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International Women''s Day 2019 : विद्या बालन का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

विद्या बालन को अपने महिला होने पर गर्व है। वह महिलाओं को कहीं से भी कमजोर नहीं मानतीं। उनका कहना है कि महिलाएं अपनी शर्तों से अपनी जिंदगी पूरे आत्मसम्मान के साथ जी सकती हैं। ‘द डर्टी पिक्चर’, ‘कहानी’, ‘तुम्हारी सुलु’ और ‘बेगम जान’ में सशक्त किरदार निभाकर उन्होंने यह संदेश भी दिया। महिलाएं कैसे सशक्त बनें, बता रही हैं इस बातचीत में विद्या बालन।

International Women
विद्या बालन (Vidya Balan) को अपने महिला होने पर गर्व है। वह महिलाओं को कहीं से भी कमजोर नहीं मानतीं। उनका कहना है कि महिलाएं अपनी शर्तों से अपनी जिंदगी पूरे आत्मसम्मान के साथ जी सकती हैं। ‘द डर्टी पिक्चर’, ‘कहानी’, ‘तुम्हारी सुलु’ और ‘बेगम जान’ में सशक्त किरदार निभाकर उन्होंने यह संदेश भी दिया। महिलाएं कैसे सशक्त बनें, बता रही हैं इस बातचीत में विद्या बालन।
सवाल- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आपके लिए कितना मायने रखता है?
जवाब- मेरे नजरिए से देखें तो महिला दिवस संपूर्ण नारी जाति के सम्मान का दिन है। मेरी नजर में किसी त्योहार से कम नहीं है।
सवाल- आज भी हमारे समाज में लड़की के जन्म पर लोग खुश नहीं होते, वे लड़के के जन्म की कामना करते हैं। आपको कभी ऐसा महसूस हुआ कि काश! आप लड़की नहीं लड़का होतीं?
जवाब- कभी नहीं। मैं खुशनसीब हूं कि मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ कि मुझे अपने लड़की होने पर तकलीफ हुई, क्योंकि मेरे परिवार के लोग बहुत ही पढ़े-लिखे और समझदार हैं। उनकी नजर में स्त्री या पुरुष में कोई फर्क नहीं है। मुझे कभी इस बात का अहसास नहीं हुआ कि मैं लड़की हूं, इसलिए मैं आजाद जिंदगी नहीं जी सकती और न ही अपनी सोच अपने परिवार के सामने रख सकती हूं।
सवाल- बतौर हीरोइन जब आपने ‘द डर्टी पिक्चर’ जैसी बोल्ड फिल्म की थी, उस वक्त क्या आपके घर वालों ने यह नहीं कहा कि आप एक लड़की हैं, ऐसा रोल करने के बाद लोग आपको गलत समझने लगेंगे?
जवाब- मुझे जब ‘द डर्टी पिक्चर’ का ऑफर आया तो मैं यह रोल करने में हिचकिचा रही थी। उस वक्त मेरे घर वालों ने ही मुझे सपोर्ट दिया और कहा कि यह रोल मुझे जरूर करना चाहिए, क्योंकि यह एकदम चैलेंजिंग रोल है।
सवाल- आज भी महिलाओं पर वैसे ही अत्याचार होता है, जैसे पहले होता था। ऐसे में क्या आप यह नही मानेंगी कि आज की महिला भी कमजेार है?
जवाब- बात कमजोर या बलवान की नहीं है बल्कि आत्म-सुरक्षा की है। अगर आप अपना बचाव करना जानती हैं, आपको ऐसे लोगों से निबटने का तरीका आता है तो आप कमजेार होते हुए भी अपने आपको बचा सकती हैं। वहीं अगर आप ताकतवर होते हुए भी डर कर घुटने टेक देती हैं, अपने ऊपर हुए अत्याचारों पर चुप रहती हैं तो आप हमेशा के लिए कमजोर पड़ जाएंगी।
सवाल- क्या एक महिला होने के नाते आपको कभी इस तरह के दौर से गुजरना पड़ा, जब आप कमजोर हो गई हों?
जवाब- हां, कई बार मुझे लोगों ने यह अहसास दिलाने की कोशिश की कि मैं कमजोर हूं, मुझे अन्याय सहना पड़ेगा। लेकिन मैंने ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब दिया, मैंने अपने आपको बिना डरे पूरी मेहनत के साथ साबित किया है। वे ही लोग, जो कभी मुझे कमजोर कहलाने पर जुटे हुए थे, वही आज मुझे बहादुर कहते हैं।
सवाल- क्या आप अपने महिला होने पर गर्व महसूस करती हैं?
जवाब- आफकोर्स, मुझे अपने महिला होने पर गर्व है। पर्सनली मैंने ऐसे-ऐसे कार्य किए हैं, जिस पर मेरे दोस्त और परिवार वाले मुझ पर गर्व महसूस करते हैं।
सवाल- महिला दिवस के अवसर पर आप उन महिलाओं से क्या संदेश देना चाहेंगी, जो अपने आप को लाचार, मजबूर और बेबस समझती हैं?
जवाब- यही कि अगर आप एक बार सोच लें कि आप कमजोर नहीं हैं, आप वो सब कुछ कर सकती हैं, जो एक पुरुष कर सकते हैं तो आप अपने आप जीत की तरफ पहुंचती नजर आएंगी। आपकी यह चाह ही आपको कामयाबी की राह दिखाएंगी। वही अगर आप सोचती रहेंगी कि मैं लड़की हूं, मैं भला क्या कर सकती हूं, तो आप जिंदगी में कभी कामयाब नहीं हो पाएंगी।
सवाल- आज जिस तरह के महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं खासतौर पर बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, उसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए?
जवाब- बड़ों को तो अपनी सुरक्षा खुद ही करनी होगी। इसलिए उनको स्पेशल ट्रेनिंग अपनी सुरक्षा के लिए देनी चहिए। जहां तक बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की बात है तो इसके खिलाफ तो सख्त कदम उठाना चाहिए।
सवाल- महिला दिवस के अवसर पर आप महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
जवाब- मैं यही कहना चाहूंगी कि महिलाएं अपने आप को कमजोर ना समझें, हालात का डट कर सामना करें। एक दिन सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी।
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