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कभी चार-चार महीनों तक थिएटर में लगती थी करूणानिधि की फिल्में, ''पराशक्ति'' को लेकर घिरे थे विवादों में

राजनीति की दुनिया में भीष्म पितामह कहने जाने वाले एम. करूणानिधि का लंबी पारी के बाद निधन हो गया। बीती शाम को एम.करूणानिधि ने चेन्नई के कावेरी अस्पताल में आखिरी सांस ली। करूणानिधि ने राजनीति के साथ-साथ फिल्मी दुनिया में भी अपने हुक्म का इक्का आजमाया।

कभी चार-चार महीनों तक थिएटर में लगती थी करूणानिधि की फिल्में,

राजनीति की दुनिया में भीष्म पितामह कहने जाने वाले एम. करूणानिधि का लंबी पारी के बाद निधन हो गया। बीती शाम को एम.करूणानिधि ने चेन्नई के कावेरी अस्पताल में आखिरी सांस ली।

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करूणानिधि ने राजनीति के साथ-साथ फिल्मी दुनिया में भी अपने हुक्म का इक्का आजमाया। जिसकी बदौलत उन्हें दोनों की क्षेत्रों में अच्छी खासी सफलता मिली। एम. करूणानिधि ने अपने करियर की शुरुआत तमिल सिनेमा से की।

उन्होंने तमिल सिनेमा को काफी सुपरस्टार दिए जैसे शिवाजी गणेश, एस एस राजेंद्रन। करूणानिधि का तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे.जयललिता के करीबी रहे एमजीआर से गहरी दोस्ती थी।

1952 में तमिल सिनेमा में एक बड़ा टर्निंग प्वॉइंट आया जब फिल्म पराशक्ति रिलीज हुई। पराशक्ति काफी विवादों में रही थी। इस फिल्म में पेरियार आदि द्रविड़ क्रांतिकारियों की विचारधाराओं के दिखाया गया।

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करूणानिधि ने फिल्म 'राजकुमारी' से तमिल सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद से ही करूणानिधि ने तमिल सिनेमा को कई सुपरहिट फिल्में दी। जल्द ही करूणानिधि ने फिल्मी दुनिया को छोड़ राजनिति की दुनिया में कदम रख दिया।

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