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इमरजेंसी के दौरान लच्छू महाराज ने ऐसे प्रकट किया अपना विरोध, इस कारण पद्म श्री लेने से किया इंकार

आज भारत के मशहूर तबला वादक लच्छू महाराज की 74वीं जयंती है। इसी कारण आज गूगल ने भी उनका डूडल बनाकर उनके याद किया। लच्छू महाराज का जन्म 16 अक्टूबर 1944 को वाराणसी में हुआ था।

इमरजेंसी के दौरान लच्छू महाराज ने ऐसे प्रकट किया अपना विरोध, इस कारण पद्म श्री लेने से किया इंकार

आज भारत के मशहूर तबला वादक लच्छू महाराज की 74वीं जयंती है। इसी कारण आज गूगल ने भी उनका डूडल बनाकर उनके याद किया। लच्छू महाराज का जन्म 16 अक्टूबर 1944 को वाराणसी में हुआ था।

लच्छू महाराज ने बचपन से ही तबला बजाना शुरु कर दिया था। मात्र 8 साल की उम्र में ही उन्होंने अपनी पहली स्टेज परफॉरेमेंस दी थी। लच्छू महाराज के तबले की धुन के सभी उम्र के लोग दीवाने थे।

एक वक्त था जब भारत में 1975 के दौरान आपातकाल लागू हुआ था तो तब उन्होंने जेल में तबला बजाकर सरकार के लिए अपना विरोध प्रकट किया था। इमरजेंसी के दौरान कई लोगों को जेल भेज दिया गया था।

इस कारण उन्होंने कई अवॉर्ड्स को लेने से मना कर दिया था। बता दें कि उन्होंने देश का प्रतिष्ठित पुरस्कार 'पद्म श्री' लेने से मना कर दिया था। उनका मानना था कि मेरे लिए लोगों की तालियां ही सम्मान है।

लच्छू महाराज एक अच्छा तबला वादक के साथ-साथ वह एक कोरियोग्राफर भी रह चुके हैं। बता दें कि उन्होंने बॉलीवुड की कई फिल्मों में कोरियोग्राफीकी है। जैसे 'महल', 'छोटी छोटी बातें', 'पाकीजा' आदि।

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