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जिम्मी शेरगिल ने ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर-3’ के फ्लॉप का बताया कारण, कहा- तिग्मांशु ने....

जिम्मी शेरगिल बॉलीवुड में अब तक सोलो हीरो वाली फिल्मों से ज्यादा मल्टीस्टारर फिल्मों का हिस्सा बने हैं। लेकिन मल्टीस्टारर फिल्मों में उनका किरदार कितना ही छोटा क्यों न हो, वह अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहते हैं।

जिम्मी शेरगिल ने ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर-3’ के फ्लॉप का बताया कारण, कहा- तिग्मांशु ने....

जिम्मी शेरगिल बॉलीवुड में अब तक सोलो हीरो वाली फिल्मों से ज्यादा मल्टीस्टारर फिल्मों का हिस्सा बने हैं। लेकिन मल्टीस्टारर फिल्मों में उनका किरदार कितना ही छोटा क्यों न हो, वह अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहते हैं।

जिम्मी ‘ए वेडनेस डे’, ‘तनु वेड्स मनु’, ‘मुक्काबाज’, ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’, ‘स्पेशल छब्बीस’ जैसी कई सफल फिल्मों का हिस्सा रहे। पिछले दिनों रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर-3’ फ्लॉप रही। आजकल वह अपनी नई फिल्म ‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’ को लेकर चर्चा में हैं।

माना जाता है कि सीक्वल फिल्मों में एक कलाकार के लिए एक्टिंग करना आसान होता है, आप क्या सोचते हैं?

अगर कोई कलाकार पहले किसी किरदार को निभा चुका है तो दोबारा उसे निभाते हुए होमवर्क करने की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। हम कलाकार उस किरदार से वाकिफ रहते हैं। ऐसे किरदार को करने में मजा भी आता है। मुझे मुदस्सर अजीज की फिल्म ‘हैप्पी भाग जाएगी’ और अब इसके सीक्वल ‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’ में बग्गा का किरदार करने में बड़ा मजा आया।

सीक्वल ‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’ पहली वाली फिल्म से कितनी अलग है?

पहली फिल्म जहां खत्म हुई थी, सीक्वल की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है। लेकिन बहुत ही अलग किस्म की भागती हुई कहानी है। मेरा किरदार बग्गा का ही है। पहले वाली फिल्म में बग्गा की जिससे शादी होनी थी, वह भागकर पाकिस्तान पहुंच गई थी, तो तभी से सारा रायता फैला हुआ है।

दूसरी फिल्म में रायता काफी ज्यादा फैला हुआ है। इस बार वह लड़की चीन पहुंच गई है। इतना ही नहीं सीक्वल में मिसटेकेन आइडेंटिटी का भी मसला है। नई फिल्म में एक नहीं दो-दो हैप्पी हो गई हैं।

जब आपकी कोई फिल्म नहीं चलती है, उसको क्रिटिसाइज किया जाता है तो आपको कैसा लगता है?

बहुत तकलीफ होती है। जब हम सारा काम छोड़कर तीन-चार महीने किसी एक फिल्म के लिए ही लगाते हैं, मेहनत करते हैं, फिर जब वह फ्लॉप होती है तो तकलीफ और दुख होता ही है। लेकिन कलाकार के तौर पर हम गम मनाते बैठने की बजाय आगे बढ़ते हैं।

‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ के पहले भाग के लिए मुझे अवार्ड भी मिला था। मैंने तिग्मांशु के साथ कई फिल्में की हैं, इसलिए उन पर मुझे यकीन था कि वह कुछ तो कमाल करेंगे। लेकिन मामला गड़बड़ा गया और फिल्म ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर-3’फ्लॉप हो गई।

कई बार हम कहानी सुनते समय सोचते हैं कि यह कुछ कमजोर फिल्म है, लेकिन तब निर्देशक के काम को देखकर यकीन करना पड़ता है कि वह संभाल लेगा। कई बार कहानी में सीन बड़ा लिखा होता है, जिसे फिल्माते समय छोटा कर दिया जाता है तो कब किस लेवल पर बात बिगड़ जाए, यह कहना मुश्किल होता है।

आप हिंदी के साथ पंजाबी फिल्में भी खूब करते हैं, इसकी क्या वजह है?

ज्यादा नहीं। हर साल एक पंजाबी फिल्म करता हूं। इस साल मई महीने में पंजाबी फिल्म ‘दाना पानी’ रिलीज हुई, जिसने जबरदस्त कमाई की। इस समय मैं तीन पंजाबी फिल्मों पर काम कर रहा हूं। इन दिनों पंजाबी में जमीन से जुड़े कलाकारों, लेखकों और निर्देशकों के लिए बहुत अच्छा समय है। अब दर्शक भी जमीन से जुड़ी कहानियों को सुनना और देखना चाहते हैं।

आपने पंजाबी फिल्में प्रोड्यूस करना शुरू किया था, फिर बनाना बंद क्यों कर दिया?

देखिए, मैंने चार पंजाबी फिल्मों को प्रोड्यूस किया था। जिनमें से सिर्फ दो में एक्टिंग की थी। मैंने महसूस किया कि यह फुल टाइम जॉब है। लेकिन मेरे पास समय कम होता है, क्योंकि एक्टिंग में भी बिजी रहता हूं। आगे जब मेरे पास समय होगा, तो ही फिल्म प्रोड्यूस करूंगा।

आप आगे किस तरह के किरदार निभाना चाहते हैं?

मेरा इंट्रेस्ट हमेशा मल्टीलेयर कैरेक्टर निभाने में रहता है। ऐसा किरदार जिसे निभाना चुनौतीपूर्ण हो। यही वजह है कि मैं कई बार मेन लीड का ऑफर ठुकरा कर छोटा किरदार एक्सेप्ट कर लेता हूं। मुझे लगता है कि मैं छोटे किरदार में कलाकार के तौर पर कुछ ज्यादा रोचक काम कर सकता हूं।

हिंदी फिल्मों में कुछ नया कर रहे हैं?

अजय देवगन के साथ फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ कर रहा हूं।

आजकल कई बड़े स्टार्स वेब सीरीज भी कर रहे हैं, क्या आपका इसमें इंट्रेस्ट है?

कुछ बातचीत चल रही हैं। दो स्क्रिप्ट पढ़ रहा हूं। वेब सीरीज एक नया फॉर्मेट है, जिसे आप रोक नहीं सकते हैं। वक्त के साथ बहुत कुछ बदलाव आएगा। लेकिन सिनेमा देखने का असली मजा थिएटर में ही आता है।

इसलिए लोग सिनेमाघर के अंदर जाना बंद नहीं करेंगे। सिनेमाघर के अंदर परिवार के साथ फिल्म देखने जाने का मतलब कहीं न कहीं सेलिब्रेशन भी होता है।

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