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Nawazuddin Siddiqui Interview : नवाजुद्दीन सिद्दीकी के खुलासे

फिल्म ‘ठाकरे’ की सफलता के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक नेचुरल-सी लव स्टोरी बेस्ड फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में नजर आएंगे। इस फिल्म में उन्होंने एक फोटोग्राफर का किरदार निभाया है। यह किरदार उनके लिए कितना चैलेंजिग रहा? बॉलीवुड में अपने स्ट्रगल और अब अपने स्टारडम पर उनका क्या कहना है? करियर और अपकमिंग फिल्म ‘फोटोग्राफ’ से जुड़ी खुली बातें नवाजुद्दीन सिद्दीकी से।

Nawazuddin Siddiqui Interview : नवाजुद्दीन सिद्दीकी के खुलासे
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अपने करियर की शुरुआत नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने थिएटर और स्ट्रीट प्ले से की थी। 1999 में आमिर खान की फिल्म ‘सरफरोश’ में उन्होंने एक बहुत छोटा-सा रोल निभाया, इसके बाद नवाज ने दर्जनों फिल्में कीं। उनमें से ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘लंच बॉक्स’, ‘किक’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘माझी-द माउंटेन मैन’, ‘रईस’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को एक खूबसूरत मुकाम पर पहुंचाया। हाल ही में नवाज ने बाला साहेब ठाकरे की लाइफ पर बनी फिल्म ‘ठाकरे’ की, जो हिट रही। बहुत जल्द वह फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में नजर आएंगे। बातचीत नवाजुद्दीन सिद्दीकी से।

फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में आप फोटोग्राफर बने हैं। रील लाइफ में रियल फोटोग्राफर लगने के लिए आपने क्या किया?

फिल्म में मैं गेट वे ऑफ इंडिया पर फोटो क्लिक करने वाले फोटोग्राफर के किरदार में हूं, इसलिए रितेश ने मेरी तैयारी के लिए वहां से फोटोग्राफर्स को बुलवाया। मैं उनसे मिला और उन्हें ऑब्जर्व करने लगा कि वो कैसे फोटो खींचते हैं, कैसे प्रिंट के लिए मशीन में डालते हैं, कौन-सा पोस्चर सजेस्ट करते हैं, फिर किस तरह पन्नी में फोटो डालकर देते हैं। मैंने इन सारी चीजों का बड़ी बारीकी से निरीक्षण किया। मेरे लिए सबसे अहम बात थी, सुबह उनके जैसी एनर्जी लाना और धूप होते-होते मुरझा जाना, क्योंकि सुबह वो पूरे जोश में आते हैं, लेकिन दोपहर तक उनकी हालत पस्त हो जाती है।

फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में अपना किरदार निभाते वक्त आपके सामने सबसे ज्यादा चैलेंजिंग क्या रहा?

अपने किरदार को निभाते वक्त मेरे लिए सबसे ज्यादा चैलेंजिंग यह था कि मुझे एक्टिंग नहीं करनी थी। दरअसल, मेरा किरदार रियल और बहुत ही सिंपल है। इसलिए रितेश हमेशा कहते कि डोंट एक्ट। जिस तरह एक आम इंसान और उसकी आम जिंदगी होती है, बिल्कुल वैसी ही रियालिटी आनी चाहिए। मुझे इतने सालों से एक्शन कहते ही एक्टिंग करने की आदत हो गई है, सो मेरे लिए एक्शन कहने के बाद एक्टिंग के सुर को दबाना बहुत ही मुश्किल रहा।

फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में एक फोटोग्राफर और सीए लड़की के बीच किस तरह का रिलेशन दिखाया गया है?

