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तो क्या आज कमल हासन एक अभिनेता नहीं वकील होते, जानें लाइफ सीक्रेट्स

करियर के शुरुआती दौर में बॉलीवुड में चंद फिल्में करने के बावजूद भी कमल हासन ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। आज भी ‘एक दूजे के लिए’ और ‘सदमा’ को दर्शक याद करते हैं।

तो क्या आज कमल हासन एक अभिनेता नहीं वकील होते, जानें लाइफ सीक्रेट्स

करियर के शुरुआती दौर में बॉलीवुड में चंद फिल्में करने के बावजूद भी कमल हासन ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। आज भी ‘एक दूजे के लिए’ और ‘सदमा’ को दर्शक याद करते हैं। साउथ में तो कमल हासन सुपर स्टार हैं ही।

वह एक अच्छे अभिनेता ही नहीं, एक उम्दा फिल्म निर्देशक, निर्माता और लेखक भी हैं। अब वह बतौर राजनेता भी राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। जल्द ही उनकी फिल्म ‘विश्वरूपम-2’ रिलीज होने वाली है।

आपकी फिल्म ‘विश्वरूपम’ 2013 में आई थी, दूसरा पार्ट बनने में इतनी देर क्यों हुई?

‘विश्वरूपम’ के समय ही मैंने सीक्वल बनाने की प्लानिंग की थी। एक फिल्म को बनाने में बहुत वक्त, पैसा, एनर्जी इंवेस्ट करनी पड़ती है। मेरी कोशिश होती है, जो बजट प्लान किया गया, उसी में फिल्म बने। फिल्म ‘विश्वरूपम’ का सीक्वल बनाने में शेड्यूल वैसा प्लान नहीं हुआ, जैसा सोचा था। यही वजह है कि थोड़ी देरी हो गई।

फिल्म ‘विश्वरूपम 2’ के ट्रेलर में बहुत ज्यादा एक्शन सींस देखने को मिले। आप कैसे करते हैं, इतने मुश्किल स्टंट्स?

हां, हमारी फिल्म में बहुत मुश्किल स्टंट्स हैं। हमने कई खतरनाक स्टंट्स परफॉर्म किए हैं, बावजूद इसके कोई इंसान या जानवर घायल नहीं हुआ। मैं भी अपने स्टंट्स खुद कर लेता हूं। फिल्म में कुछ स्टंट्स गहरे पानी के अंदर भी हैं।

इस फिल्म में एक अहम किरदार में वहीदा रहमान भी हैं। उनके साथ पहली बार फिल्म करने का अनुभव कैसा रहा?

वहीदा जी साउथ से हैं, वह बॉलीवुड में भी एक अलग पहचान रखती हैं। उनमें अस्सी साल की उम्र में भी बहुत एनर्जी है। उन्होंने शूटिंग के दौरान मुझसे कहा कि मेरे काम करने का ढंग उन्हें गुरुदत्त की याद दिलाता है। गुरुदत्त साहब से तुलना सुनकर मैं बहुत खुश हुआ। वहीदा जी से बहुत कुछ सीखने को मिला।

निर्देशक शेखर कपूर भी आपकी इस फिल्म का हिस्सा हैं, वह आपकी फिल्म करने के लिए कैसे राजी हो गए?

शेखर और मेरी दोस्ती लगभग तीस सालों से है। हमने तय किया हुआ है कि दोनों में से जो भी पहले फिल्म शुरू करेगा, दूसरा उसकी फिल्म में काम करेगा। मैंने फिल्म ‘विश्वरूपम’ शुरू की और शेखर को याद दिलाया कि वो मेरी फिल्म का हिस्सा बनें।

आपकी हर फिल्म के कोई न कोई विवाद जुड़ता है। इस फिल्म को विवादों से बचाने के लिए आपने क्या किया है?

उन विवादों का कोई तुक नहीं था, उनके बारे में क्या सोचा जा सकता है? अगर किसी फिल्म में अल्कोहलिक इंसान दिखाना है तो उसे शराब पीते दिखाना जरूरी बनता है, बस हो गई कंट्रोवर्सी। शराब पीते इंसान को क्यों दिखाया? अरे, भई शराब पीने का संदेश तो नहीं दिया। क्या करें, जितना संभलकर चलो, विवादों से बचा नहीं जा सकता।

अपनी अब तक की जर्नी को कैसे देखते हैं?

बचपन और होश संभालने तक पढ़ाई-लिखाई चलती रही। जब से फिल्मों में अभिनेता, लेखक, निर्माता, निर्देशक के रूप में आगे बढ़ने की कोशिश की, सिर्फ एक आम दर्शक के नजरिए से खुद को ढाला है। अकसर फिल्में मैंने ऑडियंस के साथ बैठकर एंज्वॉय की है।

मैं उनमें से एक हूं, खुद को आइकॉन नहीं मानता हूं। मेरे पिताजी एडवोकेट थे चेन्नई में। अगर गुरु बालचंदर नहीं मिलते तो मैं अभिनेता नहीं, वकील बनता। मेरी जर्नी बहुत अच्छी रही। अगर मैं भारतीय सिनेमा में टिका हूं तो उसका कारण मेरा पैशन, डेडिकेशन है।

अपने अब तक के सफर में आपने क्या खोया, क्या पाया है?

खोया सिर्फ पैसा। फिल्म के असफल होने पर सिर्फ पैसा खोया। बाकी जो पाया है, उसके लिए अहसानमंद हूं, फैंस का, देश की जनता का। जो अवार्ड्स मुझे एक्टिंग के लिए मिलते हैं, उनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

आपकी दोनों बेटियां एक्ट्रेस हैं, लेकिन आपने अब तक उनके साथ कोई फिल्म नहीं की?

श्रुति और अक्षरा दोनों टैलेंटेड हैं। दोनों बेटियों ने खुद के दम पर करियर शुरू किया और अपने लिए जगह बनाई। यह एक पिता के लिए बहुत गर्व की बात है। जहां तक साथ काम करने का सवाल है तो ‘शाबाश नायडू’ नाम की फिल्म में मैं अपनी बेटियों के साथ नजर आऊंगा। इसे टी.के. राजीव कुमार ने निर्देशित किया है, यह फिल्म हिंदी में भी होगी।

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