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Interview: मरियम ने पत्रकारिता क्षेत्र सहित अपने को-एक्टर परम को लेकर कही ऐसी बात, एक बार जरूर पढ़े

महिमा मकवाना ने अपने करियर की शुरुआत सीरियल ‘बालिका वधु’ से चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर की थी। इसके बाद वह कई सीरियल्स का हिस्सा बनीं।

Interview: मरियम ने पत्रकारिता क्षेत्र सहित अपने को-एक्टर परम को लेकर कही ऐसी बात, एक बार जरूर पढ़े

महिमा मकवाना ने अपने करियर की शुरुआत सीरियल ‘बालिका वधु’ से चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर की थी। इसके बाद वह कई सीरियल्स का हिस्सा बनीं। लेकिन ‘सपने सुहाने लड़कपन के’ में महिमा को लीड कैरेक्टर निभाने का मौका मिला, इससे ऑडियंस के बीच उनको पहचान भी मिली।

आजकल वह सीरियल ‘मरियम खान रिपोर्टिंग लाइव’ में मरियम का लीड रोल कर रही हैं। हाल ही में महिमा मकवाना से टेलीफोन पर सीरियल और करियर को लेकर लंबी बातचीत हुई। पेश है, बातचीत के चुनिंदा अंश-

सीरियल ‘मरियम खान रिपोर्टिंग लाइव’ में आप लीप के बाद मरियम का कैरेक्टर निभा रही हैं। बचपन में मरियम अपने पापा की तरह जर्नलिस्ट बनना चाहती थी, लेकिन अब भी वह अपने सपने से दूर है। ऐसा क्यों?

हां, मरियम बचपन से ही जर्नलिस्ट बनने का सपना देखा करती थी, क्योंकि उसके अब्बू ऑनेस्ट जर्नलिस्ट थे। जब वह बड़ी हुई तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि अपने उसूलों की वजह से ही अब्बू जिंदगी में पीछे रह गए, परिवार से दूर हो गए। इस बात का जिम्मेदार मरियम जर्नलिज्म के प्रोफेशन को मानती है। अब वह जर्नलिज्म को पसंद नहीं करती है। लेकिन उसकी नियति उसे इस राह पर लेकर जा रही है। आगे क्या होता है, मरियम का सपना पूरा होता या अधूरा रह जाता है, यह आगे सीरियल देखने पर ही पता चलेगा।

सीरियल में मरियम, बचपन में परिवार से बिछड़ गई थी। बड़ी होकर वापस लौटी तो उसने अपनी आइडेंटिटी सबसे छिपाई, इसके पीछे मरियम का क्या मोटिव है, इसके बारे में कुछ बताएं?

मरियम अपने अब्बू को ढूंढ़ने के लिए जान-बूझकर अपनी पहचान छुपाती है। ऐसा करना उसके लिए भी बहुत मुश्किल है, लेकिन मरियम को अपने अब्बू को ढूंढ़ना है। वह जानना चाहती है कि आखिर उसके अब्बू उससे क्यों दूर हुए? मरियम को पहले अपने अब्बू तक पहुंचना है, उनको फैमिली में वापस लाना है। अभी तो यही उसका मकसद है।

मरियम से आप असल जिंदगी में कितना रिलेट करती हैं?

मैं मरियम से काफी हद तक रिलेट कर पाती हूं। मुझे उसकी सबसे अच्छी बात यही लगती है कि वह मुश्किल से मुश्किल सिचुएशन में भी हार नहीं मानती। इस बात से मुझे भी मोटिवेशन मिलता है, क्योंकि जिंदगी में मुश्किलें आती रहती हैं, हमें उनसे हार नहीं माननी चाहिए। इसके अलावा मरियम अपने लाइफ गोल्स को लेकर भी क्लीयर है। वह एक बार में एक ही काम पर फोकस कर उसे अचीव करती है। मैं भी जब कोई काम करती हूं, किसी प्रोजेक्ट से जुड़ती हूं तो उसमें अपना हंड्रेड पर्सेंट देती हूं।

मरियम को जर्नलिस्ट बनना था, यह एक ऐसा प्रोफेशन है, जो सोसायटी को चेंज करने की ताकत रखता है। क्या आपको लगता है कि सिनेमा और टीवी के जरिए सोसायटी में चेंज लाया जा सकता है?

हां बिल्कुल, चेंज लाया जा सकता है। फिल्में और सीरियल भी सोसायटी को मैसेज देते हैं। टीवी और फिल्मों के कॉन्सेप्ट भी सोसायटी से ही इंस्पायर होते हैं। टीवी पर जब-तब ऐसे सीरियल भी बनते हैं, जिनमें सोशल मैसेज होता है।

आपने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट करियर की शुरुआत की, अपनी जर्नी को किस तरह देखती हैं?

मेरा पहला सीरियल ‘बालिका वधु’ था। मुझे टीवी इंडस्ट्री में नौ साल हो गए हैं। मैंने अभी तक अपनी जर्नी को कोई टर्म नहीं दिया। जिस तरह से मुझे काम मिलता आ रहा है, उसे देखकर खुद को लकी मानती हूं। मेरी कोशिश यही रहती है कि ज्यादा से ज्यादा अच्छा काम करूं और अपनी एक्टिंग को इंप्रूव करूं।

सीरियल में आपके को-एक्टर परम सिंह हैं, उनके साथ वर्किंग एक्सपीरियंस कैसे रहे?

परम बहुत अच्छा इंसान है। साथ ही काफी बेहतरीन एक्टर भी है। हम अकसर सींस डिस्कस करते हैं। एक-दूसरे से सीखते हैं। मैं तो यही कहूंगी परम अभी तक का मेरा बेस्ट को-एक्टर है।

आगे किस तरह का काम करने की ख्वाहिश रखती हैं?

मुझे जो काम अच्छा लगेगा, चैलेंजिंग लगेगा वह करूंगी। वैसे अभी तक कोई नेगेटिव रोल नहीं किया है, अगर कोई नेगेटिव रोल जो चैलेंजिंग हो तो जरूर करना चाहूंगी।

सीरियल में मरियम की इंस्प्रेशन उसके अब्बू हैं। रियल लाइफ में महिमा की इंस्प्रेशन कौन है?

‘मां मेरी इंस्प्रेशन हैं। मैं आज जो भी हूं, वह मां की वजह से हूं। वह भी एक्टिंग करने की ख्वाहिश रखती थीं लेकिन इस फील्ड में आ नहीं पाईं। फिर मां ने मुझे यह रास्ता दिखाया। मेरी जर्नी में मां का ही सपोर्ट रहा है। मां को मुझ पर बहुत प्राउड फील होता है।’

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