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जिंदगी को मसालेदार खिचड़ी जैसा होना चाहिए: वंदना पाठक

इन दिनों वंदना पाठक सीरियल ‘खिचड़ी’ के नए सीजन में जयश्री के किरदार में नजर आ रही हैं। पहले सीजन के मुकाबले इस बार उनके किरदार में क्या कोई नयापन है? वह सीरियल ‘खिचड़ी’ को किन मायनों में अलग पाती हैं?

जिंदगी को मसालेदार खिचड़ी जैसा होना चाहिए: वंदना पाठक

एक बार फिर से स्टार प्लस पर कॉमिक सीरियल ‘खिचड़ी’ दर्शकों को गुदगुदा रहा है। इस बार भी सीरियल में वही किरदार और कलाकार नजर आ रहे हैं, जो पहले वाले सीरियल ‘खिचड़ी’ में नजर आए थे। सीरियल में पारेख परिवार के सदस्य बाबू जी, हंसा, प्रफुल्ल, हिमांशु और जयश्री के किरदार अपनी अजब-गजब हरकतों से हंसाते हैं। सीरियल में जयश्री का किरदार एक्ट्रेस वंदना पाठक निभा रही हैं। वह अपने श्वसुर यानी बाबूजी को बहुत परेशान करती है, लेकिन उनकी इज्जत भी बहुत करती है। सीरियल ‘खिचड़ी’ से जुड़ी बातचीत, वंदना पाठक से...

एक बार फिर सीरियल ‘खिचड़ी’ दर्शकों को हंसा रहा है। इस बार आपको कैसे रेस्पॉन्स मिल रहे हैं?

अरे, मैं आपको बता नहीं सकती हूं। सीरियल ‘खिचड़ी’ शुरू होने के बाद से मुझे बधाई देने के लिए ढेरों लोगों के फोन आए हैं। इतने सालों बाद भी ‘खिचड़ी’ को दर्शक इतना प्यार दे रहे हैं, यह देखकर मैं खुश भी हूं और हैरान भी।

इस बार आपके किरदार में क्या कोई बदलाव है?

हां, इस बार जयश्री पहले से ज्यादा बातूनी और समझदार हो गई है। इसके अलावा यह किरदार ज्यादा नहीं बदला है। पहले की तरह ही जयश्री अपने श्वसुर यानी बाबू जी को बहुत परेशान करती है। उनसे बहस करती रहती है। इन बातों के बावजूद जयश्री बाबू जी की बहुत रेस्पेक्ट करती है।

बतौर कलाकार आपको ‘खिचड़ी’ सीरियल में सबसे खास बात क्या नजर आती है?

‘खिचड़ी’ की सबसे बड़ी खासियत है कि इसकी कॉमेडी अपने आप में बहुत अनोखी है, बहुत ही साफ-सुथरी है। हर किरदार का अपना अलग अंदाज है। यह ऐसा सीरियल है, जिसे फैमिली मेंबर्स एक साथ बैठकर देख सकते हैं। ‘खिचड़ी’ के किरदारों का भोलापन दर्शकों को बहुत पसंद आता है। यही बात बतौर कलाकार मुझे भी पसंद है।

सालों बाद जब सीरियल ‘खिचड़ी’ के सेट पर वापसी की तो कैसा लगा?

ऐसा लगा जैसे अपने घर वापस लौट आई हूं। दरअसल, जब इस सीरियल की शूटिंग शुरू हुई तो मैं कहीं और शूटिंग कर रही थी। कुछ दिनों के बाद मैं सेट पर पहुंची, तो सब लोग ऐसे मिले जैसे अपने परिवार के किसी सदस्य से मिल रहे हों। खासतौर पर राजीव भाई जो हमेशा शांत रहते हैं, जब उन्होंने मेरा वेलकम किया तो मेरी आंखों में आंसू आ गए। इतने प्यारे लोगों के साथ दोबारा काम करके बहुत खुशी मिल रही है।

आपको क्या लगता है ‘खिचड़ी’ में जिस तरह के किरदार हैं, वैसे असल जिंदगी में होते हैं?

हां, होते हैं। मैंने अपने आस-पास कई ऐसे लोग देखे हैं, जो हंसा और प्रफुल्ल की तरह भोले-भाले होते हैं। माना ऐसे लोग बहुत कम होते हैं। ये दिल के साफ होते हैं, किसी का बुरा नहीं चाहते हैं।

सीरियल में आप अपने श्वसुर जी को बहुत परेशान करती हैं। असल जिंदगी में अपने श्वसुर जी के साथ कैसा रिश्ता है?

जयश्री तो अपने श्वसुर जी को कुछ भी भला-बुरा कह देती है, कुछ ज्यादा ही परेशान कर देती है। लेकिन असल जिंदगी में मैं अपने श्वसुर जी के सामने ज्यादा बात नहीं करती हूं। हां, हमारे बीच रिश्ता बहुत अच्छा है। श्वसुर जी मुझे बहुत पसंद करते हैं। मंह भी उनकी बहुत रेस्पेक्ट करती हूं। मेरा पूरा परिवार मुझे बहुत सपोर्ट करता है। मेरे पति और बेटा-बेटी भी मेरे सीरियल को खूब पसंद करते हैं।

आपके पिता अरविंद वैद्य गुजराती थिएटर के जाने-माने कलाकार हैं। पति नीरज पाठक लेखक और निर्देशक हैं। ऐसे में क्या आपके दोनों बच्चे भी एक्टिंग फील्ड में आएंगे?

इस बारे में अभी से कुछ कहना मुश्किल है, क्योंकि मेरा बेटा और मेरी बेटी पढ़ाई कर रहे हैं। अगर उनको एक्टिंग में दिलचस्पी होगी तो वो जरूर एक्टिंग करेंगे।

जिंदगी को मसालेदार खिचड़ी जैसा होना चाहिए

वंदना पाठक के सीरियल का नाम ‘खिचड़ी’ है। वह जितना एंज्वॉय इस सीरियल में एक्ट करते हुए करती हैं, क्या उतना ही खिचड़ी डिश को भी पसंद करती हैं? वंदना कहती हैं, ‘मुझे मसालेदार खिचड़ी सबसे ज्यादा पसंद है, इसमें हम सब कुछ डाल सकते हैं, जैसे सब्जियां और मसाले। जिस तरह खिचड़ी में अगर मसाला ना हो तो वो मजेदार नहीं होती है। उसी तरह अगर जिंदगी में भी अलग-अलग रंग न हों तो जिंदगी फीकी लगती है। यही वजह है, मेरा मानना है कि जिंदगी को मसालेदार खिचड़ी जैसा होना चाहिए।

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