, अपने होने वाले दामाद की बार-बार परीक्षा ही लेता रहता है। इस तरह सीरियल में ससुर-दामाद की अनोखी नोक-झोंक देखने को मिलती है। हाल ही में मनोज जोशी से सीरियल ‘मंगलम् दंगलम्’ से जुड़ी लंबी बातचीत टेलीफोन पर हुई। पेश है, बातचीत के चुनिंदा अंश-

अब तक टीवी पर सास-बहू के बीच तकरार वाले सीरियल आते थे, आपके सीरियल ‘मंगलम् दंगलम्’ में ससुर- दामाद के बीच की नोक-झोंक की कहानी है, आप इस कॉन्सेप्ट को कैसे देखते हैं?

हमारे सीरियल में हर तरह के इमोशन हैं। इसमें ससुर-दामाद की नोक-झोंक ही कहानी का बेस है और ह्यूमर इसका सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट है। लेकिन इसमें फैमिली वैल्यूज की बात भी है, अपनों के प्यार की अहमियत को भी बताया गया है। मेरी नजर में हमारा सीरियल ‘मंगलम् दंगलम्’ एक कंप्लीट एंटरटेनमेंट पैकेज है। यह सीरियल अपने अलग-अलग इमोशन से दर्शकों के दिलों को छू रहा है।

आपने कहा कि सीरियल में कई तरह के इमोशन हैं, आपके किरदार में किस तरह के इमोशन ज्यादा हैं?

सीरियल में मेरे किरदार का नाम संजीव सकलेचा है, जो शादी का साजो-सामान बेचता है। उसकी काफी बड़ी दुकान है। संजीव अपनी बेटी को बहुत प्यार करता है। वह पसंद नहीं करता है कि कोई बेकार किस्म का लड़का उसकी बेटी के आस-पास भी रहे। हर पिता की तरह मेरा किरदार भी अपनी बेटी को सुरक्षित देखना चाहता है। एक पिता की तरह संजीव कभी सख्त होता है तो कभी नरम दिल हो जाता है। इस किरदार के इमोशंस से दर्शक आसानी से कनेक्ट करेंगे, क्योंकि संजीव जैसी सोच अपने बच्चों को लेकर ज्यादातर भारतीय पिताओं की होती है।

आप संजीव सकलेचा के साथ कितना रिलेट करते हैं?

हम दोनों में ज्यादा समानताएं नहीं हैं लेकिन मैं भी संजीव की तरह अपने बच्चों के लिए बहुत प्रोटेक्टिव रहता हूं। आज भी जब रात मंख बच्चे 10 बजे के बाद घर आते हैं तो मैं उससे पहले कई बार उन्हें कॉल करता हूं। मैं उन पर भरोसा करता हूं लेकिन मुझे उनकी फिक्र रहती है। ऐसा सभी माता-पिता के साथ है।

आखिर संजीव अपने बेटी की पसंद, उसके प्यार को एक्सेप्ट क्यों नहीं करता है, जबकि वह हमेशा बेटी की खुशी चाहता है?

हां, मेरा किरदार अपनी बेटी की खुशी चाहता है। लेकिन बेटी की पसंद के लड़के को एक्सेप्ट न करने की बड़ी वजह उसके पास है। दरअसल, अतीत में उसकी बहन के साथ एक घटना घटी थी, वह नहीं चाहता है कि उसकी बेटी के साथ भी वैसा ही कुछ हो। ऐसे में वह होने वाले दामाद को पहले हर तरह से परखना चाहता है, पिता होने के नाते देखना चाहता है कि वह लड़का बेटी के लिए ठीक है या नहीं। धीरे-धीरे संजीव सकलेचा और उसके होने वाले जमाई के बीच का रिश्ता बिल्ली-चूहे का खेल बन जाता है, जिसे देखकर दर्शकों के चेहरे पर हंसी आती है।

आप फिल्मों में कॉमेडी काफी कर चुके हैं लेकिन टीवी पर पहली बार कॉमिक रोल में नजर आए है, कितना फर्क पाते हैं, दोनों जगह कॉमेडी में?

हां, मैंने अलग-अलग विषय के कई सारे सीरियल्स किए हैं। लेकिन मैंने टेलीविजन पर कॉमिक रोल नहीं किए हैं, खासतौर से इतने सारे इमोशन वाला कैरेक्टर तो बिल्कुल नहीं किया। मुझे लगता है कि टेलीविजन ने ही मुझे एक परिपक्व अभिनेता बनाया है। कॉमेडी में फर्क वाली बात नहीं है, फिल्म हो या टीवी हमारा मकसद तो दर्शकों को हंसाना ही होता है।

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