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Karan Kapadia Interview : सनी देओल और डिंपल कपाड़िया के बारे में जानिए करण कपाड़िया से

करण कपाड़िया फिल्म ‘ब्लैंक’ से बॉलीवुड में कदम रख रहे हैं। फिल्मी बैकग्राउंड से होने की वजह से उनका इंट्रेस्ट बहुत पहले से ही एक्टिंग की तरफ हो गया था। लेकिन करियर की शुरुआत करण कपाड़िया ने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर की, इसके बाद एक्टर के तौर पर फिल्म ‘ब्लैंक’ साइन की। इस फिल्म की कहानी, अपने रोल और पर्सनल लाइफ के बारे में बता रहे हैं, करण कपाड़िया।

Karan Kapadia Interview : सनी देओल और डिंपल कपाड़िया के बारे में जानिए करण कपाड़िया से

शिवाली त्रिपाठी : अपने दौर की फेमस एक्ट्रेस डिंपल कपाड़िया के भतीजे, ट्विंकल खन्ना के मौसेरे भाई और अक्षय कुमार के साले करण कपाड़िया फिल्म 'ब्लैंक' से बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं। इस फिल्म में वह सनी देओल के साथ स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। इस बात को लेकर करण काफी खुश हैं। पहली ही फिल्म में वह एक आतंकवादी के रोल में हैं, यही वजह है कि वह अपने कैरेक्टर को काफी चैलेंजिंग मानते हैं। करण कपाड़िया से बातचीत।

आपको एक्टर बनने का ख्याल कब आया?

एक्टिंग को करियर बनाने की इंस्प्रेशन मुझे अपने फैमिली मेंबर्स को देखकर ही मिली। जब मैं 14 साल का था, तब मैंने पहली बार अपनी कजिन ट्विंकल खन्ना और अपनी मौसी डिंपल से कहा था कि मुझे भी फिल्मों में एक्टिंग करनी है। जबकि स्कूल के दिनों में मेरे अंदर कभी किसी नाटक में हिस्सा लेने का साहस नहीं हुआ, फिर सत्रह साल की उम्र मैं मैंने फिल्म 'बॉस' में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। इसके बाद मैंने शॉर्ट फिल्में बनानी शुरू कीं। साथ ही मैंने मुंबई में ही 'जेफ गोल्डबर्ग स्टूडियो' से एक्टिंग की ट्रेनिंग भी ली।

फिल्म 'ब्लैंक' कैसे मिली?

फिल्म के निर्देशक बेहजाद खंबाटा और सह लेखक प्रणव आदर्श से मेरी पहली मुलाकात अक्षय कुमार की फिल्म 'बॉस' की शूटिंग के दौरान हुई थी, जिसमें मैं भी असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहा था। तब से हम लोग संपर्क में बने हुए थे। एक दिन बेहजाद खंबाटा ने मुझे फिल्म 'ब्लैंक' की कहानी सुनाई, मुझे यह बहुत पसंद आई। इससे पहले वह मेरी शॉर्ट फिल्म 'क्रिसेंडो' देख चुके थे, जिसे कान्स फिल्म फेस्टिवल में खूब सराहा गया था।

आपकी डेब्यू फिल्म की कहानी और आपका किरदार क्या है?

यह आतंकवाद पर एक्शन से भरपूर मिस्ट्री फिल्म है। फिल्म में इस बात को दिखाया गया है कि आतंकवाद का कोई चेहरा नहीं है, उसका धर्म सिर्फ पैसा है। इसको डॉ. श्रीकांत भासी, निशांत पिट्टी और टोनी डिसूजा ने प्रोड्यूस किया है। बेहजाद खंबाटा डायरेक्टेड इस फिल्म में मेरे को-एक्टर सनी देओल, करणवीर शर्मा, इशिता दत्ता और रशिका प्रधान हैं।