दोनों के बीच लव स्टोरी तो है लेकिन बॉलीवुड लव स्टोरी नहीं है। दरअसल, हम लोगों को फिल्मों में झूठी लव स्टोरी देखने की आदत हो गई है, जो रियल में बहुत ही कम होती है। असल जिंदगी में कोई लड़का घोड़े पर बैठकर नहीं आता है। इस फिल्म में ऐसा कोई ड्रामा नहीं है, सिंपल-सी लाइफ है। दोनों एक-दूसरे से गेट वे ऑफ इंडिया पर मिलते हैं, फिर रोज मुलाकात होने लगती है। दोनों के बीच बातें चाय-पानी, हवा-मौसम को लेकर होती हैं। कोई बड़े वादे-कसमें नहीं खाता है। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन इजहार नहीं कर पाते। फिल्म एक ऐसे मोड़ पर खत्म होती है कि उसका

अंत कुछ भी हो सकता है, दोनों किसी और से शादी कर सकते हैं या एक-दूसरे से भी, वो क्या करेंगे यह दर्शक तय करें।

इंटरव्यू के दौरान सान्या ने बताया कि वो आपके साथ काम करने को लेकर नर्वस थीं, क्या आपको ऐसा कभी फील हुआ? नहीं, मुझे सान्या ने कभी ऐसा फील तो नहीं होने दिया कि वो मुझे देखकर या मेरे साथ काम करने को लेकर नर्वस हैं। वो एक बहुत ही बेहतरीन एक्ट्रेस और वंडरफुल गर्ल हैं। मैं समझ नहीं पाता हूं कि वो इतनी नेचुरल एक्टिंग कैसे कर लेती हैं? वो काम को लेकर बहुत मैच्योर हैं, जबकि उनकी उम्र में यह बात बहुत कम अभिनेत्रियों में दिखाई देती है।

आपने अपने बीस साल के करियर में कई रोल निभाए लेकिन कभी एक्टिंग में रिपिटिशन नहीं दिखा, क्यों?

दरअसल, मैंने अपनी जिंदगी में बहुत काम और काफी निरीक्षण किए हैं। मैंने थिएटर में दो सौ से भी अधिक किरदार निभाए हैं। मेरे पास कोई काम नहीं था, तब मैंने पूरे दस साल तीन हजार से भी ज्यादा लोगों का सिर्फ निरीक्षण किया है। उन्हें बारीकी से देखा कि वो कैसे बोलते हैं, कैसे बैठते-उठते हैं। मैंने पैदल चलते-चलते पूरी मुंबई की सैर की है। स्ट्रगल के दौरान मैं अमीर-गरीब, सफल-असफल सभी लोगों से मिलता था, उनके किरदार को अपने अंदर छुपाते गया। ऐसे में मैं आगे सौ साल भी अगर काम करता रहा, तभी भी मेरी एक्टिंग में रिपिटिशन नहीं दिखाई देगा। (हंसते हुए) मेरे पास बहुत मसाला है।

आपको इतनी मेहनत के बाद जो स्टारडम मिला है, उसे किस तरह एंज्वॉय कर रहे हैं?

मैं नहीं मानता कि मुझे स्टारडम मिला है, मैं तो बस इतना ही जानता हूं कि पहले मैं स्ट्रगल कर रहा था, अब मैं काम कर रहा हूं। मैंने मजदूरों की तरह काम किया है। जब मैं थिएटर करता था, तब हफ्ते में एक साथ तीन-चार प्ले की तैयारी करता था। एक दिन में बीस-बीस प्ले दोहराए जाते थे, मैं करता भी था। जब स्ट्रीट प्ले करने लगा तब एक दिन में दस शो करता था। फर्क बस इतना है कि अब थिएटर या स्ट्रीट प्ले नहीं बल्कि फिल्मों में अलग-अलग किरदार कर रहा हूं। सो मैं तो यही कहूंगा कि स्टारडम तो नहीं लेकिन अपने काम को मैं बहुत एंज्वॉय कर रहा हूं।

वो फोटोग्राफ आज भी मेरे जेहन में जिंदा है

फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में नवाजुद्दीन सिद्दीकी फोटोग्राफर की भूमिका में हैं, हमने उनसे पूछा कि उनकी जिंदगी का यादगार फोटो कौन-सा है? उन्होंने बताया, ‘हमारे यहां मेला लगता था हम सब मेला देखने जाते थे। एक बार वहीं पर हमने फोटो खिंचवाई थी। चादर टांगकर स्टूडियो बना था। लकड़ी का एक चांद था। जिस पर मेरी मां और बहन बैठ गईं और पीछे हम सातों भाई खड़े हो गए। पीछे लगे चादर पर कागज का तारा चिपका था, वो फोटोग्राफ आज भी मेरे जेहन में जिंदा है।

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