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जिंदगी में बनने वाले रिश्तों में कभी कंप्लीटनेस नहीं होती - सोनाली निकम

सोनाली निकम ने कहा सीरियल ‘आधे-अधूरे’ की कहानी भाभी-देवर के रिश्तों पर आधारित है।

जिंदगी में बनने वाले रिश्तों में कभी कंप्लीटनेस नहीं होती - सोनाली निकम
मुंबई. समाज हर रिश्ते को एक दायरे में बांधकर ही देखता है, ऐसे में रिश्ते आधे-अधूरे ही रहेंगे। जिंदगी चैनल पर आ रहे सीरियल ‘आधे-अधूरे’ की कहानी भाभी-देवर के रिश्तों पर आधारित है। दोनों आपस में इतने अटैच हो जाते हैं कि सवाल उठना लाजिमी है। सीरियल में भाभी का लीड रोल निभा रही हैं सोनाली निकम। इस तरह के रिश्ते को लेकर उनका अपना क्या नजरिया है? क्या जिंदगी में बनने वाले रिश्ते कभी कंप्लीट होते हैं? सीरियल से जुड़े और भी कई अहम सवाल सोनाली निकम से।
अभी तक सोनाली निकम ने अपने एक्टिंग करियर में एक-दो सीरियल्स और एक तमिल मूवी की है। उनका पहला सीरियल स्टार प्लस का ‘काली का पुनर्वतार’ था। इसके बाद उन्होंने सोनी चैनल का शो ‘गोदभराई’ भी किया। जल्द ही उनकी एक तमिल मूवी रिलीज होने वाली है। इन दिनों जिंदगी चैनल के सीरियल ‘आधे-अधूरे’ में वह लीड कैरेक्टर प्ले कर रही हैं। बातचीत सोनाली निकम से।
आपने क्या सोचकर सीरियल ‘आधे-अधूरे’ को एक्सेप्ट किया?
बतौर एक्टर मेरे लिए सबसे अहम स्टोरी होती है, इसके बाद कैरेक्टर और डायरेक्टर। ये तीनों ही बातें मैंने सीरियल ‘आधे-अधूरे’ में देखी है। शो की स्टोरी बिल्कुल हटकर है, मेरा कैरेक्टर भी बहुत चैलेंजिंग है। डायरेक्टर अजय सिन्हा भी इंडियन टीवी इंडस्ट्री के एक्सपीरियंस्ड शख्सियत हैं। यही वजह है कि मैंने शो के लिए हामी भरी।
आप इस सीरियल में भाभी के कैरेक्टर में नजर आ रही हैं। आगे इस इमेज में कैद होने का डर नहीं लगा आपको?
मैं इमेज की परवाह नहीं करती। बतौर एक्टर मेरे लिए जरूरी है कि मैं उस कैरेक्टर को पूरी शिद्दत के साथ कैसे निभाऊं। जैसा कि मैं शो में लीडिंग कैरेक्टर प्ले कर रही हूं। इस कैरेक्टर में मेरे करने के लिए बहुत कुछ है। इसमें प्यार है, इमोशन है, नफरत है, तकरार है, क्या नहीं है मेरे कैरेक्टर में।
देवर-भाभी के संबंधों पर बेस्ड यह शो आखिर क्या दिखाना चाहता है?
पूरा सीरियल भाभी जस्सी और देवर वीरेंद्र के आस-पास घूमता है। पहली बात तो यह है कि भाभी इंटेंशनली अपने देवर से रिश्ते नहीं बनाती कि उसे किसी रिलेशनशिप में रहना है। दरअसल, वीरेंद्र एक दोस्त और हमदर्द के रूप में उससे बर्ताव करता है। हालातों के बीच दोनों कब और कैसे अटैच हो जाते हैं, उन्हें भी इस बात का अहसास नहीं होता है। जस्सी को देवर से संबंधों को लेकर कोई अफसोस नहीं है। संबंधों का यह सैलाब कहां और कैसे उफान मारता है, यही स्टोरी में दिखाया गया है। इसमें कुछ भी वल्गर या गलत नहीं दिखाया जा रहा है।
तो क्या आप पर्सनली शो में दिखाए जा रहे देवर-भाभी के रिश्तों को जस्टिफाई करेंगी?
देखिए, यह शो वूमेन आॅरिएंटेड है। अपने कैरेक्टर में मैं एक अच्छी भाभी हूं, अच्छी बहू हूं, अच्छी पत्नी भी हूं, लेकिन अपने देवर वीरेंद्र से बहुत अटैच हूं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। दूसरी बात भाभी को किसी खांचे में भी नहीं बांधना चाहिए। कुछ चीजें उसके ऊपर भी छोड़नी चाहिए। जहां तक ‘आधे-अधूरे’ में जस्सी ने जो किया है, उसको मैं पर्सनली जस्टिफाई तो नहीं करूंगी, लेकिन उसकी आलोचना भी नहीं करना चाहूंगी।
आपकी नजर में सीरियल में कौन सही है और कौन गलत है?
सीरियल में कौन सही है और कौन गलत है, इसका फैसला करना बहुत ही मुश्किल है। आॅडियंस भी सीरियल देखते हुए इस बात को फील कर रही होगी। हम पर्सनल लाइफ में भी कई बार गलत-सही का फैसला नहीं कर पाते हैं। मेरा तो कहना है कि आॅडियंस देवर-भाभी के संबंधों को ध्यान में रखकर सीरियल न देखें। देखना है तो परिवार में लड़की और लड़के के इमोशन को देखा जाए, आपको कुछ भी गलत नजर नहीं आएगा।
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