जबकि अक्षय कुमार ने इसमें कैमियो किया है। जहां तक मेरे किरदार की बात है तो मैंने इसमें हनीफ नाम के 26 साल के आत्मघाती हमलावर का किरदार निभाया है, जो भूलने की बीमारी से पीड़ित है। कार से टकराने के बाद वह अपने मिशन को भूल जाता है, यहां तक कि वह यह भी भूल चुका होता है कि उसके सीने पर टाइम बम चिपका हुआ है। इस फिल्म में सनी देओल ने इंटेलीजेस ब्यूरो के ऑफिसर का रोल किया है।

फिल्म 'ब्लैंक' के किरदार की तैयारी के लिए आपने क्या किया?

मैंने यह फिल्म 2016 में साइन की थी। तब से मैं लगभग हर दिन प्रणव और बेहजाद खंबाटा के साथ बैठकर इस किरदार को लेकर डिस्कशन करता था। इसी से मुझे अपने किरदार को गढ़ने में मदद मिली।

सनी देओल के साथ वर्किंग एक्सपीरियंस कैसे रहे?

सनी देओल को तो मैं बचपन से जानता हूं। मेरी मम्मी सिंपल कपाड़िया पंद्रह सालों तक उनकी कॉस्ट्यूम डिजाइनर थीं। यहां तक बीमार होते हुए भी मेरी मां ने सनी देओल प्रोडक्शंस की फिल्म 'चमकू' के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग में मदद की थी। फिल्म 'चमकू' में बॉबी देओल और प्रियंका चोपड़ा ने अभिनय किया था। वह अकसर शूटिंग के दौरान फिल्म के सेट पर मुझे ले जाया करती थीं तो सनी सर से पहली मुलाकात सेट पर ही हुई थी।

मैं उनकी 'इंडियन' और 'जाल' जैसी कई फिल्मों के सेट पर जाता रहा हूं। अब बीस साल बाद मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म 'ब्लैंक' की शूटिंग के दौरान जब कोई सीन मुझसे नहीं हो पाता तो मैं परेशान हो जाता था, तब सनी देओल मुझे शांत कर सीन के बारे में समझाते थे। शूटिंग के दौरान उन्होंने मेरी बहुत मदद की। मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।

जीजा अक्षय कुमार ने एक्टिंग के लिए कितना इंस्पायर किया?

अक्षय कुमार, करण कपाड़िया के जीजा हैं। उन्होंने फिल्म 'ब्लैंक' में कैमियो भी किया है। अपने जीजा जी से उन्होंने क्या सीखा? पूछने पर वह बताते हैं, 'मुझे अपने जीजा अक्षय कुमार की कॉमेडी फिल्में बहुत पसंद हैं। उनकी फिल्म 'हेरा फेरी' देखकर मैं उनका फैन हो गया था। आप यह भी कह सकती हैं कि अक्षय कुमार ने मुझे एक्टिंग करने के लिए इंस्पायर किया। उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है। वह बहुत ही प्लानिंग के साथ काम करते हैं। मैंने पर्सनल, प्रोफेशनल लेवल पर उनकी तरह ही ग्रोथ करना चाहता हूं।

मां के जाने के बाद डिंपल मौसी ने संभाला

जब करण कपाड़िया पंद्रह साल के थे तो उन्होंने अपनी मां को खो दिया। ऐसे में उनकी मौसी डिंपल ने बहुत सपोर्ट दिया। वह बताते हैं, 'मां का जाना, मेरे लिए बहुत बड़ा सदमा था। लेकिन परिवार के दूसरे सदस्यों ने मुझे अकेला महसूस नहीं होने दिया। अपनी मौसी और बहनों के सहयोग के ही चलते आज मैं अपने पैरो पर खड़ा हूं। मैंने अपनी मौसी डिंपल जी में अपनी मां को पाया और तब से मैं उन्हीं के साथ रह रहा हूं। वह मेरी अच्छी दोस्त भी हैं। मैं उनसे किसी भी सब्जेक्ट पर बात कर सकता हूं।'

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