Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

कारगिल विजय दिवस 2018: जानिए LOC Kargil के शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की लव-स्टोरी, अभिषेक बच्चन ने किया था किरदार

26 जुलाई 2018 को पूरा देश 19वां कारगिल विजय दिवस मनाएगा। साल 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा ने भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

कारगिल विजय दिवस 2018: जानिए LOC Kargil के शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की लव-स्टोरी, अभिषेक बच्चन ने किया था किरदार
X

26 जुलाई 2018 को पूरा देश 19वां कारगिल विजय दिवस मनाएगा। साल 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा ने भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

इसे भी पढ़ेः Kargil Vijay Diwas 2018: जानिए क्यों हुआ था कारगिल युद्ध

इसी युद्ध पर आधारित है फिल्म 'एलओसी कारगिल' जिसमें अभिषेक बच्चन ने शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाया था। इस फिल्म में ईशा देओल उनकी मंगेतर बनी थी।

कैप्टन विक्रम बत्रा की प्रेम कहानी

कारगिल युद्ध की वीरगाथा उनको याद किए बिना अधूरी है। कहा जाता है कि शहीद विक्रम बत्रा जल्द ही घर वापस आकर डिंपल चीमा नाम की लड़की से शादी करने वाले थे लेकिन घर में उनका पार्थिव शरीर आया। इसी बीच उनकी मंगेतर ने जिंदगी भर शादी ना करने का फैसला किया।

सेना के लिए ठुकराई कई नौकरियां

शहीद विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 को हुआ था। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन साइंस से की थी। इसी बीच उन्होंने सीडीएस की तैयारी शुरु की। बता दें कि हांगकांग में भारी वेतन में उनको नौकरी मिल रही थी लेकिन उन्होंने देश की सेवा के लिए नौकरी को छोड़ दिया।

इसे भी पढ़ेः Kargil Diwas 2018 : इस कमांडो ने बनाई थी पाक के खिलाफ सीक्रेट प्लानिंग, जनरल भी रह गए थे हैरान

इसके बाद उनको सेना की 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद की नौकरी मिली। जीत के बाद विक्रम बत्रा ने चोटी से 'यह दिल मांगे मोर' कहा जिससे यह नारा पूरे भारत देश में लोकप्रिय हुआ। उनको 'शेर शाह' उपनाम से भी नवाजा गया।

बता दें कि कैप्टन नवीन को बचाने के लिए विक्रम बत्रा शहीद हो गए। दुश्मनों ने उनकी छाती पर गोली मार दी और 7 जुलाई 1999 को वह शहीद हो गए। शहीद विक्रम बत्रा को मरणोपरांत 1999 में देश के सबसे बड़ा वीरता सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया।

कब तक चला युद्ध

भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल में 60 दिनों तक युद्ध चला और भारतीय सेना ने जाबांज साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तान को धूल चटाई। इस युद्ध में 500 से ज्यादा सैनिकों ने अपनी जान कुर्बान कर दी और कई सैनिक घायल हुए।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top