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जिंदगी में जश्न के लिए यारो के साथ टशन जरूरी है:अनिरुद्ध दवे

अनिरुद्ध दवे कॉमेडी सीरियल‘यारो का टशन’ में नजर आ रहे हैं।

जिंदगी में जश्न के लिए यारो के साथ टशन जरूरी है:अनिरुद्ध दवे
मुंबई. अनिरुद्ध दवे सब टीवी पर हाल में शुरू हुए कॉमेडी सीरियल ‘यारो का टशन’ में यारो नाम के रोबो के कैरेक्टर में नजर आ रहे हैं। इस रोबो की कई खूबियां हैं, जो सीरियल में कॉमेडी क्रिएट करती है। जैसे वो कभी झूठ नहीं बोलता है। वो इंसान बनना चाहता है, उसे दोस्ती करने में खूब मजा आता है। दिचचस्प बातचीत अनिरुद्ध दवे से।
अनिरुद्ध दवे देहरादून में जन्मे और राजस्थान में पले-बढ़े हैं। उन्हें बचपन से ही एक्टिंग का शौक था। ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली आ गए। यहां आकर उन्होंने थिएटर शुरू किया। इसके बाद अनिरुद्ध ने मुंबई की ओर रुख किया। सीरियल ‘राजकुमार आर्यन’ से उन्होंने टीवी वर्ल्ड में डेब्यू किया। फिर तो उनकी एक्टिंग की गाड़ी चल निकली। कई बड़े सीरियलों में काम करते हुए उन्होंने बॉलीवुड में भी कदम रखा। हाल ही में वो फिल्म ‘शोरगुल’ में नजर आए थे। अब अनिरुद्ध कॉमेडी सीरियल ‘यारो का टशन’ में लीड रोल में नजर आ रहे हैं। बातचीत अनिरुद्ध दवे से।
इस कॉमेडी सीरियल से आप कैसे जुड़े?
सब टीवी के लिए मैं कॉमेडी सीरियल ‘यम हैं हम’ कर चुका हूं। चैनल ने मुझे फिर से कॉमेडी के लिए अप्रोच किया। स्क्रिप्ट और कैरेक्टर डिफरेंट लगा। इस तरह ‘यारो का टशन’ से जुड़ गया।
आखिर क्या सोचकर आपने यह सीरियल एक्सेप्ट किया?
टीवी मीडियम फीमेल ओरिएंटेड है। ऐसे में आपको कहीं न कहीं कॉमेडी के साथ कुछ परफॉर्मेंस आॅरिएंटेड वर्क करने को मिले, तो उसे गंवाना नहीं चाहिए। ‘यारो का टशन’ में भी मुझे काफी कुछ कर दिखाने का मौका मिला है।
वैसे आपके कैरेक्टर यारो की क्या खूबियां हैं?
खूबी यही है कि यह रोबो है, लेकिन इंसान बनना चाहता है। जब एक रोबो इंसान बनने की कोशिश करेगा तो कैसा दिलचस्प नजारा होगा। वैसे इंसान को अगर बेहतर इंसान बनना है तो उसको भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हर कोई नेक और सच्चा इंसान नहीं हो सकता।
यारो झूठ भी तो नहीं बोलता है?
बिल्कुल। एक्चुअली, वह सत्यवादी बन गया है। अगर किसी को कह दिया जाए कि आपको झूठ नहीं बोलना है तो उसके लिए जीना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन यारो यह काम बखूबी कर रहा है। इसमें ऐसा सॉफ्टवेयर डाला गया है कि वह किसी से झूठ नहीं बोल सकता। इसी के साथ कॉमेडी के सीन क्रिएट होते चले जाते हैं।
आपके कैरेक्टर का नाम यारो ही क्यों रखा गया?
इसका नाम यारो इसलिए रखा गया है, क्योंकि यह यारो का यार है। राकेश बेदी, जो सीरियल में साइंटिस्ट हैं, उन्होंने यारो को क्रिएट किया है। यारो की यह भी खूबी है कि वो दोस्ती करने और दोस्ती निभाने में माहिर है। वो अपने दोस्तों को दिल से चाहता है।
इस सीरियल के जरिए क्या कहने की कोशिश की गई है?
मैसेज यही है कि जिंदगी दोस्तों के बिना अधूरी है। सीरियल में जश्न और टशन वाली बात है। मेरा भी मानना है कि अगर जिंदगी में जश्न चाहिए तो आपको अपने यारों के साथ टशन भी करना होगा।
सीरियल में रोबो की लाइफ जीना कितना आसान या मुश्किल रहा?
रोबो का कैरेक्टर प्ले करना आसान नहीं है। इसकी भी लिमिटेशन होती हैं, अलग बॉडी लैंग्वेज होती है। वह बहुत तेजी से चीजों को करता है। इस तरह मुझे बहुत फास्ट एक्टिंग के लिए भी खुद को तैयार करना पड़ा।
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