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Interview : ‘दिव्य दृष्टि’ को लेकर अधविक महाजन ने कही ऐसी बातें...

सीरियल ‘बानी: इश्क द कलमा’ में सोहम का किरदार निभाकर पॉपुलैरिटी बटोरने वाले अधविक महाजन इन दिनों सुपर नेचुरल सीरियल ‘दिव्य दृष्टि’ में रक्षक के रोल में नजर आ रहे हैं। रक्षक एक रूड नेचर वाला बिजनेसमैन है। रियल लाइफ में क्या अधविक भी रूड नेचर के हैं? सुपरनेचुरल सीरियल्स के ट्रेंड के बारे में वह क्या सोचते हैं? बातचीत अधविक महाजन से।

Interview : ‘दिव्य दृष्टि’ को लेकर अधविक महाजन ने कही ऐसी बातें...

टेलीविजन से पहले अधविक महाजन ने साल 2008 में हिंदी फिल्म ‘कॉन्टेक्ट’ और साल 2011 में साउथ इंडियन फिल्म ‘ओसारावली’ में एक्ट कर चुके थे। लेकिन ग्लैमर इंडस्ट्री में उन्हंि पहचान 2013 में मिली, जब उन्होंने सीरियल ‘बानी : इश्क द कलमा’ में सोहम का किरदार निभाया। इसके बाद वह सीरियल ‘नागिन’, ‘मेरी दुर्गा’ और ‘लाडो : वीरपुर की मर्दानी’ में भी नजर आए। इन दिनों वह स्टार प्लस के सीरियल ‘दिव्य दृष्टि’में नजर आ रहे हैं। इस सीरियल और उसमें उनके किरदार से जुड़ी बातचीत अधविक महाजन से।

सीरियल ‘दिव्य दृष्टि’ की स्टोरी क्या है?

यह दो बहनों की कहानी है। एक का नाम दिव्या है, दूसरी का दृष्टि। दोनों के पास कुछ खास शक्तियां हैं। लेकिन दोनों बचपन में बिछड़ जाती हैं। बड़ी होने पर दोनों अलग-अलग तरीके से रक्षक यानी मेरे किरदार की जिंदगी में आती हैं। मेरा किरदार किस तरह दोनों बहनों को आपस में मिलवाता है, फिर हम तीनों मिलकर एक और शक्ति की खोज में किस तरह जुटते हैं, यह सब कहानी में दिखाया जाएगा।

इसमें आप किस तरह का किरदार निभा रहे हैं?

मेरे किरदार का नाम रक्षक है। यह एक ऐसा किरदार है, जो मैंने आज तक कभी नहीं निभाया है या यह कहूं कि मेरे अब तक के निभाए किरदारों से एकदम अपोजिट है। रक्षक एक बहुत बड़ा बिजनेस मैन है, वो अपने काम से मतलब रखता है। चूंकि अमीर है, इसलिए थोड़ा रूड है। उसका किसी के साथ कोई इमोशनल अटैचमेंट भी नहीं है। लेकिन वह अपनी मां के बेहद करीब है, अपनी मां से बहुत प्यार भी करता है।

रक्षक और अधविक में क्या कॉमन और डिफरेंट है?

रक्षक और अधविक में दो बातें कॉमन हैं, एक तो यह कि रक्षक की तरह मैं भी अपने काम से मतलब रखता हूं। दूसरा, उसकी तरह ही मैं भी अपनी मां के बेहद करीब हूं, अपनी मां से बहुत प्यार करता हूं। आज मैं जो कुछ भी हूं, सिर्फ अपनी मां की बदौलत हूं। जहां तक बात हम दोनों में डिफरेंस की है, तो मैं यही कहूंगा कि मैं कभी किसी को एटिट्यूड नहीं दिखाता हूं, जबकि रक्षक काफी रूड है। उसके मन में किसी के लिए इमोशनल फीलिंग नहीं है, लेकिन मैं इमोशंस में गहरा विश्वास रखता हूं।

अगर असल जिंदगी में आपके पास फ्यूचर देखने की ‘दिव्य दृष्टि’ होगी, तो आप क्या देखेंगे और अपने पास्ट को देखकर क्या बदलेंगे?

अगर मेरे पास असल जिंदगी में अपना भविष्य देखने की पावर हो तो मैं यही देखूंगा कि फ्यूचर में मेरे माता-पिता किस तरह से रह रहे हैं, दोनों स्वस्थ और खुश हैं या नहीं, उन्हें कोई तकलीफ तो नहीं है। बस उनके अलावा कुछ और देखने में मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है। जहां तक बात पास्ट की है, तो मुझे लगता है मैंने आज तक जो भी किया है, सब सही किया है और जो कड़वी चीजें खुद हुई हैं, उससे मैंने सीख ली। मेरा पास्ट एकदम परफेक्ट है, मैं बहुत खुश हूं, मुझे कुछ बदलने की जरूरत नहीं है।

इन दिनों ‘दिव्य दृष्टि’ टाइप के सुपरनेचुरल सीरियल्स ट्रेंड में हैं, आपको नहीं लगता ऐसे सीरियल्स समाज में अंधविश्वास फैलाते हैं?

‘दिव्य दृष्टि’ बाकी सीरियल्स की तरह टिपिकल सुपरनेचुरल सीरियल नहीं है। सुपरनेचुरल चीजें सिर्फ इसका एक हिस्सा हैं। इसमें ड्रामा है, रोमांस है, कॉमेडी है और सबसे बड़ी बात इसमें भरपूर एक्शन है, जो आमतौर पर सीरियल्स में नहीं होता है।

अकसर सीरियल्स नायिकाओं के ही नाम पर होते हैं, नायकों के नहीं, जबकि नायकों की भूमिका भी अहम होती है, इस बारे में क्या कहेंगे?

माना कि कोई नमकीन डिश नमक के बिना बेस्वाद लगती है, लेकिन उसमें नमक डालने के बाद उस डिश का नाम कोई नमक नहीं रखता। बस इसी तरह मेल लीड का भी सीरियल्स में अहम रोल होता है, लेकिन सीरियल्स नायिकाओं के नाम से जाने जाते हैं। दूसरी बात मैं यह कहूंगा कि मैंने करियर के शुरुआत में ‘बानी : इश्क द कलमा’ सीरियल किया था, जो दो बहनों की कहानी थी, मगर मुझे और मेरे किरदार को दर्शकों ने बहुत प्यार दिया। मुझे लगता है नाम में कुछ नहीं रखा काम मैटर करता है, आपका किरदार मायने रखता है।

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